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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 210 // परिवर्तन // चरण सिंह गुप्ता

प्रविष्टि क्रमांक - 210

चरण सिंह गुप्ता

परिवर्तन

मेरे दो पौत्र हैं | बड़ा, गर्व 12 वर्ष का है तथा छोटा यश, 8 वर्ष का है | वैसे तो दोनों मेरा बहुत ख्याल रखते हैं परन्तु यश मेरे साथ अधिक समय बिताता है क्योंकि मेरे अनुभवों से उसे कुछ सीखने की हमेशा जिज्ञासा रहती है | अत: वह मेरे सामने हमेशा प्रश्नों की झड़ी लगाए रहता है |

इसके विपरीत गर्व स्कूल से या ट्यूशन से आते ही मेरा फोन झपटने की कोशिश करता है तथा जब तक वह फोन प्राप्त नहीं कर लेता प्लीज दे दो, प्लीज दे दो की रट लगाए रहता है | वह फोन पाने के लिए अपना खाना-पीना सब कुछ भूल जाता है |

एक दिन जब प्लीज-प्लीज करके गर्व मेरे से फोन मांग रहा था तो यश ने गर्व से पूछा, “भाई आपको बाबा जी के फोन से क्या मिलता है ?”

गर्व ने तपाक से उल्टा प्रश्न किया, “तुझे बाबा जी के पास बैठ कर क्या मिलता है ?”

इस पर यश ने जो उत्तर दिया मैं सुनकर अवाक रह गया | वह बोला, “भाई, बाबा जी गुणों की खान हैं | उनकी बातों से दया, धर्म, कोमलता, सहनशीलता, रिश्ते-नातों का निभाना, इंसानियत, प्रेमभाव तथा सद्भावना इत्यादि सीखने को मिलती है परन्तु आप उनके फोन पर खेलकर ईर्षा, घृणा, दरिन्दगी, खून-खराबा, दुश्मनी तथा बन्दूक की भाषा ही सीख रहे हो |”

उस समय तो गर्व ने कोई उत्तर नहीं दिया और फोन लेकर दूसरे कमरे में चला गया परन्तु थोड़ी देर बाद ही वह वापस आया और मेरे पास फोन रखकर चुपचाप हमारी बातों को ध्यान से सुनने लगा | शायद छोटे भाई की बड़ी बात ने बड़े भाई को अन्दर तक झंझोड़ दिया था | गर्व ने फिर कभी फोन लेने के लिए जिद नहीं की जो दर्शाता था की उसमें बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया था |

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चरण सिंह गुप्ता

डब्लू.जैड.-653, नारायणा गाँव

नई देहली-110028


Email: csgupta1946@gmail.com

1 टिप्पणियाँ


  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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