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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 249 // गंदा खून // रितु सिन्हा

प्रविष्टि क्रमांक - 249

रितु सिन्हा

गंदा खून

"अरे क्यों इसके पीछे पड़ी रहती है,पता नहीं कहाँ से उठा लायी है, किसका गंदा खून है कौन जाने" माया देवी फिर चिल्ला रही थी,जब से रीमा ने सड़क पर पड़े उस बच्ची को घर लायी था तब से माया देवी रोज रीमा पर चिल्लाती और उस बच्ची को गंदा खून बोलती।
"मां जी ये एक बच्ची है कोई गंदा खून नहीं,क्यों आप इस मासूम को इस तरह बोलती रहती है" रीमा ने फिर बच्ची के पक्ष में कहा।
"गंदा खून न कहूँ तो क्या कहूँ पता नहीं किसका पाप है ये,मां बाप खानदान का कुछ पता ही नहीं है,पैदा कर के सड़क पर फेंक दिया,ऐश मौज किया होगा फिर इस गंदगी को फेंक दिया होगा और तुम इस गंदगी को अपने घर ले आयी।" माया जी मुँह चढ़ा कर बोली।
"बस माँ जी बस कीजिए, ऐश मौज किया या फिर कोई मजबूरी हमें क्या पता,मुझे तो बस इतना पता है कि ये बच्ची देवी माँ का रूप है और आप ही तो कहती है बच्चे में भगवान बसते है तो इस बच्ची में भी देवी माँ होगी न,फिर इस बच्ची से इतनी बैर क्यों??ममता न दिखा सकती तो इंसानियत ही दिख दीजिए।" बच्ची को गोद में लेकर प्यार करते हुए रीमा ने कहा।
फिर पलट कर उसने मायाजी की तरफ देखते हुए कहा "माँ जी जेठ जी भी ने तो कुत्ते को अपने घर पर रखा हुआ है, जो उन्होंने सड़क किनारे से ही उठाया था,किसी गाड़ी ने उस बेचारे कुत्ते को टक्कर मार दी थी,जैसे वो बेजुबान उस वक़्त तकलीफ में था,वैसे ही ये बच्ची भी तो बेजुबान और तकलीफ में थी। उसे तो आप बड़े प्यार से पुचकारते हुए बुलाती है ,"डायमंड" ये नाम भी तो शायद आपने ही दिया था।

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पटना,बिहार।

2 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है, आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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  2. बहुत बेहतरीन

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