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लोगों का कद - कविताएँ - विनोद सिल्ला

1.

आ रहे हैं बादल

सावन है
मन-भावन है
सब कुछ पावन-पावन है
ठंडी हवा संदेश लाई
सामान समेटो अपना-अपना
आ रहे हैं बादल
जमकर बरसेंगे
संतुष्ट करेंगे धरा को
जो बहुत समय से
प्यासी है

-विनोद सिल्ला

2.

कठपुतली

इंसान जन्मा इंसान के रूप में
ज्यों-ज्यों हुआ बड़ा
त्यों-त्यों गया जकड़ा
जाति-धर्म, भाषा-क्षेत्र की
मजबूत जंजीरों में
आजीवन नहीं हो पाया आजाद
रह गया मात्र
कठपुतली बनकर
जिसकी डोर है
व्यवस्था के हाथ

-विनोद सिल्ला

3.

सिमट जाते हैं

जन्म से हम
पैदा होते हैं इंसान
फिर लगा दिया जाता है मार्का
जाति-धर्म का
रह जाते हैं होकर
एक जाति-धर्म के
कर लेते हैं खुद को
बाकी दुनिया से वंचित
सिमट जाते हैं
एक छोटे से दायरे में

-विनोद सिल्ला

4.

मातृ-सत्ता

जो मानते हैं महिला को
श्रृंगार-रस की विषय-वस्तु
उन्हें होती होगी हैरत
यह जानकर कि
मेघालय की एक जनजाति
नकारती है पितृ-सत्ता को
कायम है वहाँ मातृ-सत्ता
आज भी
हालांकि आदिकाल में भी
कायम थीं मातृ-सत्ता

-विनोद सिल्ला

5.

वनवास

चुनाव में हर बार होती है
जनता की अग्नि-परीक्षा
गुजरना पड़ता है जनता को
दंगों की आग से
सुख-साधन, रास-रंग
रहते हैं सीमित
राजभवनों-मठाधीशों
व औद्योगिक घरानों तक
जनता को मिलता है वनवास
अग्नि-परीक्षा के बाद भी

-विनोद सिल्ला

6.

लोगों का कद

मेरे आस-पास के
लोगों का कद हो गया
उनके वास्तविक कद से ऊंचा
विडंबना यह भी है
वो झुकना भी नहीं जानते
मैंने ही करने होंगे
अपने चौखट-दरवाजे
उनके कद के अनुरूप
ताकि रिश्तों को बचाया जा सके
दुर्घटना-ग्रस्त होने से

-विनोद सिल्ला

7.

कारण

थोड़ी-सी तारीफ़ में
लगते हैं पिघलने
थोड़ी-सी आलोचना में
लगते हैं उबलने
जल्द हो जाती हैं भावनाएँ आहत
इसका कारण हुआ प्रतीत
या तो मनुष्य
अतिसंवेदनशील हो गया
या फिर
संवेदनहीन हो गया

-विनोद सिल्ला

8.

शहीद हो गईं

वो सैनिक
हो गया शहीद सीमा पर
अपना कर्तव्य
निभाते-निभाते
सिर्फ वही शहीद नहीं हुआ
उसके साथ ही
हो गई शहीद
सदा के लिए
उसके घर की
खुशियाँ भी

-विनोद सिल्ला

9.

बहार

न बैठ
बहार आने के इंतज़ार में
उठ और लग जा
बहार लाने के प्रयास में
निसंदेह बहार आएगी
तेरे प्रयास से ही आएगी
उस बहार का मजा
आज तक की बहारों से
अनूठा होगा
वह बहार होगी अद्वितीय

-विनोद सिल्ला

10.

ताजा ख़बर

बिल्कुल ताजा ख़बर
जो नहीं आई है
अखबार में भी
न ही बताई
किसी चैनल ने भी
शोसल मीडिया पर भी
नहीं आई
ख़बर यह है कि
नवदौर में
भाई-चारा गुम हो गया

-विनोद सिल्ला


परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. छुअन (काव्यसंग्रह)
6. कितना सुखद तेरा आना (लघुकविता संग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)


सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018

पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

ई-मेल vkshilla@gmail.com

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