गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास - उस मौत का रोजनामचा (अंतिम किश्त)

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गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ के उपन्यास Chronicle of a death foretold  का अनुवाद अनुवादक – सूरज प्रकाश mail@surajprakash.com   पिछली...

गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़

के उपन्यास

Chronicle of a death foretold 

का अनुवाद

अनुवादक – सूरज प्रकाश

mail@surajprakash.com

 

पिछली किश्तें - 

 

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वे सात बजे उठती थीं, कॉफी पीती थीं और नीचे आकर दोपहर के खाने के लिए हिदायतें देती थीं। क्रिस्‍तो बेदोया ने घड़ी देखी : अभी छः बजकर छप्पन मिनट हुए थे। तब वह दूसरी मंज़िल पर यह देखने के लिए गया कि क्या सैंतिएगो नासार सचमुच नहीं लौटा था।

बैडरूम अंदर की तरफ से बंद था, क्योंकि सैंतिएगो नासार अपनी मां के बेडरूम में से होकर चला गया था। क्रिस्‍तो बेदोया इस घर को अपने घर की तरह जानता था। इतना ही नहीं, वह यहां के परिवार के एक सदस्य की तरह था। उसने प्लेसिडा लिनेरो के बेडरूम का दरवाजा खोला और उसमें से होकर साथ वाले कमरे में चला गया। धुंधली रौशनी की एक लकीर आसमान से भीतर आ रही थी। वे खूबसूरत थीं, वे अपने हिण्डोले में करवट लेकर सोयी हुई थीं। दृश्य काल्पनिक लगता था। “सब कुछ दिव्य दर्शन की तरह लग रहा था।” क्रिस्‍तो बेदोया ने मुझे बताया था। उनके सौन्दर्य से अभिभूत होकर वह एक पल तक उनकी तरफ देखता रहा, फिर चुपचाप कमरे से गुज़रते हुए, वहां से बाथरूम और फिर वहां से सैंतिएगो नासार के बेडरूम में चला गया। बिस्तर अभी भी लगा हुआ था। कुर्सी पर, अच्छी तरह इस्‍त्री किये गये कपड़े, जो उसने घुड़सवारी के लिए पहनने थे, रखे थे। इन कपड़ों के ऊपर घुड़सवारी वाला हैट और फर्श पर जूते और मोजे रखे थे। पलंग के पास तिपाई पर रखी सैंतिएगो नासार की घड़ी छः बजकर अट्ठावन मिनट बता रही थी,“अचानक मुझे लगा, वह वापिस लौट कर आयेगा ताकि हथियार बंद होकर जा सकें।” क्रिस्‍तो बेदोया ने मुझे बताया था। लेकिन उसने पाया कि मेग्नम रिवाल्वर तिपाई की दराज में रखा हुआ है। “मैंने कभी पिस्तौल नहीं चलायी थी।” क्रिस्‍तो बेदोया ने मुझे बताया था,“लेकिन मैंने तय किया कि रिवाल्वर लेकर जाऊंगा और सैंतिएगो नासार को दे दूंगा। उसने रिवाल्वर को अपनी कमीज़ के नीचे बेल्ट में खोंस लिया। अपराध हो जाने के बाद ही उसे यह पता चला था कि उसमें कारतूस ही नहीं थे। जैसे ही वह दरवाजा बंद कर रहा था, तभी प्लेसिडा लिनेरो दरवाजे पर प्रकट हुईं। उनके हाथ में कॉफी का मग था।

“हे भगवान,” उन्होंने चकित होकर कहा,“तुमने तो मुझे चौंका ही दिया था।”

क्रिस्‍तो बेदोया भी चौंक गया था। उसने उन्हें पूरी रौशनी में देखा। वे ड्रैसिंग गाउन में थीं, जिस पर सुनहरी फूल बने हुए थे। उनके खुले बालों में सुबह वाला आकर्षण अब नज़र नहीं आ रहा था। थोड़ी बहुत हिचक के साथ उसने स्पष्ट किया कि वह सैंतिएगो नासार की तलाश में है।

“वह बिशप की अगवानी के लिए गया हुआ है।” प्लेसिडा लिनेरो ने बताया।

“वह यूं ही चला गया था।” उसने कहा।

“मेरा तो यही ख्याल है,” उन्होंने बताया था,“वह एक बहुत ही खराब किस्म की मां का बेटा है।”

वे बाहर नहीं गयीं, क्योंकि उस पल उन्हें लगा कि क्रिस्‍तो बेदोया को समझ में नहीं आ रहा कि अपनी इस काया के साथ क्या करें। “मुझे आशा है कि ईश्वर ने मुझे क्षमा कर दिया होगा।” प्लेसिडा लिनेरो ने मुझे बताया था,“लेकिन वह मुझे इतना भ्रमित लगा कि अचानक मुझे महसूस हुआ, जैसे वह डाका डालने आया हो।” उन्होंने उससे पूछा कि आखिर गड़बड़ क्या है। क्रिस्‍तो बेदोया को पता था कि वह संदेहास्पद स्थिति में फंस गया है, लेकिन उसमें इतना साहस नहीं था कि सच्चाई बयान कर सके।

