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*बासन्ती पलाश* - अविनाश तिवारी

*जय जनता*

कुछ जीते हैं कुछ हारे हैं
सभी के विकास नारे हैं
लोकतंत्र के पर्व में
टिमटिमाते सभी ये तारे हैं।

गिर के उठना फिर सम्भलना
जीवन हमें सिखाती है।
कभी जीत मिली कभी हार
जीवन पाठ पढ़ाती हैं।

मतभेद को मनभेद न करना
जनादेश यही अब कहती है,
मिलकर सारे देश बढ़ाओ
सब लोकतंत्र के प्रहरी हैं।


जो जीता वो सेवक है
कर्तव्य तुम्हें निभाना है
भूल न जाना वादों को
फिर वापस यहीं पे आना है।

जय जनता जनार्दन जय लोकतंत्र
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा

*आकाशवाणी*

युवाओं की सोच मैं,जन जन की वाणी हूँ।
मैं आकाश वाणी हूँ मैं आकाशवाणी हूँ।।

उन्नत कृषि विज्ञान की गाथा
गांव गांव पहुँचाया है।
सत्ता के गलियारों को मैंने
लोकतंत्र समझाया है।।
क्रांति का मैं बिगुल बना
शांति का मैं दूत बना
तोड़ अन्धविश्वासों का जाल
समाज का मैं पूत बना
देशभक्ति खून की उबलती कहानी हूँ
मैं आकाशवाणी हूँ मैं आकाशवाणी हूँ।

ज्ञान भी विज्ञान भी
आध्यात्मिक उत्थान भी
समग्र विकास में
देश के निर्माण में
निरंतर प्रगतिमान जवानी हूँ
मैं आकाशवाणी हूँ मैं आकाशवाणी हूँ

युद्ध का मैं घोष था
युवाओं का जोश था
सांस्कृतिक विकास की
मेरी पहचान थी
गुफाओं से अट्टालिकाओं में
बहती मैं रवानी हूँ
मैं आकाशवाणी हूँ मैं आकाशवाणी हूँ।


आज सांसे ले रहा हूँ
लुप्त कहीं खो रहा हूँ
दर्द समेटे समाज के
पतन को मैं देख रहा हूँ

हो सको तो पहचान लो
मूल्य को संभाल लो
सुन सको तो रुको जरा
हो सके तो सुनो जरा
मैं खलिश हिंदुस्तानी हूं
मैं आकाशवाणी हूं।

@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा

*जलता दिल्ली*

रो रहा दिल दिल्ली जल रहा है
राम से रहमान का रार हो रहा है

कभी ईद की सेवईयां साथ में जो खाये थे
होली की तरंग में खूब जो नचाये थे।

जुम्मन और अलगू  की रोटियां
एक तवे पर बनती थी
रमा और शमा हर घर में तब
चहकती थी

रहीम की रामराम शंकर का
आदाब बड़ा निराला था
दिलों में जज्बात था हर इन्सान
भोला भाला था।

अब आग लगी है रिश्तों पर
मानवता शर्मसार है
चाँदबाग से चांदनी चौक तक
सिर्फ बेशर्म बाजार है।

दंगों की आग पर
राजनीति के तवे जले हैं
गरीब मरा है हर जगह
वोटों से इंसान को
तौले गए हैं।।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा

*क्यों तुम आग लगाते हो*

क्यों तुम आग लगाते हो
नफरत क्यों फैलाते हो

गीता कुरान बाइबिल रामायण
जीवन का संदेश बताती है,
मानव धर्म है सबसे ऊंचा
प्रेम की बात समझाती है।
उन्मादी भीड़ में जाकर
इंसानियत भूल जाते हो
क्यों तुम आग लगाते हो

ईद मेरी होली तेरा किसने तुमको
बहकाया है
वोटों से गिनती करके तुमको
रास्ते से भटकाया है।
राजनीति की कुटिल चाल के मोहरे तुम बन जाते हो,
क्यों तुम आग लगाते हो।

खून की होली खेल गए तुम
अंकित शहनाज का घर उजाड़ा है,
देश का मर्म न जान सके तुम
सड़कों पर डेरा जमाया है।
भारत माता के दामन में
कैसे दाग लगाते हो
क्यों तुम आग लगाते हो।

राम यहीं रहमान यहीं
इबादत इनके अनेक हैं
ह्रदय में सबके बसे हैं प्रभु
हिंदुस्तानी एक हैं
नेक राह चलने में अब
तुम काहे घबराते हो
क्यों तुम आग लगाते हो
नफरत क्यों फैलाते हो
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा

*बासन्ती पलाश*

पिया मिलन की आस जगी
दमके फूल पलाश है
प्रीत की हुक उठी हिय में
होली अब तो पास है।

आना अबकी रंग दूंगी
स्नेह भरी गुलाल से
देश रंग में डूबे है पिया
सीमा में खड़े हैं शान से

