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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 140 // दौलत // सुरेश सौरभ

प्रविष्टि क्रमांक - 140

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सुरेश सौरभ

दौलत

      बहुत देर से दूल्हा मुंह लटकाए उदास बैठा था। दुल्हन विदाई की बेला आ रही थी, कितना खर्च हुआ इसी गणित में व्यथित था, बस का किराया, जेवर,बैन्ड- बाजा आतिशबाजी ये वो अभी ऐट होम बाकी पड़ा है, क्या होगा । मिला कुछ नहीं ? तभी वहॉ ताली पीटते हुए हिजड़े आ गये," लाओ भाई २१ हजार । इनकी जोड़ी भगवान सलामत रखे। फिर नेग- न्योछावर के लेन-देन की तकरार शुरू हुई जिसमें दूल्हे की मॉ बोली हमें क्या मिला है जो तुम को दे दें। ये देखो टीन-टब्बर यही मिला है।
     तब एक हिजड़ा हाथ चमकाते हुए बोला- आए हाय! करोड़ों की इज्जत लिए जा रही हो कह रही हो क्या मिला।'
    अब दूल्हे ने गर्दन उठाई और मंद-मंद मुसकुराने लगा। फिर उसके चेहरे पर शिकन की उभरी गझिन सिलवटें जाती रहीं।

सुरेश सौरभ

निर्मल नगर लखीमपुर खीरी पिन-२६२७०१

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