“दरअसल बात सिर्फ इतनी सी है कि मैं एक मिनट के लिए भी सो नहीं सका हूँ।” बेदोया ने उन्हें बताया था।

वह और कुछ भी स्पष्टीकरण दिये बगैर चला आया था। “जहाँ तक मेरा सवाल था,” उसने मुझे बताया था, “वे हमेशा यही कल्पना करती रहीं कि उन पर डाका डाला जा रहा था।”

चौराहे पर वह भागता हुआ सीधे फादर एमाडोर के पास पहुंचा। वे कुंठित जन समुदाय के लिए, पूजा परिधान पहने गिरजा घर की तरफ वापिस जा रहे थे। लेकिन वे यह नहीं सोचते थे कि वे सैंतिएगो नासार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के अलावा कुछ और कर सकते थे। जब क्रिस्‍तो बेदोया ने उन्हें क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता के स्‍टोर से फिर से आवाज देते सुना तो वह दोबारा घाट की तरफ भागा। पैड्रो विकारियो दरवाजे में खड़ा था। पीला और निस्तेज। उसकी कमीज खुली हुई थी और उसने अपनी आस्तीन की बाहें ऊपर चढ़ा रखी थीं। नंगा चाकू उसके हाथ में था। जो व्यवहार वह कर रहा था, वह इतना अक्खड़पने का था कि उसे स्वाभाविक नहीं कहा जा सकता था लेकिन उसका यह सनक भरा व्यवहार काफी समय से चला आ रहा था, इसलिए किसी ने भी उसे गुनाह करने से रोकने की ज़रूरत नहीं समझी।

“क्रिस्तोबल,” वह चिल्लाया था, “सैंतिएगो नासार को जा कर बता दो कि हम उसका कत्ल करने के लिए उसकी राह देख रहे हैं।”

क्रिस्तोफर बेदोया उसे रोकने का महत्वपूर्ण काम कर सकता था,“काश, मुझे रिवाल्वर चलाना आता तो आज सैंतिएगो नासार जीवित होता।” उसने मुझसे कहा था। यह विचार भी उसे तब आया जब उसे गोली की विध्वंसक ताकत के बारे में बताया जा रहा था।

“मैं तुम्हें चेतावनी देता हूँ। वह मैग्नम रिवाल्वर से लैस है। उसकी गोली इंजिन के भी आर-पार जा सकती है।” वह चिल्लाया था।

पैड्रो विकारियो जानता था कि यह सच नहीं है, “वह घुड़सवारी के कपड़े पहने बिना कभी भी हथियार से लैस नहीं होता था।” पैड्रो विकारियो ने मुझे बताया था। खैर, कुछ भी हो, उसने इस बात का पूर्वानुमान लगा लिया था कि हो सकता है, कि उसे अपनी बहन का सम्मान बचाने के लिए तत्पर देख कर सैंतिएगो नासार ने हथियार उठा ही लिया हो।

“मरे हुए आदमी गोली नहीं चला सकते।” वह चिल्लाया था।

तब पाब्लो विकारियो दरवाजे में प्रकट हुआ था। वह भी अपने भाई की तरह पीला पड़ा हुआ था। उसने शादी ब्याह में पहनी जैकेट पहन रखी थी और अपना चाकू उसने अखबार में लपेट रखा था। अगर उसके हाथ में चाकू न होता तो मैं पता भी नहीं लगा पाता कि कौन सा पैड्रो है और कौन सा पाब्लो। क्रिस्‍तो बेदोया ने मुझे बताया था। तभी क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता पाब्लो विकारियो के पीछे प्रकट हुई थी और वहीं से क्रिस्‍तो बेदोया के लिए चिल्लायी थी कि वह जल्दी करे, क्योंकि काठ के उल्लुओं के शहर में सिर्फ वही एक ऐसा आदमी था जो इस हादसे को रोक सकता था।

उसके बाद जो कुछ भी हुआ, वह जनता जनार्दन के स्मृति में है। जो लोग घाट से वापिस आ रहे थे, हल्ला गुल्ला सुनकर चौराहे पर इस तरह से पोजीशन लगाकर खड़े होने लगे ताकि हादसे को होता देख सकें। अपनी जान-पहचान से कई लोगों से क्रिस्‍तो बेदोया ने पूछा कि क्या उन्होंने सैंतिएगो नासार को देखा है, लेकिन उसे किसी ने भी नहीं देखा था। वह भाग कर सोशल क्‍लब के दरवाजे पर कर्नल लाजारो अपोंते के पास गया और उसे वह सारा किस्सा कह सुनाया जो अभी क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता के स्‍टोर के सामने हुआ था।

“ऐसा हो ही नहीं सकता,” कर्नल अपोंते ने कहा था, “क्योंकि मैंने उनसे कह दिया था कि घर जा कर सो जायें।”

