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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 221 // प्याज की परतें // कविता जयन्त श्रीवास्तव

प्रविष्टि क्रमांक - 221

-कविता जयन्त श्रीवास्तव

प्याज की परतें

कल रात के घटनाक्रम के बाद सुबह उठते ही मेरा दिमाग उबल रहा था ..मैं पांव पटकते हुए उसे बरामदे तक ढूंढ आया..वो सब्जियों की डलिया लिए चाकू से उन्हें आज वैसे ही चाक कर रही थी जैसे उसने कल मेरे दिल को चाक किया था ..कल की लड़ाई के बाद लगा इसके बिना रह नहीं सकता मैं..पर अब क्या करूँ..? प्याज काटती जा रही सुनिधि को मैंने व्यंग्य किया .."अरे वाह, यहां प्याज की आड़ में आंसू बहा रही हो.. तुमने आज तक मुझसे अपना अतीत छुपाकर रखा था, अगर कल पार्टी में अजीत नहीं मिलता तो ये राज कभी मेरे सामने नहीं आता..और तुम? तुम तो पिछले डेढ़ साल से झूठ बोल रही हो कि, तुमने मुझसे कुछ नहीं छिपाया ! वाह भाई वाह इसी प्याज जैसी कई परतें हैं तुममें..न जाने कौन कौन सी खुलनी बाकी हैं "..

मेरे कटाक्ष से कहीं भीतर तक छलनी हो गयी वो ..

"क्या बताती आपको ...? कि छोटी सी उम्र में कभी आकर्षित हो गयी थी उस पर , हाँ भावुकता में लिखे थे उसे कुछ पत्र .., किंतु उसने उस वक्त मेरी भावनाओं का मजाक उड़ा दिया था और साथ ही मेरे मन के प्रेम को भी..! सच कह रही हूँ ,विनय वो बचपना था मैं अब आपसे प्रेम करती हूँ " सहसा फफक पड़ी सुनिधि

मैं अंदर सुकून से भर गया उसे तड़पते देख, पर कहीं न कहीं दया भी आ गयी अपनी अर्धांगिनी को देख.. प्रेम की ये कौन सी गति थी ..जो हृदयतल की स्वामिनी थी वो इस वक़्त हृदय की आग में जल रही थी..मैं शांत होने लगा उसके आंसू मेरी कमजोरी जो थे..मैं सामान्य हो गया किंतु दिखाता कैसे..? उसके हाथों से प्याज छीना और कहा,लाओ काटने दो मुझे , तुम आंख में आंसू भर कर काटोगी तो हाथ कट जाएगा हमेशा की तरह..!

सुनिधि ने मेरे प्रेम को भांप लिया..हमेशा की तरह..

और मेरे हाथों से प्याज छीन कर बोली इसीलिए कह रही थी मत खोलो अतीत की परतों को..ये अतीत की परतें प्याज की परतों जैसी ही हैं ..परतें खुलेंगी तो आंसू तो बहेंगे ही..!

-कविता जयन्त श्रीवास्तव

प्रयागराज उत्तर प्रदेश

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 118630857977773585

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  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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