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उपन्यास - रात 11 बजे के बाद - भाग - राजेश माहेश्वरी

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उपन्यास रात  11 बजे के बाद - राजेश माहेश्वरी भाग 1 || भाग 2 || भाग 3 || भाग 4 || भाग 5 || भाग 6 हरीश रावत उससे प्रश्न पूछता है कि आनंद ...

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उपन्यास

रात  11 बजे के बाद

- राजेश माहेश्वरी


भाग 1 || भाग 2 || भाग 3 || भाग 4 || भाग 5 ||


भाग 6

हरीश रावत उससे प्रश्न पूछता है कि आनंद की आत्महत्या कर लेने का टेलीफोन किसके द्वारा और क्यों किया गया था, दूसरी बात यह बताओ कि वह डॉक्टर कौन था जिसने आनंद की स्वाभाविक मृत्यु हृदयाघात से होना बताया था। रवि कहता है कि वह टेलीफोन मैंने ही हमशक्ल को ऊपर बैठाकर नीचे आकर किये थे। आनंद यदि जहर वाली चाय पी लेता तो मैं उसकी आत्महत्या का मामला बनाने की कोशिश में था। डॉक्टर जो आया था वह वास्तव में कंपाउंडर था जिसे मैंने इस काम के लिये पच्चीस हजार रू. देकर गांव से बुलाया था।

हरीश रावत ने उसको जोर से थप्पड मारते हुये कहा कि तुमने आनंद के ऊपर गोली नहीं चलायी बल्कि उस व्यक्ति पर गोली चलायी जिसने तुम पर इतना विश्वास किया। इसके बाद का घटनाक्रम आनंद के हमशक्ल की अंत्योष्टि से लेकर अभी तक का आपको मालूम ही है।

हरीश रावत अब रवि से पूछता है कि आनंद कहाँ पर है वह कहता है कि मुझे नहीं मालूम कि उसे कहाँ पर रखा गया है और वह जीवित है या नहीं इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं आनंद की मृत्यु चाहता था मुझे उसकी वसीयत का फायदा तभी मिल सकता था जब आनंद की जीवनलीला समाप्त हो चुकी हो। रिजवी और शमशेर सिंह आनंद की मृत्यु नहीं चाहते थे, वे पाँच दस करोड़ रूपये प्राप्त करके उसे छोड़ देने में रूचि रखते थे। इस कारण उन दोनों में मुझे आनंद के संबंध में कोई भी जानकारी जानबूझ कर नहीं दी हैं।

अब जाँच अधिकारी उससे पूछता है कि तुम एक राष्ट्रीयकृत बैंक में कई बार जाते हुये दिखे हो हमें इस संबंध में पूरी जानकारी है अब तुम ही बता दो कि क्या माजरा है। रवि समझ जाता है कि पुलिस को पूरी खबर है अब झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं। वह स्वीकार कर लेता है कि उसका बैंक खाता एवं लॉकर वहाँ पर है। बैंक का यह खाता रिजवी के सहयोग से खोला गया था और लॉकर में जो वसीयत मैंने बनाई थी उसकी मूल प्रति रखी हुयी है। वह पुलिस के संरक्षण में वहाँ जाकर वह वसीयत हरीश रावत के हाथों में दे देता है। इस प्रकार पुलिस को रवि के खिलाफ सबसे बडा सबूत प्राप्त हो जाता है।

अब यह जाँच प्रक्रिया और भी अधिक उलझ गया थी एवं इसमें बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता हरीश रावत समझ रहे थे। इसकी महत्वपूर्ण कड़ी शमशेर सिंह और रिजवी को पुलिस खोज रही थी परंतु वे दोनों नदारद थे। पुलिस को यह भी शक था कि कही ये दोनों देश के बाहर ना चले गये हो।