“मैंने उन्हें अभी-अभी सूअर मारने वाले चाकुओं से लैस देखा है।” क्रिस्‍तो बेदोया ने कहा था।

“यह भी नहीं हो सकता, क्योंकि उन्हें घर जाकर सोने के लिए कहने से पहले मैंने उनसे चाकू ले लिए थे,” मेयर ने कहा था, “ज़रूर तुमने उन्हें उससे पहले देखा था।”

“मैंने उन्हें सिर्फ दो मिनट पहले ही देखा है और उनके हाथों में सूअर मारने वाले चाकू हैं।” क्रिस्‍तो बेदोया ने स्पष्ट किया था।

“धत तेरे की, तो इसका मतलब वे फिर से नये चाकू ले कर आ गये होंगे।” मेयर ने कहा था।

उसने वादा किया कि वह अभी उनकी खबर लेता है। लेकिन वह कुछ करने के बजाये सोशल क्‍लब के भीतर चला गया ताकि उस रात डोमिनो लॉटरी खुलने की तारीख जान सके और जब वह वापिस बाहर आया तब तक हादसा हो चुका था।

क्रिस्‍तो बेदोया ने तब अपनी इकलौती प्राण घातक गलती की थी। उसने सोचा कि शायद सैंतिएगो नासार ने बिना कपड़े बदले ही हमारे घर पर नाश्ता करने का फैसला कर लिया हो, इस चक्कर में वह उसे खोजने के लिए हमारे घर चला गया। वह नदी के किनारे-किनारे लपकता हुआ चला जा रहा था। रास्ते में वह हर किसी से पूछता जा रहा था कि कहीं किसी ने उसे आते-जाते तो नहीं देखा। लेकिन उसे किसी ने भी नहीं देखा था। वह भयभीत भी नहीं था क्योंकि हमारे घर तक पहुंचने के और भी रास्ते थे। प्रॉसपेरा अरांगो नाम की देहातिन ने उसके आगे हाथ-पैर जोड़े कि वह उसके बाप के लिए कुछ करे जो दरवाजे की ड्योढ़ी पर अपनी आखिरी सांसें गिनता हुआ पड़ा हुआ था। बिशप की चलताऊ आसीसों का उस पर कोई असर नहीं हुआ था। “जब मैं वहां से गुज़री थी तो मैंने उसे देखा था,” मेरी बहन मार्गोट ने बताया था,“उसका चेहरा तो पहले ही मरे हुए आदमी के चेहरे जैसा हो रहा था।” उस बुढ़ऊ मरीज की सेहत का अंदाज़ा लगाने के चक्कर में क्रिस्‍तो बेदोया के चार मिनट बरबाद हुए। उसने वादा किया कि वह जल्दी ही लौट कर उसके इलाज का बन्दोबस्त कर देगा। लेकिन उसके तीन मिनट और बरबाद हो गये जब उसे प्रॉसपेरा अरांगो के साथ मिल कर बुढ़ऊ को भीतर बेडरूम तक ले जाना पड़ा। जब वह दोबारा बाहर आया तो उसने चौराहे की तरफ रॉकेट दागे जाने का शोर-शराबा सुना। उसने भागने की कोशिश की लेकिन बेल्ट में खुंसा रिवाल्वर भागने में आड़े आ रहा था। जैसे ही वह आखिरी मोड़ पर मुड़ा, उसने पीछे से मेरी माँ को पहचाना, वह सचमुच अपने साथ अपने सबसे छोटे लड़के को घसीटते हुए लपकती चली जा रही थी।

“लुइजा सैंतिआगा,” वह उसे देखकर चिल्लाया था, “तुम्‍हारा दत्तक पुत्र सैंतिएगो नासार कहां है?”

मेरी मां ने पीछे मुड़कर देखा। उसका चेहरा आँसुओं से तरबतर था।

“ओह, मेरे बच्चे, मां ने जवाब दिया,“लोग कह रहे हैं, उसे मार डाला गया है।”

