नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 15 // आदत से मजबूर // दीपक दीक्षित


प्रविष्टि क्रमांक - 15

आदत से मजबूर
दीपक दीक्षित

विमान में प्रवेश की उद्घोषणा के साथ रमा एक झटके से उठ बैठी और लपक कर लाइन में लग गयी। वहीं सुरेश आराम से अपने लैपटॉप पर काम करता रहा। दोनों दम्पति अक्सर हवाई जहाज से यात्रा करते थे और हर बार ऐसा ही घटनाकर्म दोहराया जाता था।
सुरेश अक्सर लाइन ख़त्म होने का इंतज़ार करता और तब आराम से टहलता हुआ जाकर दरवाजे में प्रवेश करता था और इस तरह से बचाये हुए तीन-चार मिनट के समय का सदुपयोग अपने अपूर्ण कामों को निबटने में करता था। अपने कई बार के यात्रा अनुभव से वह जानता था कि उद्घोषणा होने के बाद अक्सर कुछ समय बाद ही एयरलाइंस के कर्मचारी वहां पर आते थे और तब तक रमा सरीखे बेसब्र यात्री लाइन बना कर उनका इंतज़ार करते थे। उसे मालूम था कि कि ये कोई रेलवे का अनारक्षित डिब्बा नहीं था जहाँ अपनी सीट संघर्ष करके हड़पना पड़ता है अन्यथा कोई और ले उडाता है ।विमान उसे छोड़ कर नहीं जायेगा और उसकी सीट पर कोई और यात्रा नहीं कर सकता। वह अपने आप को व्यर्थ में लाइन में खड़े रह कर न तो समय बर्बाद करना चाहता था और न ही अपने शरीर को कष्ट देना चाहता था।
इस बात पर कई बार उनमें झगड़ा भी हो चुका था पर उसका कोई नतीजा नहीं निकला।
रमा भी ये सब बातें समझती तो थी पर उसमें बचपन से ही ऐसे संस्कार ठूंसे गए थे कि हर जगह भाग कर सबसे पहले पहुंचना है। ये संस्कार अब उसकी आदत का हिस्सा बन चुके थे जिसे वह चाह कर भी नहीं बदल पा रही थी।
वो अपनी आदत से मजबूर थी।
क्या आप भी अपनी किसी आदत की मजबूरी की डोरी से बंधे हुए हैं
--
दीपक दीक्षित
image
निवास : सिकंदराबाद (तेलंगाना)
सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन
संपर्क​ : coldeepakdixit@gmail.com




रुड़की विश्विद्यालय (अब आई आई टी रुड़की) से इंजीयरिंग की और २२ साल तक भारतीय सेना की ई.ऍम.ई. कोर में कार्य करने के बाद ले. कर्नल के रैंक से रिटायरमेंट लिया . चार निजी क्षेत्र की कंपनियों में भी कुछ समय के लिए काम किया।
पढने के शौक ने धीरे धीरे लिखने की आदत लगा दी । कुछ रचनायें ‘पराग’, ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘अमर उजाला’, ‘नवनीत’ आदि पत्रिकाओं में छपी हैं।
भाल्व पब्लिशिंग, भोपाल द्वारा 2016 में "योग मत करो,योगी बनो' नामक पुस्तक तथा पांच साँझा-संकलन प्रकाशित हुए हैं ।
कादम्बिनी शिक्षा एवं समाज कल्याण सेवा समिति , भोपाल तथा नई लक्ष्य सोशल एवं एन्वायरोमेन्टल सोसाइटी द्वारा वर्ष २०१६ में 'साहित्य सेवा सम्मान' से सम्मानित किया गया।अमृतधारा संस्था ,जलगॉंव द्वारा 'अमृतादित्य साहित्य गौरव' सम्मान प्रदान किया गया (२०१८).
वर्ष 2009 से ‘मेरे घर आना जिंदगी​’ ​(http://meregharanajindagi.blogspot.in/ ​) ब्लॉग के माध्यम से लेख, कहानी,कविता का प्रकाशन। कई रचनाएँ प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं तथा वेबसाइट (प्रतिलिपि.कॉम, रचनाकार.ऑर्ग आदि) में प्रकाशित हुई हैं।
साहित्य के अनेको संस्थान में सक्रिय सहभागिता है । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई गोष्ठियों में भाग लिया है। अंग्रेजी में भी कुछ पुस्तक और लेख प्रकाशित हुए हैं।
साँझा-संकलन
संपादक का नामपुस्तक का नामविधाप्रकाशक
डा. डी. विद्याधरहिंदी की दुनियां ,दुनियां में हिंदीनिबंधमिलिंद प्रकाशन ,हैदराबाद
जयकांत मिश्रासहोदरी कहानी-२कहानीभाषा सहोदरी -हिंदी, दिल्ली
जयकांत मिश्रासहोदरी लघुकथा -२लघुकथाभाषा सहोदरी -हिंदी, दिल्ली
जयकांत मिश्रासहोदरी सोपान-५कविताभाषा सहोदरी -हिंदी, दिल्ली
डा प्रियंका सोनी 'प्रीत'काव्य रत्नावालीकवितासाहित्य कलश प्रकाशन , पटियाला


















0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.