नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

स्त्रियों को अंधविश्वास, अशिक्षा और शोषण से मुक्ति चाहिए - मीरा जैन (साक्षात्कार) -सुरेश सौरभ

स्त्रियों को अंधविश्वास, अशिक्षा और शोषण से मुक्ति चाहिए- मीरा जैन

(साक्षात्कार)

  -सुरेश सौरभ

     मीरा जैन उज्जैन की प्रसिद्ध लेखिका हैं। साहित्य सेवा और समाज सेवा में आप की सक्रिय भागीदारी है। इनकी लघुकथाओं पर विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा शोध कार्य करवाया जा चुका है। देश की अग्रणी पत्र-पत्रिकाओं में आप की लघुकथाएं, हास्य-व्यंग्य,लेख, कविताएं, आदि निरन्तर प्रकाशित हो रहीं हैं।आप की पहली रचना लघुकथा का नाम सर्वश्रेष्ठ है, जो नई दुनिया में प्रकाशित हुई थी ।आपकी रचनाएं कई भाषाओं में अनूदित हुईं हैं आकाशवाणी जगदलपुर इंदौर से अनेक रचनाओं के प्रसारण के साथ ही दूरदर्शन भोपाल से कविताओं का प्रसारण भी हुआ है। भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 के विद्वानों की सूची में आप का नाम सम्मिलित  हुआ है। 101लघुकथाएं, मीरा जैन की सौ लघुकथाएं, दीन बनाता है दिखावा, हेल्थ हादसा , मानव मीत लघुकथाएं , कविताएं मीरा जैन की आदि कई संग्रह आप के प्रकाशित और चर्चित हो चुके हैं। अनेक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के सम्मान प्राप्त करते हुए बाल कल्याण समिति के सदस्य के पद पर रहते हुए सैकड़ों निराश्रित बालक-बालिकाओं का पुनर्वास करके, शोषित , पीड़ित, बालश्रम आदि से प्रभावित बच्चों को रेस्क्यू के द्वारा आजाद भी कराया है ‌। पिछले दिनों साहित्य और समाज सेवा के मूल्यों पर आप से विस्तृत बातचीत हुई, पेश है उसके मुख्य अंश।

* आप के लेखन की शुरुआत कब हुई?

* मैं अपने स्कूल कालेज के दिनों से ही लिखती थी, पर व्यवस्थित रूप से, 1994 से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लिखना शुरू किया।

* लेखन में आप क्यों सक्रिय हैं। आप के लेखन का मूल उद्देश्य क्या है।

*हमारे एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो, इसलिए सामाजिक विसंगतियों ,विद्रूपताओं पर अपने लेखन से इन पर निरन्तर प्रहार करतीं हूं। समाज में एकता, समानता, विश्व बन्धुता का वातावरण व्याप्त हो इसलिए  शोषितों, वंचितों निराश्रितों की संवेदनाओं को कहानियों कविताओं से उकेर कर उन्हें जन-जन से जोड़ कर उनका हर स्थिति में भला कराना ही मेरी रचनाधर्मिता का मूल उद्देश्य है।

*आप गद्य-पद्य की समान विधाओं में लिखतीं है। आप को सबसे अधिक संतुष्टि किस विधा में मिलती है।

*गद्य लेखन में ,मुझे सबसे अधिक संतुष्टि मिलती है और लघुकथा मेरी सबसे प्रिय विधा है।

*आप के लेखन में मूल विषय क्या होते हैं।

*पारिवारिक टूटन, सामाजिक विसंगतियां, गिरता राजनैतिक स्तर, बढ़ती सांप्रदायिकता, जैसे सम-सामयिक ज्वलंत विषय ही मेरे लेखन के होते है।

*आप के पसंदीदा लेखक कौन है जिनसे आप को लेखन की निरन्तर प्रेरणा मिलती रही।

*तमाम नाम हैं पर कुछ ही गिना पाऊंगी। प्रेमचंद,जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, निराला, और वर्तमान में सामाजिक व राजनीतिक परिस्थितियों के अतिरिक्त पाठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाएं ही लेखन को प्रेरित करतीं  हैं।

*आप के लेखन में परिवार कितना सहयोग मिला।

*मेरे लेखन में परिवार का पूरा सहयोग मिला। जब भी कुछ लिखती अपने बच्चों को सुनाती। साहित्य के संस्कारों की वजह से ही मेरे बच्चों ने समाज में अच्छी पद-प्रतिष्ठा हासिल की।

*स्त्री विमर्श को लेकर बहुत सी चर्चाएं होतीं हैं। कई प्रगतिशील महिलाएं स्त्रियों के देह मुक्ति की वकालत करतीं हैं। इस विषय में आप के क्या विचार हैं।

*स्त्रियों को देह मुक्ति नहीं बल्कि, अशिक्षा, अंधविश्वासों, दहेज व तमाम शोषणों से मुक्ति चाहिए।

मेरा मानना है कि स्त्रियों को अपने ऊपर  होने वाले अत्याचारों का प्रतिकार करना चाहिए। शिक्षा से उसकी प्रगति होगी। देहमुक्ति अथवा अपनी स्वच्छंदता से वह अपना ही अहित करेंगी।

*आप साहित्य सेवा के साथ समाज सेवा में भी सक्रिय हैं। समाज सेवा किन लोगों के बीच में रहकर करतीं हैं।

* मैं पांच साल तक प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी बाल कल्याण समिति से जुड़ी रही। बाल साहित्य में लेखन से मुझे यह महत्वपूर्ण सरकारी पद मिला था। जिसमें रहते हुए, बेसहारा, शोषित बालक और यौन शोषण की शिकार अनेक बालिकाओं को रेस्क्यू ऑपरेशन द्वारा मुक्त कराया। अभी भी तमाम  निराश्रित महिलाओं और बेसहारा  मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों के लिए काम कर रही हूं। इनके बीच काम करते हुए मुझे आत्म संतुष्टि मिलती है।

*आप की कहानी पर क्या कोई फिल्म बनी है।

*मेरी एक लघुकथा पर मुम्बई में शार्ट फिल्म बन चुकी है। जल्द ही यह प्रदर्शित होगी।


   लेखक-सुरेश सौरभ

निर्मल नगर लखीमपुर खीरी

पिन-262701


उत्तर प्रदेश

कापीराइट-लेखक

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.