दरअसल हुआ कुछ इस तरह था, क्रिस्‍तो बेदोया जिस वक्त उसे तलाशता फिर रहा था, सैंतिएगो नासार अपनी मंगेतर फ्लोरा मिगुएल के घर चला गया था। उसका घर वहां से बिल्कुल पास ही था, जहां क्रिस्‍तो बेदोया ने आखिरी बार सैंतिएगो नासार को देखा था। “मुझे यह सूझा ही नहीं कि वह वहां भी हो सकता है,” उसने मुझे बताया था, “इसकी वजह यह थी कि वे कभी भी दोपहर से पहले जागते ही नहीं थे।” सब लोग यही समझते थे कि समुदाय के सयाने आदमी नाहिर मिगुएल के आदेशों को मानते हुए सारा परिवार बारह बजे तक सोता रहता था। “यही वजह थी कि फ्लोरा मिगुएल, जो अब उतनी किशोरी नहीं रही थी, गुलाब की तरह पाली पोसी जाती थी।” मर्सीडीज का यह कहना था। लेकिन सच तो यह था कि कई दूसरे लोगों की तरह वे भी अपने दरवाजे का ताला देर तक बंद करके रखते, हालांकि वे लोग जल्दी जागने वाले और मेहनत करने वाले लोग थे, सैंतिएगो नासार के और फ्लोरा मिगुएल के माता-पिता इस बात पर सहमत थे कि दोनों की शादी कर दी जाये। सैंतिएगो नासार ने अपनी किशोरावस्‍था के चरम समय में इस सगाई को स्वीकार कर लिया था और वह इसे पूरा भी करना चाहता था। इसकी वजह शायद यह रही थी कि वह भी अपने पिता की तरह विवाह का उपयोगिता वादी सिद्धांत लेकर चलता था। जहां तक फ्लोरा मिगुएल का सवाल था, वह कुछ खास हल्की फुल्की स्थितियों का आनन्द उठाती थी, लेकिन उसमें विनोद का और फैसले कर पाने की शक्ति का अभाव था। वह अपनी सभी सखियों के लिए दुल्‍हन की सखी बनती आयी थी। इसलिए उसके लिए उनकी सगाई बहुत आसान सी थी। उसमें न तो औपचारिक रूप से आना-जाना था और न ही बेचैन फड़कते दिल। शादी की रस्म कई बार टलते-टलते आखिर अगले क्रिसमस के दिन होनी तय हुई थी।

उस सोमवार को फ्लोरा बिशप की नाव के पहले भोंपू की आवाज़ सुनते ही उठ गयी थी और उसके थोड़ी ही देर बाद उसे पता चला था कि विकारियो बंधु सैंतिएगो नासार का कत्ल करने के इरादे से उसका इंतज़ार कर रहे हैं। उसने यह बात मेरी नन बहन को बतायी थी। उस हादसे के बाद उसने सिर्फ मेरी ही बहन से बात की थी और उसे यह भी याद नहीं रहा था कि उसे यह बात बतायी ही किसने थी। “मुझे सिर्फ खबर मिल चुकी थी।” उसने मेरी बहन को बताया था। इतना होते हुए भी, यह बात उसके गले से नीचे नहीं उतर रही थी कि वे सैंतिएगो नासार को मारने जा रहे थे। उसे यह लग रहा था कि एंजेला विकारियो को उसका खोया सम्मान लौटाने के लिए वे सैंतिएगो नासार को एंजेला विकारियो से शादी करने के लिए मज़बूर करेंगे। वह अपमान के घोर संकट से गुज़र रही थी। उस वक्त, जब आधा शहर बिशप का इंतज़ार कर रहा था, वह अपने बेडरूम में गुस्से से रोये जा रही थी। वह रोते-रोते उन खतों को मंजूषा में तरतीब से लगा रही थी जो सैंतिएगो नासार ने उसे स्कूल से भेजे थे।

जब भी वह फ्लोरा मिगुएल के घर के आगे से गुज़रता, चाहे कोई भी घर पर न हो, वह खिड़की के शीशे पर अपनी चाबियों से खटखट करता। उस सोमवार वह खतों की मंजूषा गोद में रखे उसका इंतज़ार कर रही थी। सैंतिएगो नासार खिड़की के बाहर से उसे नहीं देख पाया, लेकिन उसने सैंतिएगो नासार को खिड़की तक पहुंच कर चाबी से खटखटाने से पहले ही आते हुए देख लिया था।

“भीतर आ जाओ।” वह बोली थी।

कभी भी कोई भी, यहां तक कि डॉक्टर भी उस घर में इतनी सुबह, छः बज कर पैंतालीस मिनट पर नहीं आया था। सैंतिएगो नासार अभी-अभी क्रिस्‍तो बेदोया को यामिल शाइयुम के स्‍टोर पर छोड़कर आया था और उस वक्त चौराहे पर कई कई लोग उसकी हर गतिविधि पर जैसे निगाह रखे हुए थे, यह मानने को यकीन नहीं करता था कि उसे किसी ने अपनी मंगेतर के घर के भीतर जाते हुए नहीं देखा होगा। जांचकर्ता मजिस्ट्रेट किसी एक ऐसे आदमी की तलाश में था जिसने उसे वहां जाते हुए देखा हो, और यह काम उसने इतनी मेहनत और दृढ़ता से किया था, लेकिन कोई भी ऐसा आदमी खोज पाना असम्भव था। सारांश के 382वें पन्ने पर उसने लाल स्याही से एक और उद्घोषणा हाशिये पर दर्ज की थी। मौत की छाया हमें अदृश्य कर देती है।

सच्चाई तो यह थी कि सैंतिएगो नासार, सबकी निगाहों के सामने से, मुख्य दरवाजे से भीतर गया था। उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया था कि वह दिखायी न देता। फ्लोरा मिगुएल पार्लर में उसका इंतज़ार कर रही थी। उस समय वह गुस्से से लाल-पीली हो रही थी। उसने उस वक्त उन अभागी सलवटों वाली पोशाक पहन रखी थी जो वह आमतौर पर अविस्मरणीय अवसरों पर पहन लिया करती थी, पत्रों की पेटी उसने सैंतिएगो नासार के हाथों में थमा दी।