राकेश और गौरव को जब यह बात पता हुई तो उन्होंने सोचा कि उन्हें भी आनंद के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिये। यदि आनंद जीवित है तो उनके लिये इस अधिक खुशी की बात और क्या हो सकती हैं। पुलिस तो अपना प्रयास कर ही रही है वे इस दिशा में क्या कर सकते हैं यह सोचते हुये वे मानसी के पास पहुँचते हैं मानसी पूरी बात सुनकर कहती है कि पल्लवी को भी सारी बातें पता नहीं है उसने मुझे बताया था कि गोवा में रिजवी प्रतिदिन किसी से फोन पर बात करता था जिसमें आनंद का जिक्र रहता था मेरे बहुत पूछने पर भी उसने मुझे इस संबंध में कुछ भी नहीं बताया वह मुझे बिना बताए ही अचानक गायब हो गया। मानसी उससे पूछती है कि रिजवी के उसके खुद के मकान के अलावा और भी कोई रहने की जगह है क्या? पल्लवी बताती है कि हाँ एक फार्म हाउस है जो कि यहाँ से 25 किलोमीटर की दूरी पर है परंतु वहाँ पर वह बहुत कम ही जाता है राकेश यह जानकारी पुलिस विभाग को देता है हरीश रावत इसे महत्वपूर्ण मानता है और अपने विश्वसनीय पुलिस कर्मचारियों को फार्महाउस पर नजर रखने के लिये नियुक्त कर देता है उसे उसी दिन शाम को ही खबर मिलती है कि शमशेर सिंह और रिजवी को वहाँ देखा गया है वहाँ की गतिविधियाँ संदिग्ध हैं एवं चारों ओर से नजरबंद जैसा माहौल है यह जानकर हरीश रावत के नेतृत्व में पुलिस दल बल सहित रात में ही वहाँ छापामार कार्यवाही करके रिजवी और शमशेर सिंह को गिरफ्तार करके आनंद के विषय में कडाई से पूछताछ करते है तो वे बता देते हैं कि आनंद ऊपर के कमरे में सुरक्षित है पुलिस तुरंत ही ऊपर जाकर आनंद को अपने कब्जे में ले लेती है और तुरंत ही उसे वहाँ से अपने साथ वरिष्ठ अधिकारियों के पास ले जाती है।

यह जानकारी उसके घर पर पहुँचने पर खुशी का माहौल हो जाता है और आनंद से मिलने पहुँच जाते हैं। वहाँ पर शहर के पत्रकारों, गणमान्य नागरिकों एवं कर्मचारियों की भारी भीड़ एकत्रित हो जाती है जिसे संभालना पुलिस के लिये कठिन हो जाता है पुलिस अधिकारी आनंद से जानना चाहते हैं कि उसका अपहरण क्यों हुआ और कैसे उसने अपनी जान की सुरक्षा की उसे अपहरण के दौरान उसके साथ कैसा व्यवहार हुआ इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी जानने के लिये सभी उत्सुक थे।

आनंद सबसे पहले अपने परिवारजनों एवं अपने अभिन्न मित्रगण राकेश एवं गौरव के साथ अपने पारिवारिक मंदिर में जाकर प्रभु कृपा के लिये प्रभु को प्रणाम करके आकर सभी बातें बताने की इच्छा व्यक्त करता है। पुलिस के संरक्षण में उसे मंदिर ले जाया जाता है। जहाँ वह दर्शन के उपरांत वापिस आ जाता है। अब वह अधिकारियों को विस्तारपूर्वक सभी घटनाओं की जानकारी देता है।

