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ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ // बन्दर, साँप और शेर // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — पूर्वी अफ्रीका–ज़ंज़ीबार : ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ संकलनकर्ता सुषमा गुप्ता 6 बन्दर, साँप और शेर [1] एक बार कीजीजी [2] न...

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देश विदेश की लोक कथाएँ — पूर्वी अफ्रीका–ज़ंज़ीबार :

ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

6 बन्दर, साँप और शेर[1]

एक बार कीजीजी[2] नाम के गाँव में एक स्त्री रहती थी। उसका पति अपने एक छोटे से बेटे को छोड़ कर मर गया था। उस लड़के का नाम ऐमवू लाना[3] था। वह बेचारी अपना और अपने बच्चे का पेट पालने के लिये बहुत कड़ी मेहनत करती थी फिर भी उन दोनों को आधा पेट ही खाना मिल पाता था।

वह लड़का जब थोड़ा सा बड़ा हो गया तो एक दिन उसने अपनी माँ से पूछा — “माँ, हम लोग रोज आधा पेट खाना खा कर रहते हैं। मेरे पिता हम लोगों को खाना खिलाने के लिये क्या करते थे?”

माँ ने जवाब दिया — “बेटा, तुम्हारे पिता शिकारी थे। वह जानवरों को पकड़ने के लिये जाल बिछाया करते थे और जो जानवर उस जाल में फँस जाता था उसी को हम लोग खा लिया करते थे। ”

ऐमवू लाना बोला — “मगर माँ यह तो कोई काम नहीं है यह तो खेल है। मैं भी जाल बिछाऊँगा और फिर देखता हूँ कि मैं भी कोई जानवर खाने के लिये पकड़ पाता हूँ या नहीं। ”

सो अगले दिन वह जंगल गया, पेड़ से कुछ डालियाँ काटीं और शाम तक घर लौट आया। दूसरा दिन उसने उन डालियों से जाल बनाने में लगा दिया। तीसरे दिन उसने नारियल के रेशे ले कर उनसे रस्सियाँ बनायीं।

चौथे दिन वह जितने भी जाल बिछा सका उसने उतने जाल बिछाये और पाँचवे दिन उसने बचे हुए जाल भी बिछा दिये।

छठे दिन वह उन जालों को देखने गया तो उसने देखा कि उन जालों में तो बहुत सारे जानवर पकड़े गये थे। उसने जितने जानवर अपने लिये काफी थे अपने लिये रख लिये बाकी बचे हुए जानवर वह पास के शहर ऊँगूजा[4] ले गया।

वहाँ उनको बेच कर उसने कुछ मक्का और खाने की दूसरी चीज़ें खरीदीं और घर आ गया। आज उसके घर में खाना ही खाना दिखायी दे रहा था।

कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा और वह और उसकी माँ कुछ दिन तक आराम से रहे। पर बाद में उसके जाल में जानवर फँसने कम हो गये और एक दिन ऐसा भी आया जब उसको अपने जाल में एक भी जानवर फँसा दिखायी नहीं दिया।

पर एक दिन एक बन्दर उसके जाल में फँस गया। वह उसको मारने को ही था कि वह बोला — “ओ ऐडम के बेटे, मैं नीआनी बन्दर[5] हूँ मुझे मत मारो। मुझे इस जाल में से निकाल दो और मुझे जाने दो। मुझे बारिश से बचा लो शायद मैं किसी दिन तुमको कड़ी धूप से बचा लूँ। ” ऐमवू लाना ने उसको जाल में से निकाल दिया और छोड़ दिया।

छूटते ही नीआनी बन्दर एक पेड़ पर चढ़ कर एक डाल पर बैठ गया और ऐमवू लाना से बोला — “तुमने मेरे ऊपर इतनी मेहरबानी की है तो मैं तुमको एक सलाह देता हूँ।

तुम मेरा विश्वास करो सारे आदमी बुरे होते हैं। कभी किसी आदमी का भला मत करना। अगर तुम करोगे तो वह आदमी पहला मौका मिलते ही तुमको नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा। ”

अगले दिन उसके उसी जाल में एक साँप फँस गया। वह गाँव वालों से साँप के बारे में कहने के लिये जाने लगा कि साँप ने उसे पुकारा और बोला — “ओ ऐडम के बेटे, तुम मुझे मारने के लिये आदमियों को बुलाने के लिये अपने गाँव मत जाओ। मेरा नाम नीओका[6] है।

मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ तुम मुझे इस जाल से निकाल दो। मुझे आज बारिश से बचा दो ताकि मैं कल तुम्हें धूप से बचा सकूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी सहायता की जरूरत पड़ेगी तो मैं जरूर तुम्हारे काम आऊँगा। ”

