सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

कैस जौनपुरी का धारावाहिक - आओ कहें दिल की बात - किश्त 6 : मुझे माफ करो!

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आओ कहें...दिल की बात

कैस जौनपुरी

मुझे माफ करो...!

मुरली,

मेरे प्यारे भाई,

मैं माफ़ी चाहता हूँ...अगर मैंने कभी तुम्हारा दिल दुखाया हो तो...मुझे पता है मैंने कई बार तुम्हारा दिल दुखाया है...दीपा की बात को लेकर...बचपन से लेकर आज तक तुमने कई बार मेरी मदद की...लेकिन मुझे इस बात का अहसास तब हुआ जब तुमने मुझे अकेला छोड़ दिया...

अब...मुझे तुम्हारी कमी बहुत खलती है...मुझे सच में तुम्हारी कमी खलती है जब भी मुझे अपने कारोबार में तुम्हारे सहारे की जरुरत पड़ती है...मेहरबानी करके फिर से मेरे साथ आ जाओ...मैं अपने सभी दोस्तों से कहता हूँ कि तुम सिर्फ मेरे भाई नहीं मेरे दोस्त जैसे हो...!

अब...मेहरबानी करके मेरी जिन्दगी में वापस आ जाओ. मैं वादा करता हूँ हमारा रिश्ता राम और लक्ष्मण की तरह हमेशा बना रहेगा.

मुझे पता है मैं अब भी तुम्हारे दिल में हूँ...हमारा रिश्ता इतना कमजोर नहीं था जो इस तरह इतनी आसानी से टूट जाए. तुम सिर्फ मेरे भाई नहीं हो...तुम मेरे दोस्त भी हो.

मैं अपने रिश्ते को फिर से शुरू करना चाहता हूँ...जैसा पहले था...तुम्हारे साथ...तुम्हारी माँ के साथ...तुम्हारे पिताजी के साथ...हम सब तुम्हारे जल्दी से वापस आने का इन्तजार कर रहे हैं.

मेहरबानी करके मेरा फोन उठाओ...मैं तुमसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ...मेहरबानी करके मुझे माफ करो...!

दीपा ने जो भी किया, इसमें उसकी खुशी थी. वो तुम्हारी बहन थी. क्या हुआ जो उसने अपनी मरजी से शादी कर ली...? क्या हुआ जो उसने गैरबिरादरी में शादी कर ली...? वो है तो तुम्हारी बहन ही ना...? अपनी बहन की खुशी के लिए उसे माफ भी नहीं कर सकते...?

मैंने तो बस दीपा की खुशी में अपनी रजामन्दी दिखाई थी...तुमने मुझसे ही रिश्ता तोड़ लिया...? मेरे भाई...! इस दुनिया में दीपा ऐसी पहली लड़की नहीं है जिसने ऐसा किया...बहुत से लोग करते हैं ऐसा...लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि हम सबसे रिश्ता तोड़ लें...! तुम दूसरों की बात छोड़ो...दीपा तो तुम्हारी अपनी बहन थी...मैंने तो तुम्हारी बहन की खुशी को स्वीकार किया...और तुमने मुझे ही अस्वीकार कर दिया...?

मेरे भाई...! आज जो भी है...दीपा खुश है...क्या मिला तुम्हें नाराज होके...? दीपा ने तो कर लिया उसने जो करना था...और उसने भी जो किया इसीलिए किया क्यूँकि उसे भरोसा नहीं था अपने ही घर वालों पे...उसे डर था कि तुमलोग उसकी बात नहीं समझोगे. ऐसा कब तक चलता रहेगा...? कब तक हम अपनों की ही बात नहीं समझेंगे...? और कब तक हमारे अपने ही हमसे छुप-छुप के शादियाँ करते रहेंगे...?

हम कुछ ऐसा क्यूँ नहीं करते जिससे फिर किसी दीपा को इस तरह छुप के शादी न करनी पड़े...? फिर किसी प्रदीप से उसका भाई मुरली अलग न हो...?

मुरली...! मैं बस इतना कहना चाहता हूँ, माफ कर दो दीपा को...माफ कर दो मुझे...!

तुम्हारा छोटा भाई

प्रदीप

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कैस जौनपुरी

qaisjaunpuri@gmail.com

www.qaisjaunpuri.com

1 blogger-facebook:

  1. shweta dubey12:15 pm

    mr. jon puri aap ki baato ko pad kar lagata hai ki emotionally apne bhai se lagaw rakhate hai... par aapne kuchh bhi galat nahi kiya hai apni bahan ka saath dekar or jis din ye baat apke bhai ko samajh me aaegi vo aapke paas jaroor laut aaege... all the very best.

    उत्तर देंहटाएं

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