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चूहों को मायूस करने वाला बजट - दीपक गिरकर

चूहों को मायूस करने वाला बजट

आम बजट 2020 से चूहा बिरादरी को काफी उम्मीद थी कि सरकार खपत को बढ़ावा देने के लिए, संकट से गुजर रहे चूहा समाज के लिए ठोस कदम उठाएगी। लेकिन 1 फरवरी 2020 को लोकसभा में पेश हुए आम बजट को सुनकर चूहे मायूस हो गए। 1 फरवरी की रात को चूहों के नेताओं ने बिल्ली बाग़ में अपनी बिरादरी की संसदीय बोर्ड की आपातकालीन मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में चूहा नेताओं ने इस बजट पर तीखी प्रतिक्रया देते हुए बजट को चूहा विरोधी बताया और अपने वक्तव्य में सरकार पर आरोप लगाया कि देश के चूहों के लिए इस बजट में कोई योजना नहीं है, लेकिन इस बजट से सरकार ने विदेशी चूहों को काफी फ़ायदा पहुँचाया है। इस बजट से ग्रामीण और शहरी, सभी चूहे काफी निराश हो गए हैं।

इस चूहा बिरादरी के संसदीय बोर्ड की मीटिंग में एक अर्थशास्त्री चूहा नेता भी थे। उन्होंने इस बजट को नारों और जुमलों का पिटारा बताते हुए कहा – “इतिहास का सबसे लंबा बजट भाषण पढ़ने के बाद भी वित्त मंत्री हमारा भरोसा जीतने में नाकाम रही। पूरे बजट भाषण में हमारे पोषण, बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा तक नहीं की। सरकार ने इस आम बजट में खाद्य निगम को दी जानेवाली सब्सिडी में भारी कटौती की है। सब्सिडी की वजह से ही खाद्य निगम अनाज सीधे किसानों से खरीदकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्य निगम के वेयर हाउस में रखते हैं। अब खाद्य सब्सिडी मद में राशि की कटौती से खाद्य निगम किसानों से कम अनाज की खरीदी करेगा जिससे हमें कम अनाज खाने को मिलेगा।

मनरेगा और पीएम-किसान योजनाओं को इस बजट में पिछले बजट से कम राशि आवंटित की गई है जिससे छोटे किसान और भूमिहीन मजदूरों की आय कम होगी और वे अपने भोजन के लिए कम अनाज खरीद पाएंगे जिससे हमारे ग्रामीण चूहों को भरपेट अनाज खाने को नहीं मिल पायेगा। सरकार ने कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने, किसान कल्याण और किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी-बड़ी बाते की, 16 सूत्री कार्यक्रमों की घोषणा की, लेकिन इन बड़ी-बड़ी बातों का बजट से कोई लेना-देना नहीं है। बजट में सिर्फ घोषणाएं की गई है और योजनाओं के लिए राशि का आवंटन नहीं किया गया। सरकार के इस रवैये से गाँवों के साथ शहरों में भी हमारे पोषण की समस्या और बढ़ेगी। वैसे हम शहर के चूहे तो ऐसी आपात स्थिति में भ्रष्टाचार वाली फाइलों, डायरियों को कुतर कर अपना गुजारा जैसे तैसे कर लेते हैं क्योंकि ऐसी महत्वपूर्ण फाइलों को कुतरने के एवज में हमें बोनस मिलता है। लेकिन सरकार ने इस बजट में विदेशी और अनिवासी चूहों को प्रोत्साहन दिया है। विदेशी और अनिवासी चूहों को सरकारी प्रतिभूतियों को कुतरने के लाइसेंस देने का प्रस्ताव रखा है।

इस बजट में स्टेशनरी भी महँगी हो गई है जिससे स्कूल, कॉलेज, कार्यालय में कम स्टेशनरी की खरीदी की जायेगी और हमारी बिरादरी को कम रोजगार मिलेगा। वैसे भी जब से इस पार्टी की सरकार बनी है तब से हमारी बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। यह सरकार अब समस्याओं के लिए न तो समिति का गठन करती है और न ही आयोग बनाकर सेवानिवृत्त अधिकारियों को रोजगार देती है। समिति या आयोग की जो रिपोर्ट बनती थी वे बहुत बड़ी बनती थी और इनकी रिपोर्ट इतने अधिक समय बाद आती थी कि सरकार और आम जनता उस समस्या को भूल चुकी होती थी। इन रिपोर्ट को कुतरने के लिए हमारी बिरादरी को बहुत रोजगार मिलता था और तब हम ओवरटाइम भी करते थे। यह बजट विदेशी चूहों की मदद करने वाला है।”

बोर्ड मीटिंग की समाप्ति के पूर्व सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि चूहा बिरादरी इसी बिल्ली बाग़ में सरकार की चूहा विरोधी प्रस्तावों और नीतियों का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन तब तक करती रहेगी जब तक सरकार हमारे पोषण और बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए बजट में आवश्यक संशोधन नहीं कर देती।

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दीपक गिरकर

व्यंग्यकार

28-सी, वैभव नगर, कनाडिया रोड,

इंदौर - 452016


मेल आईडी : deepakgirkar2016@gmail.com

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