उस लड़के ने उस साँप को छोड़ दिया। जाते जाते वह साँप बोला — “अगर मुझे मौका लग गया तो मैं तुम्हारी मेहरबानी का बदला जरूर चुकाऊँगा।

पर तुम मेरी एक बात याद रखना कि कभी किसी आदमी पर भरोसा मत करना वह तुमको पहला मौका मिलते ही नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा। ” और यह कह कर वह चला गया।

तीसरे दिन ऐमवू लाना को अपने उसी जाल में जिसमें उसे बन्दर और साँप फँसे मिले थे एक शेर फँसा मिला। शेर को देख कर तो ऐमवू लाना बहुत ही डर गया। वह तो उसके पास भी नहीं जा पा रहा था।

लेकिन उसका आश्चर्य तब बहुत बढ़ गया जब उसने शेर को भी बोलते हुए सुना। वह कह रहा था — “तुम भागो नहीं। मैं बहुत बूढ़ा सिम्बा कौंगवे शेर[7] हूँ। तुम मुझे इस जाल से बाहर निकाल दो मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा।

मुझे इस बारिश से बचाओ। अगर तुम्हें मेरी जरूरत पड़ी तो मैं तुमको धूप से बचाऊँगा। ”

सो ऐमवू लाना ने उसका विश्वास करके उसको भी जाल से बाहर निकाल दिया। जाते जाते सिम्बा कौंगवे भी उससे कहता गया — “ओ ऐडम के बेटे, तुमने मेरे ऊपर बड़ी मेहरबानी की है। मैं तुम्हारी इस मेहरबानी का बदला जरूर चुकाऊँगा अगर हो सका तो।

पर एक बात का ध्यान रखना। कभी भी किसी आदमी के ऊपर दया नहीं करना। वह हमेशा उसका बदला तुम्हें बेरहमी से ही देगा। ” यह कह कर वह भी चला गया।

अगले दिन इत्तफाक से उस जाल में एक आदमी फँस गया और जब उस लड़के ने उस आदमी को जाल में से निकाला तो उस आदमी ने लड़के को कई बार विश्वास दिलाया कि वह उसके साथ की गयी मेहरबानी को कभी नहीं भूलेगा कि उसने उसको जाल में से निकाला और उसकी जान बचायी।

सो ऐसा लगता था कि ऐमवू लाना ने अब सारे शिकार पकड़ लिये थे और अब वह और उसकी माँ फिर से भूखे रहने लगे थे। अब उनके पास खाने के लिये पहले जैसी कुछ भी चीज़ें नहीं थीं।

एक दिन वह अपनी माँ से बोला — “माँ, घर में जो कुछ है उसकी मुझे 7 केक बना दो मैं अपना तीर कमान ले कर फिर से शिकार करने जाना चाहता हूँ। ”

उसकी माँ ने उसके लिये बचे हुए खाने के सामान की 7 केक बना दीं और वह उनको और अपना तीर कमान ले कर शिकार पर चल दिया।

वह बेचारा चलता गया चलता गया पर उसे कोई शिकार ही नहीं मिला। चलते चलते वह रास्ता भी भूल गया था और उसके पास केक भी अब केवल एक ही बची थी।

वह और चलता गया और चलता गया। वह नहीं जानता था कि वह अपने घर से किस दिशा में जा रहा था पर अन्त में वह एक बहुत ही अकेले और घने जंगल में आ निकला। ऐसा जंगल तो उसने पहले कभी नहीं देखा था।

वह इतना थक गया था कि उसका मन कर रहा था कि वह बस वहीं लेट जाये और मर जाये कि अचानक उसने किसी के उसको पुकारने की आवाज सुनी। उसने सिर उठा कर देखा तो एक पेड़ पर नीआनी बन्दर बैठा था।

उसने उससे पूछा — “ओ ऐडम के बेटे, तुम कहाँ जा रहे हो?”

ऐमवू लाना ने दुखी हो कर जवाब दिया — “मालूम नहीं। मुझे लगता है कि मैं रास्ता भूल गया हूँ। ”

बन्दर बोला — “चिन्ता न करो। तुम यहाँ बैठो और जब तक मैं आता हूँ थोड़ा आराम करो। और मैं तुम्हारी मेहरबानी का बदला मेहरबानी से ही चुकाऊँगा। ”

इतना कह कर नीआनी तुरन्त कूद कर वहाँ से चला गया और थोड़ी ही देर में कुछ पके केले और पपीता ले कर आ गया। उसने वे केले अैर पपीता ऐमवू लाना को ला कर दिये और बोला — “यह लो, तुम्हारे लिये तो यह बहुत सारा खाना है। और बोलो और क्या चाहिये तुमको? पीने के लिये भी तो कुछ चाहिये न तुमको?”