“तो आप यहां है जनाब,” वह बोली थी, “हम तो समझ रहे थे, उन्होंने आपको मार डाला है।”

सैंतिएगो नासार इतना सकपकाया कि पेटी उसके हाथ से छूट गयी और सारे पत्र फर्श पर बिखर गये। इन पत्रों में कोई प्यार नहीं बचा था। उसने फ्लोरा मिगुएल को बैडरूम में पकड़ने की कोशिश की। लेकिन उसने दरवाजा बंद कर दिया और कुण्‍डी चढ़ा दी। उसने कई बार दरवाजा खटखटाया, दिन के वक्त का ख्याल रखते हुए दबी हुई जुबान में कई बार पुकारा, कि पूरा परिवार भीतर आ गया। सब चौकन्ने थे। अगर खून के और शादियों के रिश्तों से गिना जाये तो बड़े और बच्चे, कुल मिलाकर चौदह लोग थे। सबसे आखिर में पिता, नाहिर मिगुएल आये। उनकी लाल दाढ़ी थी और वे बद्दू कफ्तान पहने हुए थे। यह कफ्तान वे अपने मुल्क से लाये थे और घर पर हमेशा पहने रहते थे। मैंने उन्हें कई बार देखा था।

वे ऊंचे और दुबले थे, लेकिन जो बात उनमें मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करती थी, वह थी, उनके चेहरे पर अधिकार की चमक।

“फ्लोरा,” उन्होंने अपनी भाषा में पुकारा था, “दरवाजा खोलो।”

वे अपनी बेटी के बेडरूम में चले गये जबकि बाकी परिवार सैंतिएगो नासार को घूरता रहा। वह पार्लर में घुटनों के बल झुका पत्र इकट्ठे करके पेटी में रखता जा रहा था। “लग रहा था जैसे वह प्रायश्चित कर रहा हो।” उन्होंने मुझे बताया था। कुछेक पलों बाद नाहिर मिगुएल बेडरूम से बाहर आये, अपने हाथ से एक इशारा किया और सारा परिवार वहां से चला गया।

वह सैंतिएगो नासार से अरबी भाषा में बात करते रहे। “पहले ही क्षण से मैं समझ गया था कि मैं जो कुछ भी कह रहा था। उसका सिर-पैर उसके पल्ले नहीं पड़ रहा था।” उन्होंने मुझे बताया था।

तब उन्होंने सीधे-सीधे ही उससे पूछ लिया कि क्या उसे पता है कि विकारियो बंधु उसे मार डालने के लिए ढूंढते फिर रहे हैं। “वह पीला पड़ गया था और उसने कुछ इस तरह से अपना आपा खो दिया था कि विश्वास करना मुश्किल था कि वो ढोंग कर रहा होगा।” वे मुझे बता रहे थे। उन्होंने माना कि उसके तौर तरीके में डर कम और भ्रम ज्यादा था।

“सिर्फ तुम ही बता सकते हो कि वे सही हैं या गलत,” उन्होंने उससे कहा था,“भले जो भी हो अब तुम्हारे सामने दो ही रास्ते बचते हैं। या तो तुम यहीं छुपे रहो, इस घर में जो कि तुम्हारा अपना ही है, या फिर तुम मेरी राइफल लेकर बाहर निकलो।”

“आप क्या कह रहे हैं, कुछ भी मेरे पल्ले नहीं पड़ रहा है।” सैंतिएगो नासार ने कहा था।

वह सिर्फ इतना ही कह पाया था और यह बात उसने इस्पानी में कही थी। “उस वक्त वह नन्हे भीगे परिन्दे की मानिंद लग रहा था।” नाहिर मिगुएल ने मुझे बताया था। उन्हें पत्रों की पेटी उसके हाथ से ले लेनी पड़ी थी क्योंकि उसे समझ में नहीं आ रहा था, दरवाजा खोलने के लिए पेटी को कहां रखे।

“मुकाबला दो और एक के बीच होगा।” उन्होंने उसे बताया था।

सैंतिएगो नासार चला गया था। लोगों ने खुद को चौराहे पर कुछ इस तरह जमा लिया था, जिस तरह वे परेड के दिनों में किया करते थे। उन सबने उसे बाहर आते देखा था। वे सब समझ गये थे कि अब उसे पता चल चुका है कि वे उसे मारने जा रहे हैं और वह इतना ज्यादा चकराया हुआ था कि अपने घर का रास्ता भी नहीं खोज पाया। उनका कहना है कि कोई किसी छज्जे से चिल्लाया था, “उस रास्ते से नहीं, तुर्क : पुराने घाट के रास्ते से।” सैंतिएगो नासार ने आवाज पहचान ली थी। यामिल शाइयुम उसके लिए चिल्लाया था कि मेरे स्‍टोर में घुस जाओ। फिर वह अपनी शिकारी वाली बंदूक लाने के लिए लपका। दुर्भाग्य से वह याद ही नहीं कर पाया कि उसने कारतूस कहां रख छोड़े हैं। चारों तरफ से सैंतिएगो नासार के लिए आवाज़ें आने लगीं। वह कई बार आगे होता रहा, पीछे लौटता रहा और ?? एक ही समय में इतनी अधिक आवाजों से हैरान-परेशान होता रहा। तय था कि वह रसोई घर के रास्ते से अपने घर की तरफ जाना चाहता था, लेकिन अचानक ही उसे लगा होगा कि सामने की तरफ का दरवाजा खुला है।