वह कहता है कि उस दिन रात को लगभग नौ बजे गौरव के जाने के बाद वह रवि को बताकर उसके कर्मचारी की बेटी की शादी में जाकर साढे़ नौ बजे के आसपास वापिस आता है उस दिन घर एकदम सुनसान था केवल एक चौकीदार और रवि ही वहाँ पर थे क्योंकि सभी कर्मचारीगण शादी में शामिल होने गये हुये थे। वह लिफ्ट से ऊपर जाकर अपने बेडरूम की ओर बढ़ रहा था उसे महसूस हो रहा था कि कोई बेडरूम के पर्दे के पीछे छिपा हुआ है यह देखकर वह थोडा ठिठका और बेडरूम के सामने के काँच में रवि का प्रतिबिंब दिख रहा था उसके हाथ में रिवाल्वर भी थी मैं कुछ समझ नहीं पाया तभी बेडरूम में घुसते समय ही उसने फायर किया मैं सावधान था और तुरंत दौड़कर जीने को ओर भागा मैं तेजी से कूदता हुआ जीना पार कर रहा था तभी दूसरी गोली मेरे पास से निकल गयी मैं लॉन से होता हुआ घर के पिछवाडे की दीवार से दूसरी तरफ कूद गया मैं वहाँ यह देखकर अचंभित हो गया कि वहाँ पर दो गाडियों में छः सात लोग बैठे हुये थे और वे मेरा ही इंतजार कर रहे थे उनमें से एक ने कहा अरे इसे तो बेहोशी की हालत में बाहर लाया जाना था परंतु यह तो होशोहवास में हैं इतना कहकर उन लोगों ने मुझे घेरकर जबरदस्ती एक गाड़ी में बैठा दिया और मुझे चुप रहने की हिदायत दी वे सभी सशस्त्र थे और मैंने चुप रहने में ही भलाई समझी उन्होंने फोन से किसी से बात की उसने निर्देश दिया कि इसे बिना मालूम हुये अपने गंतव्य पर पहुँचा दो। उन्होंने मेरी आँख पर पट्टी बांधकर एक स्थान पर ले गये और वहाँ कार से मुझे उतारकर एक सुसज्जित कमरे में बैठाकर मेरी आंखों की पट्टी खोल दी। मै बहुत घबराया हुआ था और मेरी सिट्टी पिट्टी गुम थी मेरी कल्पना के विपरीत उन सभी का व्यवहार बहुत अच्छा था और मुझे उन्होने चाय नाश्ता भोजन आदि सभी सुविधायें प्रदान की थी। मैं कमरे के बाहर नहीं जा सकता था तथा मुझे बाहर की कोई भी जानकारी नहीं दी जाती थी। मुझे वहाँ क्यों लाया गया मेरे से क्या चाहते हैं और कौन उनका बॉस है यह दो दिन तक पता ही नहीं चल पाया था।

इसके बाद तीसरे दिन रिजवी और शमशेर सिंह दोने मेरे पास आये तो मैं आश्चर्यचकित रह गया कि यह काम उनका है उनका व्यवहार भी मेरे साथ बहुत अच्छा रहा मैंने उनसे पूछा कि आप लोग क्या चाहते हैं और मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है रवि ने मुझे खत्म करने का प्रयास क्यों किया ? वे बोले कि हम तुम्हें सबकुछ बताते हैं रवि ने तुम्हारे दस्तखत के स्टेम्प पेपर पर वसीयत बना ली है कि तुम्हारी मृत्यु के उपरांत तुम्हारी सारी संपत्ति उसे मिल जाएगी इसलिये वह तुम्हें जान से मारना चाहता है उन्होंने मुझे मेरे हमशक्ल से लेकर उसकी अंत्येष्टि एवं पुलिस की जाँच पड़ताल के विषय में बताया उन्होंने यह भी कहा कि रवि ने डबल क्रास किया था हम दोनों तुम्हारी जान नहीं लेना चाहते थे। मैं पल्ल्वी के नाम की वसीयत तुम्हारे द्वारा बदले जाने से नाराज था और शमशेर सिंह रंजना के नाम की वसीयत बदले जाने से बहुत खिन्न था यह शमशेर सिंह के दिमाग की योजना थी कि तुम्हारा अपहरण करके वसीयत बदले जाने की बात भूलकर दस दस करोड़ रूपये वसूल कर लिये जाए तो हम लोगों का सारा जीवन आसानी से व्यतीत हो जाएगा इसी बीच रवि ने अपने नाम की वसीयत की जानकारी दी और हम लोगों से तुम्हें खत्म करने का अनुरोध किया इसके लिए उसने जायदाद मिलने पर पाँच पाँच करोड़ रू. देने का आश्वासन दिया।

