नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 241 व 242 // मीरा परिहार, 'मंजरी

प्रविष्टि क्रमांक - 241

मीरा परिहार, 'मंजरी

युद्ध
सीमा पर शहीद हुए शहीदों की पत्नियों ने एक मीटिंग रखी और युद्ध में होने वाले नुकसान और अपने पिता विहीन बच्चों के दुख पर चर्चा की। उन्होंने तय किया कि हम युद्ध नहीं चाहते, वार्ताओं के माध्यम से भी सीमा विवाद हल हो सकते हैं और इस भावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक रैली निकाली। बात मीडिया तक पहुंची, नेताओं अधिकारियों और विदेशों तक पहुंची। बहुत भाषण हुए, संवेदनाएँ प्रेषित की गयीं।
  विदेशी हथियार निर्माताओं को जब यह बात पता चली तो खलबली मच गयी, सभी आपस में कहने लगे कि यदि युद्ध बन्द हो गये तो युवा बेरोजगार हो जायेंगे, हमारे हथियारों की सप्लाई बन्द हो जायेगी और हमारी अर्थव्यवस्था में गिरावट आ जायेगी जिससे राष्ट्र के वर्चस्व को भी धक्का लगेगा। अतः युद्ध अनवरत होते रहना चाहिए।
  इधर सभी देशों के शासक भी सोचने लगे कि यदि युद्ध नहीं होगा तो आयुधों और अन्य उपकरणों पर खर्च कैसे करेंगे और उससे मिलने वाला मोटा कमीशन भी तो नहीं मिलेगा। अतः युद्ध होने में ही सबकी भलाई है।
युद्ध होने देने के लिए सभी एकमत थे, वजह बहुत महान और आदर्शोन्मुख थीं, मसलन देश की आन बान , सम्मान के लिए हम अपना सर्वस्व लुटा  सकते हैं पर सर नहीं झुका सकते, राष्ट्र को खतरे में नहीं डाल सकते। शान्ति और सद्भावना के लिए रैली रखी गयीं, पोस्टर चिपकाए गये, शहीदों के सम्मान में मुशायरे और गोष्ठियाँ आयोजित की गयीं, शान्ति की कामना की गयी। शहीदों की पत्नियों को सम्मानित किया गया। आने बाली पीढ़ी को सेना में जाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

--

प्रविष्टि क्रमांक - 242

मीरा परिहार, 'मंजरी

मौत की वजह
शहर में एक सरकारी बिल्डिंग बनी थी। कल उसका का उद्घाटन था, शहर के नामी लोग उपस्थित थे वहाँ , मुख्यमंत्री, मंत्री, जज, वकील, नेता, अधिकारी, और कर्मचारी आदि। मंच फूल मालाओं से सजा था, पानी की बोतलें रखी थी अतिथियों के लिए । देश के विकास, न्याय व्यवस्था, मानवाधिकार और कानून पर विस्तृत चर्चा और संवाद हो रहे थे। भाषण और आपसी मान सम्मान के आदान-प्रदान के उपरान्त भव्य भोज का भी प्रबन्ध हुआ था सरकारी खजाने से। ग्रीन टी, कोल्ड टी, हॉट टी, काफी और कॉन्टिनेंटल, देशी, पंजाबी, दक्षिण भारतीय, अनगिन भोज्य पदार्थ सजे थे मेजों पर।
   खाने वालों में नजाकत थी। कोई ऑयली कहकर नहीं खा रहा था, कोई हाइजीन को लेकर चिंतित था तो किसी की पहुँच में ही नहीं था क्योंकि जो एक बार वहां पहुंच जाता वह आगे नहीं बढ़ना चाहता था, यह सोचकर कि इतनी मुश्किल से नम्बर आया है, अगर खिसक गए तो पहुंच पाना मुश्किल हो जाएगा। बावजूद
इसके खाना बचा हुआ था बहुतायत में।
   सुबह अखबार में वक्तव्य छपे थे सभी के और एक खबर यह भी थी कि किसी बस्ती में तीन बच्चियों की मौत हो गई। डाक्टरों के अनुसार उनके पेट में अन्न का एक दाना भी नहीं मिला।
  एक हलचल मची है सभी महकमों में। सक्रियता देखते बन रही है। मजिस्ट्रेटीय जांच में मौत का कारण भूख नहीं, डायरिया है। बच्चियों के बाप ने खुद कबूल किया है कि उसने अस्सी रुपये में अपना एक लोहे का बक्सा बेचा था और पकाने के लिए दाल चावल भी खरीद कर लाया था। अधिकारियों ने पता लगाया तो पता चला कि एक बच्ची के अकाउंट में अठारह सौ रुपए भी जमा थे। दो सौ रुपए अपने दोस्त से भी उधार लेकर खाना लाया था बच्चियों का पिता। खाना बनता था उसके घर पर। दवा भी लाया था डायरिया की। मौत का कारण भूख नहीं है, खाली पेट नहीं है।।।।
आज उपवास है हमारा, बच्चियों की मौत के उपलक्ष्य में। नामी गिरामी लोग उपस्थित हैं वहाँ पर।  आखिर संवेदनशील हैं हम भी।
मीरा परिहार


मीरा परिहार, 'मंजरी

1 टिप्पणियाँ

  1. आपकी रचना सराहनीय है आदरणीय महोदय, आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.