“वो आ रहा है।” पैड्रो विकारियो बोला था। दोनों भाइयों ने उसे एक साथ देखा था। पाब्लो विकारियो ने अपनी जैकेट उतारी, उसे बैंच पर रखा और कागज में से चाकू निकाल कर उसे शमशीर की तरह थाम लिया। स्‍टोर से बाहर आने से पहले, बिना किसी सहमति के, दोनों एक दूसरे के आगे से गुज़रे। तब क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता नासार के लिए चिल्लायी कि वह भाग ले। ये दोनों उसे मारने के लिए पीछे पड़े हुए हैं। यह इतने ज़ोर से चिल्लायी थी कि बाकियों की शोर शराबे की आवाज उसकी चिल्लाहट में डूब गयी थी, “पहले तो वह सकपका गया था, “क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता ने मुझे बताया था,“क्योंकि उसे पता ही नहीं था कि कौन उसके लिए चिल्ला रहा है और कहां से चिल्ला रहा है, “लेकिन जब उसने क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता को देख लिया तो उसे पैड्रो विकारियो भी नज़र आया। पैड्रो विकारियो ने क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता को जमीन पर पटक दिया था और अपने भाई के साथ आगे बढ़ आया था, उस वक्त सैंतिएगो नासार अपने घर से पचास गज से भी कम दूरी पर था। वह सीधे मुख्य द्वार की तरफ भागा।

रसोई घर में, पांच मिनट पहले विक्‍टोरिया गुज़मां ने प्लेसिडा लिनेरो को वह सब कुछ बताया जो सबको पहले से ही मालूम था। प्लेसिडा लिनेरो मज़बूत दिल वाली औरत थी, इसलिए उसने चेहरे पर हड़बड़ाहट की शिकन तक नहीं आने दी। उसने विक्‍टोरिया गुज़मां से पूछा कि क्या उसने इस बाबत उसके बेटे से कुछ कहा था, तो विक्‍टोरिया गुज़मां साफ़ मुकर गयी। उसने यही कहा कि जब सैंतिएगो नासार कॉफी पीने के लिये आया था तो उस वक्त खुद भी कुछ भी नहीं जानती थी। ड्राइंग रूम में, ठीक उसी वक्त, जब दिविना फ्लोर पोंछा लगा रही थी, चौराहे वाले दरवाजे की तरफ से सैंतिएगो नासार भीतर आया और सीढ़ियों से चढ़कर बेडरूम की तरफ निकल गया, “दृश्य बिल्कुल साफ़ था।” दिविना फ्लोर ने मुझे बताया था, “वह सफेद सूट पहने हुए था और हाथ में कुछ लिये हुए था। मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकती, लेकिन वह गुलाब के फूलों का गुलदस्ता लग रहा था।” इसलिए जब प्लेसिडा लिनेरो ने उससे अपने बेटे के बारे में पूछा तो दिविना फ्लोर ने उन्हें दिलासा दी, “वह एक मिनट पहले ही ऊपर अपने कमरे में गया है।”

तभी प्लेसिडा लिनेरो ने जमीन पर पड़ा काग़ज़ देखा था, लेकिन उन्होंने उसे उठाने के बारे में नहीं सोचा। यह तो वे तभी जान पायी थी कि उस पर क्‍या लिखा है, जब बाद में हादसे की गड़बड़ी में किसी ने उन्हें यह काग़ज़ लाकर दिखाया था। दरवाजे से उन्होंने देखा था कि विकारियो बंधु हाथों में नंगे चाकू लिये उनके घर की तरफ दौड़े चले आ रहे हैं। “जिस जगह पर वे खड़ी थीं, वहां से वे विकारियो बंधुओं को तो देख पायी लेकिन अपने बेटे को नहीं देख पायी जो एक दूसरे ही कोण से दरवाजे की तरफ दौड़ रहा था। “मुझे लगा, वे उसे घर के भीतर मारना चाहते हैं।” उन्होंने मुझे बताया था। तब वे दरवाजे की तरफ लपकीं और दरवाजा भड़ाक से बंद कर दिया। वे दरवाजे की कुण्‍डी चढ़ाने ही वाली थीं कि उन्होंने सैंतिएगो नासार की चीखें सुनीं। उन्हें यही लगा कि वह ऊपर कमरे में है और अपने कमरे की बाल्‍कनी से विकारियो बंधुओं को गालियां बक रहा है। वे मदद करने की नीयत से ऊपर गयीं।