इससे पहले कि ऐमवू लाना कुछ जवाब देता वह एक कैलेबाश ले कर फिर से दौड़ गया और उसमें ठंडा पानी भर लाया। लड़के ने खूब पेट भर कर खाया और जी भर कर पानी पिया।

“अच्छा विदा। ” कह कर दोनों अपने अपने रास्ते चले गये।

ऐमवू लाना बिना कुछ सोचे समझे कि उसको कहाँ जाना है फिर चल दिया। अब की बार उसको रास्ते में सिम्बा कौंगवे शेर मिला। उसने भी लड़के से पूछा — “ओ ऐडम के बेटे, कहाँ चले?”

ऐमवू ने फिर वही जवाब दिया — “मुझे नहीं मालूम, मुझे लगता है कि मैं खो गया हूँ। ”

सिम्बा कौंगवे शेर बोला — “दुखी न हो दोस्त। तुम यहाँ बैठो और थोड़ी देर आराम करो। मैं तुम्हारी मेहरबानी का बदला चुकाना चाहता हूँ। ”

सो ऐमवे लाना तो वहीं बैठ गया आराम करने और सिम्बा कौंगवे शेर चला गया। बहुत जल्दी ही वह एक ताजा शिकार लिये आ गया जो उसने अभी अभी मारा था।

फिर वह आग भी ले आया। ऐमवू ने उस माँस को पकाया और खाया। पेट भर कर खा कर ऐमवे लाना ने सिम्बा कौंगवे शेर को विदा कहा और दोनों अपने अपने रास्ते चले गये।

इसके बाद ऐमवू लाना फिर बहुत देर तक चलता रहा और एक खेत पर आ निकला। वहाँ उसको एक बहुत बूढ़ी स्त्री मिली।

उस स्त्री ने उससे कहा — “ओ अजनबी, मेरे पति बहुत बीमार हैं और मैं किसी ऐसे आदमी की तलाश में हूँ जो उनके लिये दवा बना दे। क्या तुम उनके लिये दवा बना दोगे?”

ऐमवू ने जवाब दिया — “ओ भली स्त्री, मैं डाक्टर नहीं हूँ, मैं तो एक शिकारी हूँ। मैंने अपनी ज़िन्दगी में दवाएँ कभी इस्तेमाल नहीं कीं। मुझे बहुत अफसोस है कि मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता। ”

वहाँ से चलता चलता वह एक सड़क पर आ गया जो शहर को जाती थी। वहाँ आने पर उसको एक कुँआ मिला। उस कुँए के पास ही एक बालटी रखी थी। उसने सोचा कि अगर वह बालटी पानी तक पहुँच पाती हो तो वह वहाँ से पानी पी ले।

पानी देखने के लिये उसने कुँए के अन्दर झाँका तो क्या देखता है कि वहाँ तो पानी की बजाय एक साँप बैठा है।

साँप ने उसको तुरन्त ही पहचान लिया और बोला — “ओ ऐडम के बेटे, एक मिनट रुको। ”

फिर वह कुँए से बाहर निकल कर बोला — “तुमने मुझे पहचाना नहीं क्या?”

लड़का कुछ कदम पीछे हटा और बोला — “नहीं, मैंने तो नहीं पहचाना तुमको। ”

साँप बोला — “पर मैं तो तुमको भूल ही नहीं सकता। मैं नीओका साँप जिसको तुमने जाल से छुड़ाया था। याद है मैंने तुमसे कहा था “तुम मुझे बारिश से बचाओ तो मैं तुमको धूप से बचाऊँगा। ”

अब तुम इस शहर में अजनबी हो। लाओ, अपने हाथ में पकड़ा यह थैला मुझे दे दो और मैं इसे ऐसी चीज़ों से भर दूँगा जो वहाँ पहुँचने पर तुम्हारे काम आयेंगीं। ”

सो ऐमवू लाना ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ थैला नीओका साँप को दे दिया। नीओका साँप ने उस थैले को सोने चाँदी की जंजीरों से भर दिया और ऐमवू लाना से कहा कि वह उन चीज़ों को अपने किसी भी काम के लिये आराम से बेहिचक इस्तेमाल कर सकता है। उसके बाद वे दोनों प्रेम से विदा हो गये।

जब ऐमवू लाना शहर पहुँचा तो वहाँ उसको पहला आदमी वही आदमी मिला जिसको उसने अपने जाल में से निकाला था। ऐमवू लाना को देख कर उसने ऐमवू लाना को अपने घर आने के लिये कहा। ऐमवू लाना उसके साथ उसके घर चला गया। उस आदमी की पत्नी ने उसके लिये खाना बनाया।

