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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 180 // राशि रत्न // आशीष सहाय श्रीवास्तव

प्रविष्टि क्रमांक - 180

आशीष सहाय श्रीवास्तव


राशि रत्न
पति-पत्नी दोबारा ज्योतिष के पास पहुंचे और कहने लगे आपने खुशहाल जीवन के जो भी उपाय बताये सब किये।
पति :- ‘‘गृहस्थ जीवन में शांति के लिए पुखराज भी पहन लिया।’’
पत्नी :- ‘‘मानसिक शांति के लिए मोती भी आपके बताये अनुसार पहन लिया।’’
          ‘‘पर अभी भी गृह कलह मची रहती है। कोई प्रगति नहीं।’’
ज्योतिष ने गंभीरता से दोनों की ओर ऊपर से नीचे तक देखा और कहा :- ‘‘आपको जो बाहरी नग बताये वे तो आपने पहन लिये, पर क्या आंतरिक नग भी धारण किये?’’
पति-पत्नी दोनों जिज्ञासावश एक-दूसरे को देखने के बाद ज्योतिष की ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगे :- ‘‘आंतरिक नग !!’’
ज्योतिष :- ‘‘हां, प्रेम, सेवा, सहनशीलता, विनम्रता, सद्भाव ऐसे गुण हैं जो राशि रत्न से भी अधिक प्रभावशाली होते हैं.........।’’

20 टिप्पणियाँ

  1. बेहद उत्तम रचनाएं

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी बहुमूल्य टिप्पणी प्राप्त हुई। आज के व्यस्त समय में जब विस्तृत प्रतिक्रियाओं का अभाव हो गया है तब आपके द्वारा व्यक्त किये गए विचार हमारा उत्साहवर्द्धन करने के लिए काफी हैं। हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा।

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  2. उत्तर
    1. बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी बहुमूल्य टिप्पणी प्राप्त हुई। आज के व्यस्त समय में जब विस्तृत प्रतिक्रियाओं का अभाव हो गया है तब आपके द्वारा व्यक्त किये गए विचार हमारा उत्साहवर्द्धन करने के लिए काफी हैं। हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा।

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  3. राममूरत 'राही6:32 pm

    बहुत बढ़िया लघुकथा । बधाई आशिष जी

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  4. बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय राममूरत जी आपकी बहुमूल्य टिप्पणी प्राप्त हुई। आज के व्यस्त समय में जब विस्तृत प्रतिक्रियाओं का अभाव हो गया है तब आपके द्वारा व्यक्त किये गए विचार हमारा उत्साहवर्द्धन करने के लिए काफी हैं। हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा।

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  5. परिवारिक प्रेम की महत्ता दर्शाती सुंदर रचना मित्रं.💐

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  6. धन्यवाद आदरणीय वीरेन्द्र जी कम शब्दों में बहुत ही सटीक टिप्पणी की है आपने हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा।

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  7. Laghukatha acchi lagi.prem ko aur majboot karne wale antrik goono se zarit ratan kishi jyotish ke paas nahin shivai pati patni ke.

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  8. धन्यवाद आदरणीय Rajeev जी कम शब्दों में बहुत ही सटीक टिप्पणी की है आपने हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा।

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  9. आपकी रचना वास्तव में बहुत प्रेरक है ,कृपया आप मेरी रचना भी अवश्य पढ़े और अपने सुझाव दें।
    http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-154.html

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  10. आदरणीय रितु जी सादर नमस्कार! देरी से उत्तर के लिए क्षमा। आपके प्रति धन्यवाद जो आपने बहुमूल्य समय निकाल कर लघुकथा को पढ़ा और सिर्फ पढ़ा ही नहीं बल्कि अपना दायित्व समझते हुए रचना पर अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की। हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा।

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  11. उत्तर
    1. सादर नमस्कार! आदरणीय DEEPAK JI देरी से प्रतिक्रिया के लिए क्षमा। आपकी बहुमूल्य टिप्पणियां प्राप्त हुई। आपके द्वारा व्यक्त किये गए विचार हमारा उत्साहवर्द्धन करने के लिए काफी हैं। हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा। धन्यवाद!

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  12. आज की सबसे ज्वलंत सामाजिक समस्या पर आपने कलम चलाकर लेखकीय धर्म का निर्वहन किया है आपको बधाई।

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    1. आदरणीय KRISHNA JI आपकी बहुमूल्य टिप्पणियां प्राप्त हुई। आपके द्वारा व्यक्त किये गए विचार हमारा उत्साहवर्द्धन करने के लिए काफी हैं। हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। विश्वास है भविष्य में भी आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा। धन्यवाद!

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  13. आ. आशीष भाई ऐसे ही सार्थक कलम चलाते रहिए हमारी शुभकामनाएं। ऐसी रचनाएं सिर्फ ऑनलाइन ही नहीं बल्कि मैगजीन और समाचार पत्रों में भी प्रकाशित होना चाहिए। ऐसी रचनाएं समाज के लिए जरूरी व पठनीय हैं। धन्यवाद हमारी बधाई ईश्वर आपको सर्वश्रेष्ठ लेखन की शक्ति प्रदान करें।

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  14. आशीष भाई ऐसे ही सार्थक कलम चलाते रहिए हमारी शुभकामनाएं।

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  15. बहुत उम्दा । आज के समाज का आंखों देखा हाल । यथार्थवादी बेहतरीन रचना ।

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