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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 251 // छुटकारा // कृष्णा वर्मा

प्रविष्टि क्रमांक - 251


कृष्णा वर्मा

छुटकारा

डेंगू की चपेट में आई मंगला अपनी ीमारी से आखिरी सांस तक लड़ती रही। पर होनी कब टलती है। वही हुआ जिस बात की चिंता मंगला की आँखों में अंतिम पल तक बनी रही। कैसे जिएगी उसकी सात बरस की प्यारी सी गुलबिया उसके बिना। नकारा विश्वा तो पहले से ही घुटनों- घुटनों कर्ज़ में डूबा हुआ था। और आज तो उसकी दुनियाँ ही अँधेरी हो गई। मंगला थी तो दो जून की रोटी नसीब हो रही थी। फूल सी गुलबिया उसे अचानक पहाड़ सी दीखने लगी। बस यही सोच कर वह बेहाल हुआ जाता था कि कुछ ही बरसों में ताड़ सी बढ़ जाएगी। कैसे सम्भालूँगा सब अकेले। इस बोझ से कैसे मुक्ति पाए, इस सोच में दिन-रात वह बेचैन रहता।

एक सुबह हिम्मत जुटा कर उसने कस्सी उठाई, और गुलबिया को साथ लेकर निकल पड़ा जंगल की ओर कि आज इस झंझट से छुटकारा पाकर ही लौटूँगा। चलते-चलते भूखे-प्यासे बाप-बेटी दोनों बहुत थक गए। थकान के मारे विश्वा रास्ते में एक पेड़ के नीचे ढेर हो गया। थकी-टूटी नन्हीं गुलबिया पिता की थकान न देख सकी। और अपने नन्हें-नन्हें हाथों से उसके पाँव दबाने लगी।

थोड़ी देर सुस्ता कर दोनों फिर चल दिए जंगल की ओर। कुछ दूर पहुँच कर घने पेड़ों की आड़ में विश्वा कस्सी से गड्डा खोदने लगा। पिता को हाँफते और पसीने से भीगता देख भोली गुलबिया से रहा ना गया, बोली--लाओ बापू मैं तुम्हारी मदद कर दूँ। तुम बैठ कर थोड़ा आराम कर लो, मैं खोद देती हूँ। और अपने छोटे-छोटे हाथों से पिता के माथे पर छलकता पसीना पोंछने लगी। यह देख कर विश्वा का मन द्रवित हो उठा। उसने कुदाल वहीं फेंक तड़प कर गुलबिया को सीने से सटा लिया और सोचने लगा किस बात की सज़ा देने जा रहा हूँ अपनी फूल सी कोमल बेकसूर बच्ची को। किससे छुटकारा पाना चाहता हूँ मैं? इस शीतल छाँव से।

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1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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