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पति पत्नी का वेलेंटाइन डे - हनुमान मुक्त

वेलेंटाइन डे - प्रेम दिवस विशेष रचना. रचनाकार के पाठकों के लिए वेलेंटाइन डे पर प्रेम से ओतप्रोत एक दिलचस्प व्यंग्य.

पति पत्नी का वेलेंटाइन डे

50 की उम्र पार करते-करते जैसी मेरी स्थिति है, वैसी ही मेरे जैसे काफी लोगों की हो जाती है ।

बच्चे पढ़ने लिखने या नौकरी करने बाहर चले जाते हैं और घर में रह जाते हैं पति पत्नी नाम के दो जीव ।साथ रहते हुए भी एकाकी से।

फरवरी के महीने के छह  दिन बीत चुके थे ही । अगले दिन सुबह, चाय पीता हुआ  मैं अखबार पढ़ रहा था और पत्नी मोबाइल। यह हमारा रोज का क्रम था। हमें प्यार से बतियाए बरसों हो गए थे।

जब कभी बच्चे घर आते तब  रात को साथ बैठकर उनके साथ जरूर हंसते बोलते और बोलने का कोटा पूरा कर लेते।

यही हमारी दिनचर्या थी किसी को किसी से कोई गिला शिकवा नहीं था ।सबने इसे आत्मसात कर लिया था। जिए जा रहे थे ।

आज जाने क्या हो गया। लगता था, जैसे किसी स्वयंभू गुरु ने श्रीमतीजी पर  कृपा बरसा दी थी। वह पचपन से बचपन में चली गई। मुझसे प्यार से बात करने लगी। बोली ,"सुनते हो या इसी तरह अखबार में घुसे रहोगे। फरवरी का महीना चल रहा  है। बसंत उतार पर है। वैलेंटाइन डे  का खुमार चढ़ रहा है। क्यों नाअब की बार हम भी वैलेंटाइन डे मना ले ।"

उसके मुंह से ऐसी बात सुनकर मेरे चेहरे पर आश्चर्य घुमड़ आया।

मैं बोला," क्या बात कर रही हो? दिमाग ठिकाने पर है या नहीं!

" हां ,"सब ठिकाने पर है ।अपने जमाने में तो ऐसा कोई डे या वीक होता नहीं था। अब ही सही। अब तो ऐसा कुछ करें।

बच्चे भी घर पर रहते नहीं है कोई शर्म है या संकोच की बात भी नहीं है ।अबकी बार हम डे ही नहीं ,पूरा वेलेंटाइन वीक मनाएंगे।"

भूखे को क्या चाहिए दो रोटी ।मैंने कहा," तुमने रात में कोई ऊट पटांग सपना तो नहीं देख लिया। जो इस प्रकार की बहकी बहकी बात कर रही हो।"

जहां हमें घड़ी दो घड़ी सकून से बात करने की फुर्सत नहीं, वहां तुम सारा वीक वैलेंटाइन वीक मनाने की बात कर रही हो।

वह बोली ,तभी तो !

"मोबाइल पर मैंने अभी एक मैसेज देखा था, जिसमें इस उम्र के दंपतियों को जिनके पास एक दूसरे से बात करने को समय नहीं है या मन नहीं है उन्हें वेलेंटाइन वीक मनाना चाहिए ऐसा उस मैसेज में बता रहे थे ।"

अपनी जवानी की बातें याद करते हुए कुछ दिनों के लिए ही सही जवान दिल बन जाना चाहिए।

आज यानी सात फरवरी से इस की शुरुआत हो चुकी है। तुम मेरे लिए गुलाब का फूल लेकर आना। मैं भी तुम्हारे लिए लाऊंगी ।इस दिन रोज डे होता है ।

8 फरवरी को मैं तुम्हें और तुम मुझे प्रपोज करना ।मैं तुम्हारा प्रपोज असेप्ट करूंगी ।जैसा तुम कहोगे वैसा करूंगी ।जैसा तुम रखोगे वैसे रहूंगी।

9 फरवरी को चॉकलेट डे है ।मैं तुम्हारे लिए तुम्हारी पसंद की चॉकलेट लाऊंगी ।तुम भी मेरे लिए लाना ।

10 फरवरी को टेडी डे के दिन हम साथ-साथ स्टूडियो जाकर फोटो खिंचवा आएंगे। अपना एक सुंदर सा फोटो फ्रेम में लगवा कर ड्राइंग हॉल में सजाएंगे। वैसे भी अब हम बीयर जैसे ही तो दिखते हैं।

11 फरवरी को हम एक दूसरे से प्रॉमिस करेंगे ।अब हम कभी एक दूसरे से में कमी नहीं निकालेंगे। शाम को साथ साथ बैठकर, मैं तुम्हें और तुम मुझे दिन भर की बातें सुनाना ।एक दूसरे की बातों में कमी नहीं निकालेंगे। पूरक बनकर रहने का वादा करेंगे।

12 फरवरी को हग डे है। हमें गले मिले बरसों हो गए। उस दिन जी भर कर गले मिलेंगे और याद है तुम्हें ,13फरवरी को किस डे है। पहले रोज किस डे मनाते थे ।अब 13 फरवरी से दोबारा इसकी शुरुआत करेंगे। रोज सोने से पहले एक दूसरे को किस कर के ही सोने का वादा करेंगे।

14 फरवरी को तो वैलेंटाइन डे है। तुम भी छुट्टी ले लेना। मैं भी छु ले लूंगी ।खूब मस्ती करेंगे। पहले जैसे तुम मेरे बालों को गूंथा करते थे ।उस दिन भी तुम मेरे बालों की चोटी बनाना ।जूड़ा बनाना। कितना अच्छा जुड़ा बनाते थे तुम।

पहले तुम अपनी पीठ पर साबुन लगाने के बहाने से मुझे बाथरूम में बुला लिया करते थे ।मैं मना कर दिया करती थी। उस दिन भी बुलाना ।मैं मना नहीं करूंगी। तुम्हारी पीठ पर साबुन लगाउंगी।

बालों में कलर कराने बाजार मत जाना ।मैं तुम्हारे बालों में कलर करूंगी ।मैं भी ब्यूटी पार्लर नहीं जाऊंगी ।तुम्हारे बताएं नुस्खे से ही अपने चेहरे को चमकाउंगी। शाम को डिनरबाहर ही लेंगे। खूब मस्ती करेंगे। मजे करेंगे ।आखिर तुम मेरे और मैं तुम्हारी वैलेंटाइन जो हूं।

उसके मुंह से ऐसी बात सुनकर मेरा गला भर आया ।आंखें डबडबाने लगी। मुझे लगा आज संत वैलेंटाइन की आत्मा मेरी पत्नी  पर सवार हो गई है और वही इससे अपना वीक मनाने को कह रहा है। चाय का कप खाली कर,अखबार को एक तरफ रख, मैं खड़ा हो गया ।पत्नी को  बड़े जोर से गले लगा लिया।

मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे। उसकी आंखों से भी ।साथ रहते हुए भी हम एकाकी से थे। आज हमारा एकाकीपन आंसुओं में बह गया ।काफी देर तक हम एक दूसरे को गले लगे रहे। आंसू बहते रहे ।मैं कभी उसके सिर पर हाथ फेर रहा था  तो कभी उसका सर चूम रहा था।

वह भी अपने हाथों से मेरी पीठ सहला रही थी। हम आज शाम से वेलेंटाइन वीक मनाने के वायदे  के साथ अलग हुए और ऑफिस जाने की तैयारी में जुट गए।

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