शमशेर सिंह ने शक जाहिर करते हुये कहा कि जब पूरी जायदाद उसने अपने नाम लिख ली है तो आनंद के नहीं रहने पर यदि इसने अपने को धन नहीं दिया तो हम क्या कर लेंगे। हम दोनों ने तुम्हारी जीवनलीला खत्म करने के लिये स्पष्ट रूप से रवि को मना कर दिया। अब दोनों के उद्देश्य अलग अलग थे हमें तुमसे धन लेना था और रवि को तुम्हारी जान उसने सुझाव दिया था कि तुमको बेहोश करके पिछले दरवाजे से बाहर ले आयेगा फिर हम लोग तुम्हें अपने निर्धारित स्थान पर रखेंगे इसके बाद क्या करना चाहिये इसे सोचकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हम लोगों ने इसे स्वीकृति दे दी पंरतु तुम अभी कहाँ पर हो एवं हम दोनों भी यहाँ पर हैं इसकी जानकारी रवि को नहीं होने दी पल्लवी या मानसी को भी इन सभी बातों की कोई जानकारी नहीं है अब हम लोगों की अपेक्षा है कि हमारी मांग पूरी हो जाए और हम तुम्हें रिहा कर दें। हमें रवि से कुछ लेना देना नहीं है।

मैंने उनकी पूरी बात सुनकर कहा कि आप लोग तो मेरे जीवन की रक्षा के कवच बन गये हैं इसके लिये मैं आपको दस करोड़ से ज्यादा भी दे सकता हूँ पंरतु एक बात आप सोच लीजिये इतनी बडी रकम आप कहाँ रखेंगे और इसका उपयोग कैसे कर पायेंगे क्योंकि जैसे ही आप अपनी हैसियत के ऊपर कोई भी कार्यकलाप करेंगे वह सबकी नजर में आने लगेगा इसके साथ साथ रवि भी आपसे अपना बदला लेगा। मैं आपको अपने व्यापार में भागीदारी दे सकता हूँ जिससे आजीवन आपको धन प्राप्त होता रहेगा और किसी के कुछ समझ में नहीं आयेगा। रवि को हमसब मिलकर पुलिस के हवाले करवा देंगे और जेल में सड़ता रहेगा। आप विचार लें आप क्या चाहते हैं ? मैं मन में समझ गया था कि इनको मैं रोज धन कमाने का एक नया फार्मूला देता जाउँगा ये अनिश्चय की स्थिति में रहेंगे, समय निकलता जायेगा और पुलिस कार्यवाही में ये सभी पकड़े जायेंगे और मेरी यह सोच एकदम सही निकली आखिर आप लोगों ने मुझे मुक्त करा ही लिया। ये लोग इतनी बड़ी रकम के लालच में इतने उलझे हुये थे कि इन्हें क्या करना चाहिये यह इनकी समझ के बाहर था और ये लोग रवि कि गिरफ्तारी की आशा में समय व्यतीत कर रहे थे।

पुलिस विभाग द्वारा अभी तक रवि को गिरफ्तार ना करने के कारण ये दोनो बहुत व्यथित थे। शमशेर सिंह ने विचार करके सोच समझ कर हमशक्ल की पत्नी को फोन किया कि आपके पति कहाँ पर हैं, किस हालत में हैं ? इसका पता करने के लिये तुरंत ही आ जाइये यह फोन आते ही वह तुरंत आनंद के गृहनगर पहुँच कर पुलिस थाने जाती है और अपने पति की फोटो दिखाकर उसके विषय में जानकारी प्राप्त करने का अनुरोध करती है।

