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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 107 // पेंडिंग‍ विथ एम्‍पलॉयर // धर्मेन्‍द्र कुमार त्रिपाठी

प्रविष्टि क्रमांक - 107


पेंडिंग‍ विथ एम्‍पलॉयर

लघुकथा


धर्मेन्‍द्र कुमार त्रिपाठी

दस साल की लंबी नौकरी के बाद जब उसने शोषण और अन्‍याय से व्‍यथित होकर नौकरी छोड़ी तो उसके पिता जी नाराज हुये थे। आज के इस कठिन समय में जब छोटी सी नौकरी मिलना भी दुश्‍कर होता है, उसने लगी लगायी नौकरी छोड़ दी थी। दस दिन वह यहां-वहां भटकता रहा, अंतत: उसे पुरानी जगह से अच्‍छी जगह और बेहतर पगार पर उसके अनुभव और योग्‍यता के कारण नौकरी मिल गयी तो उनका गुस्‍सा दूर हो गया।

एक महीने काम करने के बाद जब उसके पी.एफ. एकाउंट के ट्रांसफर की बारी आई तो उसे मालूम हुआ कि उसके आधार कार्ड और पी.एफ. एकाउंट में नाम का मिलान नहीं हो रहा है। उसके पी.एफ. एकाउंट में अन्‍य मूल जानकारियां भी नहीं भरी थीं। उसने अपने पिता को जब यह बताया तब उन्‍हें संस्‍थान की नीयत का पता चला। पी.एफ. एकाउंट में मूल जानकारियां न भरी जाना और नाम त्रुटिपूर्ण भरा जाना उनकी बदनीयती और लापरवाही को उजागर कर रही थीं। पी.एफ. आफिस जाकर ज्ञात हुआ कि नियोक्‍ता के द्वारा ही मूल जानकारियां सुधारी जायेंगी। उन्‍होंने मैनेजर को फोन लगाया तो उन्‍होंने अभद्रता से बात की। अब उसके पिता जी को उनकी नीयत और पुत्र के सही निर्णय का ज्ञान हुआ कि आखिर उसने क्‍यों उस संस्‍थान को छोड़ा था।

पी.एफ. एकाउंट उसका था पर उस एकाउंट को वह बिना संस्‍थान की मर्जी के उपयोग नहीं कर सकता था। नाम और मूल जानकारियां त्रुटिपूर्ण होने के कारण ऑनलाईन वेरीफिकेशन नहीं हो पा रहा था। उसने ऑनलाइन वेरीफिकेशन करने की कोशिश की तो पेंडिंग विथ एम्‍पलॉयर का मैसेज स्‍क्रीन पर दृष्टिगोचर हो रहा था। उसने श्रम विभाग में शिकायत की तो उन्‍होंने अपने कार्यक्षेत्र से बाहर का मामला होना बताया। उसने पी.एफ. ऑफिस में शिकायत की ।

उन्‍होंने नियोक्‍ता से संपर्क करने का कह शिकायत क्‍लोज कर दी। वह रोज अपनी ऑनलाईन पासबुक देखता है तो उसमें शुरू से अभी तक का पैसे जमा होने का रिकार्ड नजर आता है, जिस पर उसका कोई अधिकार नहीं है। पी.एफ. की ऑनलाईन स्‍क्रीन पर अधूरी जानकारियों को पूरी भरने की उसकी रिक्‍वेस्‍ट पेंडिंग विथ एम्‍पलॉयर के मैसेज के साथ मुंह चिढ़ा रही है।

म.नं. 501, रोशन नगर,

राम जानकी हनुमान वार्ड नं.18,

मरकज मस्जिद के पास,

साइंस कॉलेज डाकघर, कटनी म.प्र.

483501

ई-मेल- tripathidharmendra.1978@gmail.com.

1 टिप्पणियाँ

  1. भविष्य निधि कटौती के नाम पर पीड़ित और अपने ही जमा धन पर औरों की कब्जागीरी की व्यथा कथा.असंगठित क्षेत्र के नौकरीपेशा युवक की असहयताबोध की सुबोध भाषा में लिखी एक आपबीती.युवा कहानीकार को शुभकामनायें!

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