दरवाजा बन्द होने से पहले घर में घुसने से सैंतिएगो नासार कुछ ही सेकेण्डों से चूक गया था। उसने मुट्ठियों, घूंसों से कई बार दरवाजा पीटा और फिर अचानक ही अपने दुश्मनों के आमने सामने हो गया। उसके हाथों में कुछ भी नहीं था। “उसे इस तरह आमने सामने देख कर मैं डर गया था, पाब्लो विकारियो ने मुझे बताया था, “क्योंकि वह जितना था, उससे दुगुना दिखायी देने लगा था।” सैंतिएगो नासार ने अपना हाथ उठाकर पैड्रो विकारियो का पहला वार रोकने की कोशिश की। उसने अपना चाकू सीधे ही सैंतिएगो नासार की दायीं बगल में घुसेड़ दिया था।

““कुतिया के पिल्लो”“ वह चीखा था। चाकू उसके दायें हाथ की हथेली को चीरता हुआ मूठ तक उसकी पसलियों में घुसता चला गया था। सभी ने उसे दर्द से चीखते, छटपटाते सुना था। “ओह, मेरी मां,” पैड्रो विकारियो ने अपना कसाईपना दिखाते हुए मज़बूत पकड़ के साथ चाकू वापिस खींचा था और लगभग उसी जगह पर दूसरा वार किया था। “हैरानी की बात तो यह थी कि चाकू बिल्कुल साफ़ ही बाहर निकल रहा था, पैड्रो विकारियो ने जांचकर्ता के सामने स्पष्ट किया था, “मैंने कम से कम तीन वार किये थे, लेकिन हर बार चाकू पर एक बूंद खून भी नहीं होता था।” तीसरे घाव के बाद सैंतिएगो नासार घूम गया था। उसके हाथ पेट पर दोहरे हो गये थे। उसके मुंह से बछड़े की सी कराह निकली थी और उसने उन दोनों की तरफ पीठ मोड़ने की कोशिश की थी। पाब्लो विकारियो, जो उसकी बायीं तरफ खड़ा था, ने उसकी पीठ में इकलौता वार किया। बड़ी तेजी से खून का फव्वारा छूटा था और उसकी कमीज खून से सन गयी थी। “खून से उस जैसी ही गंध आ रही थी।” उसने मुझे बताया था। तीन प्राण घातक घाव झेल लेने के बाद सैंतिएगो नासार फिर सामने की तरफ मुड़ा और अपनी मां के दरवाजे की टेक लगाकर खड़ा हो गया। उसने रत्ती भर भी विरोध नहीं किया, मानो उनकी मदद करना चाह रहा हो कि दोनों बराबर-बराबर वार करके उसे खत्म कर डालें। “वह दोबारा नहीं चिल्लाया था।” पैड्रो विकारियो ने जांचकर्ता को बताया था, “इसके विपरीत वह मेरी तरफ यूं देख रहा था, जैसे मुझ पर हंस रहा हो।” इसके बाद वे उसे बारी-बारी से और आसानी से चाकू घोंपते रहे और वह दरवाजे पर पीठ लगाये खड़ा रहा। उन्हें डर नहीं लग रहा था, जैसे वे ठहरे पानी को चप्पू से पीट रहे हों। उन्हें पूरे शहर की चीखें, चिल्लाहटें सुनायी नहीं दे रही थीं। शहर, जो अपने खुद के अपराध से डरा हुआ था। ““मैं ठीक वैसे ही महसूस कर रहा था, जैसे आप घोड़े की पीठ पर बैठे हिचकोले खाते हैं। पाब्लो विकारियो ने स्पष्ट किया था। अचानक ही उन्हें वास्तविकता का आभास हुआ था, क्योंकि वे बुरी तरह थक गये थे, फिर भी उन्हें लग रहा था कि सैंतिएगो नासार कभी भी नहीं गिरेगा। “थू है, मेरे भाई,” पाब्लो विकारियो ने मुझसे कहा था,“तुम कल्पना नहीं कर सकते, किसी आदमी को मारना कितना मुश्किल होता है।” उसे एक ही बार और हमेशा के लिए खत्म करने के इरादे से पैड्रो विकारियो ने सैंतिएगो नासार का दिल चीरने की कोशिश की, लेकिन वह उसका दिल बगल की तरफ तलाश रहा था, जहां सूअरों का दिल हुआ करता है। दरअसल, सैंतिएगो नासार इसलिए नहीं गिर रहा था क्योंकि उन्होंने खुद ही उसे दरवाजे की सहारे खड़ा करके पकड़ा हुआ था और लगातार चाकुओं से गोद रहे थे। थक हार कर, पाब्लो विकारियो ने उसके पेट में आड़ा चाकू घुसेड़ा। इससे उसकी सारी अंतड़ियां फट कर बाहर आ गयीं। पैड्रो विकारियो भी उसे आड़ा चाकू मारने ही वाला था कि डर के मारे उसका हाथ घूम गया और सैंतिएगो नासार की जांघ पर गहरा घाव कर गया। सैंतिएगो नासार, एक पल के लिए तो दरवाजे के सहारे सीधा खड़ा रहा, लेकिन जब उसने सूरज की रौशनी में अपनी खुद की अंतड़ियां देखीं - साफ़ और नीली-नीली, तो वह घुटनों के बल गिर पड़ा।