रवि की गिरफ्तारी से शमशेर सिंह और रिजवी खुश हो जाते है और मुझे बधाई देते हुये कहते हैं कि अब तुम्हें रिहा करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अभी हम लोग यह बात कर ही रहे थे कि आपने छापा मार कर मुझे रिहा करा लिया। जाँच अधिकारी हरीश रावत आनंद को कहता है मैं कभी किसी के निजी मामलों के विषय में दखलंदाजी नहीं करता हूँ परंतु पल्लवी और रंजना का आपसे संबंध अब निजी ना होकर हत्या और अपहरण से जुडा हुआ हैं। इस संबंध में मुझे आपसे विस्तारपूर्वक जानकारी की अपेक्षा है। मुझे आशा है कि आप बिना कुछ भी छिपाए हुये हमें इससे अवगत करायेंगे।

आनंद इनसे अपने संबंधों को स्वीकार कर लेता है और बताता है कि रंजना शमशेर सिंह की सगी बेटी नहीं हैं। यह किसी धनाढ्य व्यक्ति की नाजायज संतान हैं जिसे पालन पोषण के लिये शमशेर सिंह को उसके जन्म के साथ ही दे दिया गया था। रंजना के नाम पर ही सभी सेव के बगीचे, धन दौलत एवं अन्य जायदाद है जिससे काफी आमदनी आती है। रंजना एक खुले विचारों वाली स्वछंद लडकी है जिसके मित्रता कई पुरूषों से रही है। वह बहुत ही सुंदर एवं चतुर लड़की है। अब शमशेर सिंह का उस पर कोई नियंत्रण नहीं है। रंजना से आनंद ने शादी के लिये इंकार करने के बाद गौरव की नसीहत पर मसूरी आना बंद कर दिया था और मैंने रवि को यहाँ बुला लिया था। पल्लवी के साथ मेरी मित्रता रंजना से दोस्ती समाप्त होने के बाद हुई थी यह केस कब कहाँ क्यों ? इन सभी प्रश्नों का उत्तर आपको गौरव और राकेश ने दे दिये हैं उन्हें वापिस दोहराने में कोई लाभ नहीं है इसमें मेरी ही गलती थी कि मैंने पल्लवी के निजी जीवन के विषय में उसके बताने की मंशा के बावजूद भी यह कहकर उसे बताने नहीं दिया कि मैं अतीत में विश्वास नहीं रखता वर्तमान में जीता हूँ, भविष्य की कल्पना करता हूँ। मैंने राकेश के समझाने पर भी कि पल्लवी का साथ छोड दो उसकी बात ना मानकर उसी से अपनी दूरी बढ़ा ली थी। गौरव ने भी मुझे समझाया था कि वसीयत का प्रलोभन तुम्हारे लिये कभी भी जान का खतरा बन सकता है। मुझे अपने मित्रों की बातों पर विश्वास रखना चाहिये था परंतु कभी कभी हम अपने हितैषियों को भूल जाते हैं।

मेरी पूरी शिक्षा दीक्षा विदेश में हुई है इसलिये मेरे मन की भावनायें इस प्रकार के संबंधों को बुरा नहीं मानती क्योंकि वहाँ पर यह सब एक सामान्य बात है परंतु अपने देश की सभ्यता, संस्कृति व संस्कार अलग हैं जो इसे मान्यता नहीं देते हैं। अब मुझे वास्तविक धरातल का अनुभव हो रहा है कि मेरी गलतियों के कारण ही आज का ये दुखद दिन आया है मैं कानून से तो रिहा हो गया हूँ परंतु अपने गलत कर्मों के फलों कैसे रिहा हो सकूँगा यह नहीं समझ पा रहा हूँ यह मेरे निजी जीवन के बारे में सच्चाई जानने के बाद मुझे इस बात की चिंता नहीं हैं कि बाहर वाले मेरे विषय में क्या सोचते हैं परंतु मुझे चिंता इस बात की है कि मेरे घर में ही अब मेरी स्थिति क्या रहेगी।

