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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 14 // मजबूर // राम करन

 
प्रविष्टि क्रमांक - 14


मजबूर
राम करन

"पुराना पर्चा नहीं लाये हो?" मैडम ने पूछा।
"लाया हूँ, साहेब।" ओहदे वाले स्त्री पुरुष सभी को वह 'साहेब' ही कहता है। लेकिन उसे नहीं पता कि इससे लोग यह अंदाजा लगा लेते है कि वह गंवार है। हालांकि वह खुद को ऐसा नहीं मानता। वह कई ज्यादा पढ़े-लिखो से अधिक कमाता है। समस्याओं को चुटकियों सुलझाता था। वह किसी होशियार से कम नहीं था। भले ही भाषा पर उसकी पकड़ कमजोर थी।
मैडम ने कहा -"पर्चा लाये हो तो दिखाते क्यों नहीं।"
"वो.. मैडम , पीछे आ रहे हैं..।"
"तो पत्नी को भी पीछे छोड़ आते..।" मैडम ने डाँट लगाया, " बीमार कहाँ है?"
"सिस्टर ने सुलाने को कहा था; बेड पर।"
मैडम उठी तो वह पीछे-पीछे चल दिया। मैडम ने नर्स से कुछ पूछा।  फिर जच्चा की आंखें देखी। जांचा-परखा और बोली -"आपरेशन कर दें?"
उसे बच्चे की इतनी जल्दी नहीं थी कि पेट में चीरा लगवाये।
उसे किसी ने बताया था कि आपरेशन के बाद माँ को दिक्कत रहती है। दूसरे बच्चे के समय भी आपरेशन करवाना पड़ता है। अतः वह आपरेशन से डरा हुआ था। सोचकर आया था कि पैसा जो भी लगे , पर डिलीवरी नार्मल करवाएगा। उसने मिन्नतें करने वाले अंदाज में कहा-" साहेब इंतजार कर लिया जाय।"
मैडम बिफर गईं-" जो तुम कहोगे, वही करूँगी। जब तुम्ही डॉक्टर हो तो मेरे पास किसलिए लाये। मैं जिम्मेदार नहीं हूँ।"
मैडम इतने जल्दी तुनक जाएंगी उसने नहीं सोचा था। उसे कुछ कहते डर लगने लगा। बोला - " जो आप उचित समझें। लेकिन थोड़ा देख लेते तो अच्छा होता।"
"मैंने तो बताया न। अब जो तुम कहोगे, मैं वही करूँगी। किन्तु जल्दी बता देना। देर रात में सर्जन नहीं मिलेंगे।"
वे चली गईं। पत्नी उसको देख रही थी और वह मजबूर दिख रहा था।
सिस्टर ने कहा -"इधर आओ। मैं समझाती हूँ।" वह उनके पास गया,  "तुम कितना पढ़े हो?"
"मैं तो काम भर का पढ़ा हूँ।"
"हाँ, तो ये मेडिकल की बातें अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे के समझ में नहीं आती। रात में कुछ ऊलम-दूलम हो गया तो फिर पछताते रहोगे। मैडम ज्यादा बात नहीं करती। अभी सोच लो।"
"मैं तो चाहता हूँ कि नॉर्मल हो जाय, साहेब।" वह दुहराया।
"देखो, नॉर्मल-नार्मल करते रहोगे तो एब्नार्मल भी हो सकता है। रोज दसों लोगों का आपरेशन होता है। कोई परेशानी नहीं होती...तो बोलो .. कहो तो मैडम को बोलूं।"
उसने पुनः पत्नी को देखा। फिर सिस्टर को और दबी जुबान में बोला -" ठीक...।
और नर्स चली गई।
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राम करन
अपरा सिटी फेज - 4
ग्राम व पोस्ट - मिश्रौलिया
जनपद - बस्ती, उत्तर प्रदेश
पिन - 272124

ईमेल - ramkaran0775@gmail.com






























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