सैंतिएगो नासार के लिए बैडरूम में झांकने, खोजने और चीखने चिल्लाने के बाद जब प्लेसिडा लिनेरो ने दूसरों की चीखें सुनीं जो उनकी खुद की नहीं थी और उन्हें पता नहीं चल पा रहा था कि कहां से आ रही हैं तो वे चौराहे की तरफ वाली खिड़की पर आयीं। वहां से उन्होंने विकारियो बंधुओं को गिरजा घर की तरफ भागते देखा। उनके पीछे तेजी से यामिल शाइमुल अपनी जगुआर बंदूक लिये लपक रहा था। उनके पीछे निहत्थे अरब लोग भी भाग रहे थे। प्लेसिडा लिनेरो को लगा, खतरा टल गया है। तब वे बेडरूम की बाल्‍कनी में आयीं तो उन्होंने सैंतिएगो नासार को दरवाजे के सामने देखा। उसका चेहरा नीचे धूल में लिथड़ा पड़ा था और वह अपने खुद के खून में चहबच्चे में से उठने की कोशिश कर रहा था। वह खड़ा हुआ, एक तरफ झुका और दृष्टि भ्रम के आलम में चलने लगा। वह अपने हाथों में अपनी झूलती अंतड़ियां थामे हुए था।

उसने पूरे घर के चारों तरफ सौ गज से भी ज्यादा का चक्कर काटा और रसोई के दरवाजे से भीतर चला गया। अभी भी उसका दिमाग इतना काम कर रहा था कि वह गली की तरफ नहीं निकला, जो कि लम्बा रास्ता था। लेकिन वह साथ वाले घर के भीतर घुस गया। पोंचो लानाओ, उसकी बीवी और उनके पांच बच्चे सोच भी नहीं पाये थे कि उनके घर से सिर्फ बीस कदम दूर पल भर पहले क्या कुछ हो चुका है, “हमने चिल्लाने की आवाज़ें सुनीं,” बीवी ने मुझे बताया था, “लेकिन हमने यही समझा कि ये सब बिशप के आगमन का हंगामा है। वे उस वक्त नाश्ता करने के लिए बैठने ही वाले थे जब उन्‍होंने सैंतिएगो नासार को खून से लथपथ और अपने हाथों में खुद की अंतड़ियां लिये भीतर आते देखा। पोंचो लानाओ ने मुझे बताया था कि हम गू की बदबू कभी भी भूल नहीं पायेंगे। वह बर्दाश्त से परे थी। लेकिन अर्जेनिडा लानाओ, उनकी बड़ी लड़की ने मुझे बताया था कि सैंतिएगो नासार अपनी स्वाभाविक, सधी चाल से, नपे तुले कदमों के साथ जब उनके आगे से गुज़रा तो उस वक्‍त घुंघराले बालों वाला उसका चेहरा पहले की तुलना में ज्‍यादा खूबसूरत नज़र आ रहा था। मेज़ के पास से गुज़रते वक्‍त वह उनकी तरफ देख कर मुस्‍कुराया था और बेडरूम से होते हुए पिछवाड़े के दरवाजे की तरफ चला गया था। “हमें जैसे डर से लकवा मार गया था।” अर्जेन्‍टीना लानाओ ने मुझे बताया था। मेरी चाची वेनेफ्रिडा मार्खेज़ नदी के दूसरी तरफ अपने घर के वरांडे में एक बड़ी मछली साफ़ कर रही थी जब उसने नासार को पुराने बंदरगाह की सीढ़ियों से नीचे उतरते देखा था। वह मज़बूत कदमों से अपने घर की तलाश कर रहा था।

“सैंतिएगो, मेरे बच्‍चे,” वेने चिल्लायी थी, “तुम्‍हें क्‍या हो गया है मेरे बच्‍चे?”

“इन लोगों ने मुझे मार डाला है विन्‍नी चाची।” उसने कहा था।

वह आखिरी पायदान पर लड़खड़ाया था लेकिन तुरंत ही संभल कर खड़ा हो गया था।

“उस बेचारे को अभी भी इतना होश था कि उसने अपनी अंतडियों पर लगी हुई हुई धूल को भी साफ़ किया था।” मेरी चाची ने मुझे बताया था। इसके बाद वह अपने घर के पिछवाड़े से अपने घर के अंदर चला गया था।

ये दरवाजा सुबह छ: बजे से खुला हुआ था।

वह रसोई घर में औंधे मुंह जा गिरा था।

 

(समाप्त)

 

सूरज प्रकाश

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रचनाकार: गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास - उस मौत का रोजनामचा (अंतिम किश्त)
गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास - उस मौत का रोजनामचा (अंतिम किश्त)
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रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/07/blog-post_928.html
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