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संस्मरण - मतलब के यार - सुनीता यादव

मतलब के यार

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चाचा थोडी चटनी डाल दो,ताऊ जी प्याज डाल देना। बफ्फा (हाफ टाईम) होते ही ठेले पर बच्चों की भीड़ लग जाती थी। चवन्नी की छोटी प्लेट और अठन्नी की बडी प्लेट छोले चावल की मिल जाया करती थी। जिन बच्चों को घर से पैसे मिलते थे वो रोज खाते थे। मां पिता जी की कमाई से चवन्नी बचाकर मुझे भी दे देती थी। पर हम उस चवन्नी को उसी दिन खर्च करते थे जिस दिन बहुत मन करता था, वरना अपनी चवन्नी बचाकर ले जाते थे। माँ जब दूसरी चवन्नी दे देती थी तब या तो चवन्नी खर्च कर लेते थे या फिर अपनी अठन्नी को सजों के रखते थे। बात उस समय की है जब कक्षा -६ में कपडे का थैला टागंकर पढ़ने जाते थे। माँ ने थैले में ही बटन लगाकर एक जेब सिल दी थी, जिसमें मैं खेलते वक्त अपनी अठन्नी रख लिया करता था। कहीं खेलते समय खो ना जाये।

शनिवार के दिन आखिरी घन्टा खाली रहता था उस दिन हम कालेज के मैदान में पिट्ठू खेलते थे। और थैला एक ओर रख देते थे। एक दिन मेरे थैले की जेब से अठन्नी गायब थी,लगा कि आज किसी ने जुडी जुडाई पूंजी चुरा ली। पर एक दोस्त ने बताया कि तेरे थैले से पैसे राजेश ने चुराये है। मैंने राजेश से पूछा कि तूने मेरे थैले से पैसे चुराये। उसने तपाक से कहा हाँ चुराये। मैंने कारण पूछा तो मैं अवाक उसका मुंह देखता रह गया। मेरे पास उसका कोई जवाब नहीं था। आज कई दशक बीत जाने के बाद भी उसके बो शब्द कानों में गूंजते दिखाई देते है,जब वो कहता है------रमेश आ चल चाट खा के आयेंगे, नहीं भाई मेरे पास पैसे नहीं है। अरे चल पैसे मैं दूँगा।

बालपन था लालच आ गया एक प्लेट खा ली। बात बीत गई। दो हफ्ते बाद मासिक टेस्ट था,उस समय मासिक टेस्ट हुआ करते थे,जिसके नम्बर वार्षिक रिजल्ट में जुड़ते थे। टेस्ट नीचे जमीन पर बैठ कर होते थे । और हम सब बच्चे एक दूसरे के आगे पीछे बैठ जाते थे। गणित का परचा था। और राजेश ठीक मेरे पीछे बैठा था। बोला रमेश मुझे भी टिपा दे, मैंने कापी टेढ़ी करके उसे दिखा दिया और वह भी पास हो गया। मैंने उसकी चाट की प्लेट खा रक्खी थी,सो दो बार मास्टर साब की डांट भी खाई , रमेश सीधे बैठो नहीं तो पिटोगे। पर प्लेट का अहसान उस डांट से कही भारी था।

आज भी मैं अवाक हूं उसके उत्तर का आज भी मेरे पास कोई जवाब नहीं है। उसने तपाक से उत्तर दिया था कि मैंने अठन्नी इसलिये चुराई है कि मैंने तुझे चवन्नी चवन्नी की दो बार चाट खिलाई थी। मुझे आज भी याद है कि उसने मुझे चाट गणित के पेपर में टीपने की वजह से खिलाई थी। पर मैं कल की तरह आज भी निरूत्तर हूं।

2 टिप्पणियाँ

  1. सच बालपन की कुछ बातें भूले न भुलाये जा सकते हैं , मतलब की बातें तब कुछ बच्चे ही समझ सकते थे
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  2. सच बालपन की कुछ बातें भूले न भुलाये जा सकते हैं , मतलब की बातें तब कुछ बच्चे ही समझ सकते थे
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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