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कोरोना :तीन लघु व्यंग्य रचनाएं - हनुमान मुक्त

(1) नौजवान की परेशानी

मेरे शहर में एक नौजवान है। वह बड़ा परेशान है। उसकी परेशानी कोरोना को लेकर नहीं है और ना ही कोरोना को लेकर देश में चल रही उथल-पुथल को लेकर है। उसकी परेशानी यह भी नहीं है कि मास्क विक्रेताओं ने मास्क महंगा कर दिया है बल्कि उसे परेशानी यह है कि मास्क पहनकर वह गुटखा के पीक को कैसे थूकें।

वह परेशान इस बात से भी नहीं कि अल्कोहल से कोरोना वायरस मरता है या नहीं उसे परेशानी इस बात से है कि जब सभी लोग अल्कोहल मिश्रित सैनिटाइज से हाथ धोएंगे तो उसे पीने को अल्कोहल कहां से आएगा। आएगा तो वह बहुत महंगा आएगा।

उसे परेशानी यह भी नहीं है कि यहां कोरोना फैल रहा है। परेशानी इस बात से है कि कोरोनो के संदिग्धों में उसकी प्रेमिका और वह क्यों नहीं आए। यदि ऐसा हो जाता तो वे आराम से 14 दिन अकेले में फोन पर बात कर सकते।

वह परेशान इस बात से भी नहीं कि आस-पास इतना कोरोना वायरस फैल रहा है। परेशान इस बात से है कि इतने सारे ऑफिस बंद कर दिए हैं और कर्मचारियों को मुफ्त में तनख्वाह दी जा रही है।

उसे परेशानी इस बात से नहीं कि उसके घर पर सरकार मुफ्त में अनाज देगी या नहीं। उसे परेशानी इस बात से है इतने सारे लोगों को सरकार मुफ्त में खाना क्यों दे रही है। अनाज क्यों दे रही है।

वह परेशान इस बात से नहीं है कि कोरोना से खांसी क्यों होती है बल्कि परेशानी उसे इस बात से है कि उसे खांसी की रिंगटोन सुनने को मिल रही है।

उसे परेशानी इस बात से नहीं है सारे देश में लॉक डाउन कर दिया गया है। लोगों को घरों में बंद रहने को मजबूर कर दिया है बल्कि उसकी परेशानी यह है कि जब सारे लोग घरों में कैद हो जाएंगे तो मरने वालों से ज्यादा पैदा होने वालों की संख्या बढ़ जाएगी।

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(2) समझदार पत्नी

प्रत्येक पत्नी की तरह मेरी पत्नी भी मुझसे ज्यादा समझदार है। वह समझदार ही नहीं बहुत दूर द्रष्टा और भविष्य वक्ता भी है। कोरोना वायरस आने से पहले ही उसको इसका आभास हो गया था। वह कह रही थी।

मैं तो पहले से ही तुमसे कहती आ रही थी कि इस प्रकार के गाने मत सुना करो।

बाहों में चले आओ ..........

तुम पास आए............

मुसाफिर हूं यारों.............

गुनगुना रहे हैं भंवरे.............

पास आओ ना .............

आइए आपका इंतजार है.......

लग जा गले कि फिर यह हंसी रात….............

पुकारता चला हूं मैं ...........

ना जा मेरे हमदम.............


आदमी जैसा सुनता है। वैसा ही बोलता है और जैसा बोलता है वैसा ही करता है।

अब गाओ ऐसे गाने और चिपको एक दूसरे से।


सरकार पहले ही ऐसे गानों को बैन कर देती तो कोरोना को नहीं आना पड़ता। उसे अब रोक नहीं लगानी पड़ती।

अब ऐसे गाने गाओ_


तेरी दुनिया से होके मजबूर चला…...........

तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम...........

चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे.............

छुप गया कोई रे दूर से पुकार के...............

ना तुम हमें जानो ना हम तुम्हें जाने ..….........

परदेसियों से ना अखियां मिलाना..............


ऐसे गानों को गाने में ही भलाई है। गाने में ही नहीं इनको अमल में लाने में ही भलाई है। जैसा गाने के बोल कह रहे हैं वैसे ही करना आवश्यक है। अब जो लोग पहले वाले गानों को गाकर अमल में लाते रहे हैं। उनके ऊपर ही कोरोनो ने वार किया है और जो अब भी ऐसा करने से बाज नहीं आ रहे है उन्हें कोरोना अपने चंगुल में ले ही लेगा।

परदेसियों से अखियां ना मिलाई होती। उन्हें गले नहीं लगाया होता तो आज जो हो रहा है वह नहीं देखना पड़ता।

उसकी बातों में मुझे सच्चाई नजर आने लगी है। मैंने कहा,"भाग्यवान वास्तव में तुम ही सबसे बड़ी भविष्य दृष्टा हो। दूर द्रष्टा हो। अब मैं हमेशा तुम्हारी बातों को मानूंगा। उन पर अमल करूंगा। त्वमेव माता श्च पिता त्वमेव।

त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।

त्वमेव सर्वं मम देव देव।"

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(3) कोरोना से चिंतित

मेरा भारत देश महान है। कोरोना वायरस से जहां सारी दुनिया की सरकार चिंतित है। वही मेरे देश की सरकार के साथ साथ पंडित, मौलवी और इंश्योरेंस कंपनियां भी बहुत चिंतित है।

सरकार ने कहा आइसोलेशन बहुत जरूरी है। पंडितों ने मंदिरों के भगवानों को आइसोलेटेड कर दिया। मास्क पहना दिए। सैनिटाइज कर दिया बड़ी-बड़ी पूजा-अर्चना सब बंद।

मौलवियों ने मस्जिदों को आइसोलेटेड कर दिया सैनिटाइज कर दिया। साथ साथ नमाज पढ़ना बंद।

कहीं भगवान को कोरोनासुर नहीं जकड़ ले।

उन्हें अपनी चिंता नहीं है भगवान की चिंता है। कुछ मौलवियों ने बहुत सस्ते दामों पर कोरोना भगाने के लिए गंडे -ताबीज बेचना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ पंडितों ने अलग-अलग प्रकार के उपाय, अनुष्ठान।

गंगाजल में रामचरितमानस के बालकांड में से कहीं पन्नों के बीच पड़े हुए बाल को डालकर उसको पूजा स्थल पर रखकर धूप अगरबत्ती लगाकर हनुमान चालीसा की चौपाई "नासे रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।"

का 40 बार पाठ कर परिवार के सदस्यों को अभिमंत्रित गंगाजल का बालामृत लेने का उपाय बताया है।


इंश्योरेंस कंपनी टीवी चैनल पर हर पांच मिनट में इंश्योरेंस पॉलिसी को लेने का आह्वान कर रही है।

जब हमारा साथ है तो फिकर किस बात की।

जिंदगी के साथ भी। जिंदगी के बाद भी।

मोबाइल पर मैसेज आना शुरू हो गया है‌।

जिंदगी का कोई भरोसा नहीं। जाने कब टें बोल जाए।

अपना नहीं तो अपनों का ख्याल अवश्य रखें।

बीमा अवश्य कराएं।


#हनुमान मुक्त

93, कांति नगर, गंगापुर सिटी (सवाई माधोपुर)राजस्थान

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