केशरिया रंग की बात निराली
उस पर सब कुछ वारी मैं
आन के खातिर देश की
पिया की वो संगवारी में

लड़ जाना वीर मेरे तुम
होली में भले ही न आना
रंग बासन्ती चढ़ा है हमको
सिंदूर मेरी तुम न लजाना

वीर नारी बनकर मैं
तनिक नहीं घबराती हूं
ओढ़ केशरी चुनरिया
पिया मैं तेरी हो जाती हूँ

@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा

रंग


एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाएं
भेद दिलों का आज मिटाएं
तार जुड़े दो हृदयों  का
प्रेम रंग में सब रंग जायें।।

विश्वास की अबीर उड़े
स्नेह की हो पिचकारी
दाग न रहे बैर का
होली सबको प्यारी


क्या होली क्या ईद है भैया
सब खुशियां फैलाती है
सबसे गहरा प्रेम रंग है
  ये गीता कुरान सिखाती है।

तोड़ दे दीवार नफरत की
सबको गले लगाना है
एक रंग में रँगकर हमको
हिंदुस्तान सजाना है।।
@अवि
अविनाश तिवारी
**************

     नारी


^^^^^^^^^^^^^^

नारी तू नारायणी ममत्व स्वरूप
तुम्हारा है
सागर सा धैर्य तुझमें जगत की पालनहारा है।

तुम धरनी वसुंधरा हो पालन पोषण करती हो,
कर न्यौछावर सर्वस्व अपना
घर को जीवन देती हो

तुम जननी सखा संगिनी
कितने स्वरूप को पाया है
पुत्री बन कर दो कुलों की
मर्यादा को निभाया  है।

तुम चंडी भद्रकाली
विश्वस्वरूपा प्रतिपालक हो
तुम्ही दुर्गा सरस्वती
महिषासुर संहारक हो।

रानी लक्ष्मी पद्मश्वेता सुनीता मेरीकॉम हो
हर क्षेत्र में असीमित अनन्त
सुनीता कल्पना सी उड़ान हो।

तुम परिभाषित ग्रन्थों में सीता
सावित्री परिणीता हो
तुमसे पौरुष समपूर्णित जग में
तुलसी गंगा गीता हो।

नमन मातृशक्ति तुमको है
जीवन की आधार हो
कृतज्ञ तेरे त्याग से हम है
ममता और दुलार हो।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर

रंगों की चाह


रख दूँ थोड़ा अबीर मां के पावन चरणों में
एक मुट्ठी अबीर ले सहलाउं मां के गालों में
कितनी होली रगड़ के तूने मुझको नहलाया था
दाग हटाकर मां तूने उज्ज्वल मुझे
बनाया  था।

थोड़ा सा अबीर पिता जी जे भाल पर
जो चमके पुत्र के उज्ज्वल भविष्य की चाह पर

एक पिचकारी रंग भरी दीदी के
नाम करता हूँ
मीठी झड़की प्यार की नमन बार बार करता हूँ

चाचा चाची भैया भाभी सब के गालों पर गुलाबी अबीर है
दूर हूँ आज पर मन मेरा अधीर है।

जीवन संगिनी तेरे रंग में रंग के
खुशियां पायीं है
तुमसे है जीवन ये प्यारा
तुम मीठी पुरवाई है।।

साथ मित्रों की तो उड़े गुलाल
होली की हुड़दंग है
अपनी यारी देख के 
सारा जहां  ही  दंग है।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा

परम् सत्य

अव्यक्त होकर व्यक्त है
निर्विकार वो साकार है
वही  जड़ चेतन वही है
जिसने गढ़ा संसार है।

वो परिमित अपरिमित होकर
अनन्त अखण्ड प्रतिभाग है
  आदि वही अनादि है जो
ब्रम्हाण्ड जिसका अंश मात्र है

ज्योति पुंज आलोकित
प्रखरित ऊर्जा प्राणवान है
अजन्मा वो जन्म लेकर भी
आलोक्य दीप्तमान है।

शून्य से सम्पूर्णता लेकर
अजेय अपरिमेय वह मान है
वेद कुरान ग्रन्थ विविध
दर्शन सांख्य वो विज्ञान है।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा

करोना


***************

डरो नहीं बरतो सावधानी
करोना से हमें लड़ना है
बार बार हम हाथ को धोवें
मुंह ढककर हमें छींकना है।

हो बीमार तो बाहर न जाएं
चिकित्सा जांच जरूरी है
  पिएं गिलोय तुलसी मरीच का काढ़ा
गन्दगी से रखना दूरी है।

आओ हम प्राणायाम करें
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है
हाय हलो को छोड़कर
नमस्कार अपनाना है।

छोड़ें आलिंगन करें नमस्ते
सलाम आदाब कर सकते हैं
मिलजुलकर सारे भारतवासी
करोना से लड़ सकते हैं।

@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा

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