मैंने एक महिला पल्लवी की आर्थिक मदद करके उसे स्वावलंबी बनाकर सम्मान से जीने का रास्ता दिखाया। इसकी तारीफ कोई नहीं करेगा। मेरे निजी संबंधों को आलोचना का विषय बना दिया जाएगा। आनंद अब उस हमशक्ल के परिवार से मिलता है और उन्हें सांत्वना देता है उसके बेटे के अच्छी पढाई की जवाबदारी अपने कंधे पर लेकर उसके परिवार को बाकी खर्च हेतु आजीवन मदद का आश्वासन देता है। उसकी पत्नी रोती हुयी उसकी इस कृपा के लिये धन्यवाद देती है।

अब जाँच अधिकारी शमशेर सिंह और रिजवी से पूछताछ करता है जो उनको वही जानकारी देते हैं जो आनंद और रवि बता चुके थे। अब आनंद को उसके घर जाने दिया जाता है रवि, रिजवी और शमशेर सिंह को हिरासत में ले लिया जाता है। पल्लवी और रंजना का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था इसलिये उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाता है। आनंद अनुरोध करता है कि रिजवी और शमशेर सिंह को वो माफ कर रहा है इसलिये उन्हें छोड़ दिया जाए इस पर पुलिस अधिकारी कहते हैं कि यह मामला हमारे हाथ में नहीं हैं यह न्यायिक प्रक्रिया है न्यायालय जैसा उचित समझेगी वैसा होगा। आप अपनी ओर से यह अपील न्यायालय से कर सकते हैं।

आनंद अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ घर चला जाता है। नगर के सभी समाचार पत्रों में दूसरे दिन बहुत विस्तार से इस संबंध में जानकारी प्रकाशित होती है। आनंद के व्यक्तिगत संबंध अपनी पत्नी से और भी अधिक खराब हो जाते है और वो दूसरे दिन ही अपने माता पिता के पास बैंकाक चली जाती है उसके दोनों लड़के भी अपनी माँ का साथ देकर पिता के विचारों से असहमति रखते हुये वापस दुबई चले जाते हैं। गौरव अपने बेटे के पास अमेरिका चला जाता है। राकेश भी आनंद का हश्र देखकर मानसी तक ही अपने संबंध सीमित कर देता है।

आनंद महसूस करता है कि उसे नवजीवन प्राप्त हुआ है। उसके मन पर इन घटनाओं का गहरा असर पड़ा था और जिससे उसके जीवन में परिवर्तन हो गया था। अब वह अपना समय अपने उद्योग एवं व्यापार की उन्नति के साथ साथ सामाजिक कार्यों एवं प्रभु स्मरण में समर्पित करने लगा था। उसकी विचारधारा में इस परिवर्तन के कारण उसके, उसकी पत्नी और बेटों के साथ संबंध मधुर होने लगते हैं। वह सादा जीवन, उच्च विचार के सिद्धांत को अपनाकर जीवन जीने लगता हैं जिससे उसके जीवन में वास्तविक आनंद की प्राप्ति होने लगती है।

जीवन में गरीबी

पैदा करती है अभाव

पनपाती है अपराध

और होता है समाज का अपराधीकरण।

जीवन में अमीरी

पैदा करती है दुर्व्यसन

लिप्त करती है समाज को

जुआ, सट्टा, व्यभिचार और शराब में।

इसलिये हमारे ग्रंथ कहते हैं

धन हो इतना

कि पूरी हों हमारी आवश्यकताएं।

कभी न हो

धन का दुरूपयोग।

जीवन हो

परोपकार और जनसेवा से परिपूर्ण।

पाप और पुण्य की तराजू में

पाप कम और पुण्य ज्यादा हों

तन में पवित्रता और

मन में मधुरता हो।

हृदय में प्रभु की भक्ति और

दर्शन की चाह हो।

धर्म-कर्म करते हुए ही

पूरी हो जीवन लीला

हमारे जाने के बाद

लोगों के दिलों में

बनी रहे हमारी मधुर याद।

(समाप्त)

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रचनाकार: उपन्यास - रात 11 बजे के बाद - भाग - राजेश माहेश्वरी
उपन्यास - रात 11 बजे के बाद - भाग - राजेश माहेश्वरी
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