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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 179 // छलावा // ममता छिब्बर

प्रविष्टि क्रमांक - 179


ममता छिब्बर

छलावा

पारुल और नेहा शहर घूमते घूमते एक पार्क में पहुंचे सामने एक बेंच देखा तो उस पर जाकर बैठ गए...
पार्क का रखरखाव इतना बढ़िया नहीं था काफी झाड़ियां उगी हुई थी कूड़ा इधर उधर फैला हुआ था ....

नेहा को कुछ याद आया और तुरंत बोली उसका क्या हुआ उस लड़के का वह जो तुम ऑनलाइन मैट्रिमोनियल में देख रही थी ?
पारूल - हां नेहा वह लड़का अच्छा है ...
बातें बहुत अच्छे से करता है हम १ महीने से बात कर रहे हैं.....
जिंदगी भर के वादे किए हैं  हमेशा मुझे खुश रखेगा....  लोकल लड़का है यही रहता है ...
हम दोनों ही कमायेगें, सब साथ रहेंगें..
मेरे मां-बाप की जिम्मेदारी उठाने को भी तैयार हैं ..
हम साथ बहुत खुश रहेंगे ......
बस इतना सा ही तो चाहिए देखने में ठीक-ठाक है प्राइवेट जॉब करता है उसे भी मैं पसंद हूं उसने अभी मुझे देखा नहीं है कुंडलियां हमारी मिल रही हैं.....
बस एक बार मुझे देख ले तो बात आगे बढ़े नेहा-देखा नहीं मतलब ?

हां मैंने फोटो नहीं लगाई है और मैं चाहती थी कि जो भी मुझे पसंद करें वह पहले मैं क्या हूं उसके लिए मुझे पसंद करे ना ही मैं कैसी दिखती हूं उसके लिए ...

नेहा बीच में बात काटते हुए बोली पारुल चल कहीं और चलते हैं वहां वह सामने जो लड़के बैठे हैं ना उनसे दो इधर देख कर इशारे करे जा रहे हैं और आपस में हंसे जा रहे हैं मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा ....

हां मैंने भी देखा पहले वह बैठे हुए थे हमारे आते ही दो जानबूझकर हमारी तरफ देखते हुए खड़े हो गए ताकि आपस में बातें कर सके पर और कहीं बैठने की जगह भी तो नहीं है हम कोई रिस्पांस नहीं करेंगे तू उधर मत देख...

दूसरी बेंच .....

भैयाजी एक बार देख तो लो क्या मस्त  लड़कियां हैं छुप छुप कर हमारी तरफ देख भी रही है लगता है इंटरेस्टेड है
चलो ना चलते हैं ....
लड़कें तालियां मारते हुए साले बुरी नजर से मत देख भाभी है तेरी ...

भैया जी का फोन बजा 1 मिनट रुको घर से फोन है मां का , भाई फोन साइलेंट कर दो यार अब मजे लो ..
हां कॉल करके करता हूं ....

तीनों लड़के उठे और लड़कियों की तरफ बढ़ने लगे...

लड़कियां उन्हें पास आते देख थोड़ी घबराते हुए उठने लगी तभी आवाज आई अरे जाते कहां हो हम खुद आ रहे हैं ना मिलने ..
भाभी भैया के बिना बैठे हो अच्छा नहीं लग रहा थोड़ी जगह छोड़ो भाई के लिए ...

तभी एक लड़का पारूल के साथ चिपक कर बैठते हुए बोला लो बैठ गए भैया जी कैसी लग रही है जोड़ी तुम्हारे भैया भाभी की ...

पारुल उठने की कोशिश करती है आगे हाथ करके उसे रोक लिया जाता है अरे अभी तो बैठे ही हैं शादी की बच्चों की सारी बात करेंगे इतनी जल्दी क्या है जाने की?

तभी दूसरे दो लड़के नेहा को जबरदस्ती छूने लगते है..
देखो हमें तुम्हें कोई इंटरेस्ट नहीं है प्लीज हमसे दूर रहो प्लीज ....

पर हमें तो पूरा इंटरेस्ट है ना आपकी आंखों में बालों में सर से लेकर पैर तक पूरी की पूरी आप में ...

बताओ रात का क्या प्लान है ....?

प्लीज हमें जाने दीजिए...

पारुल को व्हाट्सएप पर मैसेज करते हुए देख एक बोला अरे वहां किससे लगी हुई है हम साक्षात बैठे हैं ना  जो भी करना है हमारे साथ कर लो  ...

पारूल उठने कीं कोशिश करने लगी  उसका हाथ पकड़ जबरदस्ती उसे बिठाया गया ...

अरे बड़ी मुश्किल से तुम मिली हो ऐसे थोड़ी ना जाने देंगे तुम्हें एक बार भैया जी को आने दो जरा वह अपने लिए पसंद कर ले ....
फिर तो ऐश है  ...
पारुल नेहा धक्का देते हुए उठे और भागने लगे आगे झाड़ियां थी  तो घबरा गए
दोनो ने सोचा कि झाड़ियों में से निकलने की बजाए हमें वापस इन्हीं के बीच से जाना पड़ेगा ...
जो भी हो जाना तो है ही ...
वापस मुड़ के भागते हुए पारुल की नजर एक युवक पर पड़ी..
धीरज तुम आ गए तुम्हें मैसेज मिल गए अच्छा हुआ तुम आ गए ...

तभी पीछे से आवाज आई भैया जी अपने लिए माल पसंद कर लो ...
पारुल की आंखों में आंसू थे वह रोते हुए वहां से चली गई .....

धीरज ने मोबाइल देखा जिस पर मैसेज ही मैसेज थे ...
जहां भी हो सेंट्रल पार्क में आ जाओ ..
कुछ लड़के हमें परेशान कर रहे हैं..
कहां हो जल्दी आओ मुझे बहुत डर लग रहा है ....
धीरज प्लीज आ जाओ...

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ममता छिब्बर
   देहरादून, उत्तराखड़

1 टिप्पणियाँ


  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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