जैसे ही उस आदमी को मौका मिला वह अपने घर से खिसक लिया और वहाँ के सुलतान के पास जा पहुँचा।

उसने सुलतान से कहा — “सुलतान, मेरे घर एक अजनबी आया है जिसके पास सोने चाँदी की जंजीरों से भरा एक थैला है जिसके लिये वह कहता है कि उसको वह एक साँप ने दिया है और वह साँप एक कुँए में रहता है।

हालाँकि वह यह बहाना करता है कि वह एक आदमी है पर मुझे यकीन है कि वह खुद भी कोई आदमी नहीं है बल्कि वह भी एक साँप है जो आदमी का रूप ले सकता है। ”

सुलतान ने यह सुनते ही अपने कुछ सिपाही उस आदमी के साथ उसके घर भेज दिये और वे ऐमवू लाना को और उसके साथ उसके थैले को भी पकड़ कर सुलतान के पास ले गये।

जब सुलतान के आदमी उसका वह छोटा थैला खोलने वाले थे तो वह आदमी जो उसको अपने घर ले कर आया था बोला कि इसके थैले में से जरूर ही कोई बुरी चीज़ निकलेगी जो सुलतान और वजीर के बच्चों को नुकसान पहुँचायेगी।

इससे वहाँ खड़े लोग और ज़्यादा उत्सुक हो गये और उन्होंने ऐमवू लाना के हाथ उसके पीछे बाँध दिये।

इसी समय वह नीओका साँप अपने कुँए में से निकल कर शहर में आ पहुँचा था। वह उस आदमी के पैरों में जा कर पड़ गया जिसने ऐमवू लाना के बारे में बुरा कहा था।

जब लोगों ने साँप को देखा तो उस आदमी से कहा — “अरे यह क्या? यह साँप तो उस कुँए में रहता है और यह तो तुम्हारे घर के ही पास रहता है। भगाओ इसको। ”

लेकिन नीओका तो वहाँ से हिला भी नहीं। सो उन्होंने ऐमवू लाना के बँधे हाथ खोल दिये।

उन्होंने यह भी कोशिश की कि वे लोग उस आदमी के लगाये हुए इस इलजाम को बदल सकें कि ऐमवू लाना एक जादूगर था पर वे यह भी न कर सके।

सुलतान ने ऐमवू लाना से पूछा — “यह कौन आदमी है जिसने तुम्हें अपने घर बुलाया और फिर तुम्हारी बुराई कर रहा हैÆ”

ऐमवू लाना ने जो कुछ भी उसके साथ हुआ था वह सब कुछ बता दिया। कैसे बन्दर, साँप, शेर और यह आदमी उसके जाल में फँस गये थे और कैसे उसने उनको छोड़ दिया था।

फिर कैसे बन्दर, साँप और शेर सबने उसको सावधान किया था कि कभी किसी आदमी का विश्वास न करना वह तुम्हारी मेहरबानी का जवाब मेहरबानी से नहीं देगा पर उसने उनका विश्वास नहीं किया,

सुलतान हँसा और बोला — “हालाँकि आदमी अक्सर ही मेहरबानी का जवाब मेहरबानी से नहीं देता पर सारे आदमी एक से नहीं होते। हाँ जहाँ तक इस आदमी का सवाल है यह आदमी तो एक बोरे में बन्द करके समुद्र में डुबोने के लायक है क्योंकि तुमने इसके साथ अच्छा बरताव किया और उसके बदले में इसने तुम्हारे साथ यह बुरा किया। ”

उस आदमी को बोरे में भर कर समुद्र में डुबो दिया गया और ऐमवू लाना को और बहुत सारा पैसा दे कर उसके गाँव का रास्ता दिखा दिया गया।

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[1] The Ape, the Snake and the Lion – a folktales of Zanzibar, Eastern Africa.

[A similar folktale is told India also. It is given in the Book “Bharat kI Kuchh Lok Kathayen-3” under the heading of “Panchtantra Ki Kahani”. So it seems that it has reached from India to Zanzibar.]

[2] Keejeejee – name of a village

[3] Mvoo Laana

[4] Oongooja town

[5] Neeanee Ape

[6] Neeoka Snake

[7] Simba Kongwe Lion

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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(कहानियाँ क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,305,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1879,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र 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रचनाकार: ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ // बन्दर, साँप और शेर // सुषमा गुप्ता
ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ // बन्दर, साँप और शेर // सुषमा गुप्ता
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