नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 254 व 255 // अमिताभ कुमार "अकेला"

प्रविष्टि क्रमांक - 254

अमिताभ कुमार "अकेला"

घुटन

शॉपिंग मॉल में टीना और जॉन की मुलाकात हो गयी। दोंनों इंजीनियरिंग के समय से एक दूसरे को जानते थे और संयोग से इसी शहर में उनका तबादला हुआ था। एक ही शहर में रहने के कारण मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा और दोनों परिणय सूत्र में बंध गये।

अचानक से टीना के पेट का आकार बढ़ने लगा। जाँच करने पर पता चला कि वह पेट से है।

"मुझे अभी ये बच्चा नहीं चाहिये। अपने कैरियर को मुझे और आगे ले जाना है। " - टीना ने अपनी समस्या बतायी।

आजाद खयालों के जॉन ने भी टीना का साथ दिया और बहुत सारी गोलियाँ लाकर खाने को दी। सारी गोलियाँ बेअसर रहीं और पेट का आकार निरंतर बढ़ता रहा।

असरदार दवाईयों ने अपना दुष्प्रभाव दिखाया और निश्चित समय पर कटे-फटे नाक-कान और आड़े-टेढ़े हाथ-पाँव वाले एबनॉर्मल बच्चे का आगमन हुआ।

"अगले महीने यदि हमें यू एस ए निकलना है तो हमें इससे छुटकारा लेना ही होगा।" - जॉन ने अपनी राय प्रकट की।

नवजात अभी भी माँ को ही देख रहा था। पति की बात समाप्त होते ही टीना ने बच्चे की ओर देखा। टीना की नजर पड़ते ही बच्चे ने हौले से मुस्कुरा दिया। टीना का ममत्व जाग उठा।

"एक पिता होकर तुम ऐसा सोच रहे हो।" - टीना ने असहमति जताते हुए जॉन से प्रश्न किया।

"क्यों, तुम भी तो ऐसा ही चाहती थी। पिता हूँ इसलिये ऐसा सोच रहा हूँ। और फिर ऐसा करने में उसी की भलाई है। ऐसा आड़ा-टेढ़ा जीकर क्या करेगा। यदि तुम्हें मेरे साथ चलना है तो ऐसा करना ही होगा।" - जॉन ने दो टूक शब्दों में अपना फैसला सुना दिया।

"तुम्हें जाना है तो जा सकते हो। मैं एक माँ हूँ और इस घृणित कार्य में मैं तुम्हारा साथ नहीं दे सकती।" - इतना कहने के साथ ही टीना ने अपनी नजरें फेर लीं और उन क्षणों के बारे में सोचने लगी जब उसने गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन किया था। बच्चा अभी भी मुस्कुरा रहा था और टीना घुटन महसूस कर रही थी.........

--

प्रविष्टि क्रमांक - 255

अमिताभ कुमार "अकेला"

छेड़खानी

पूरा एक महीना अस्पताल में बिताने के बाद आज सौभाग्य को वहाँ से छुट्टी दे दी गयी। अपने घर आने के लिए वह बस में जा बैठा। जाड़े का मौसम था और उसने अपने पूरे बदन को एक गर्म कंबल से ढँक रखा था। अभी भी घाव के जख्म पूरी तरह से नहीं भरे थे जिसका दर्द वह अब तक महसूस कर रहा था।

बस खुलने से ठीक थोड़ी देर पूर्व एक मॉडर्न युवती उसमें सवार हुयी। उसने आधुनिक वस्त्र पहन रखे थे, कंधे में पर्स लटक रहा था, बाल खुले थे और आंखों पर काला चश्मा चढ़ा रखा था। निश्चित समय पर गाड़ी खुल गयी और अनुमान के मुताबिक जर्जर सड़क पर हिचकोले खाते हुये चलने लगी। सौभाग्य ने अपनी पीड़ा कम करने के लिए अपनी पूरी नजर उस युवती पर टिका दी। सौभाग्य अवाक रह गया - वह मॉडर्न सी दिखने वाली युवती किसी यात्री के पॉकेट से पर्स उड़ा रही थी। उस युवती ने भी भांप लिया कि सौभाग्य ने उसे ऐसा करते देख लिया है।

अचानक से युवती सौभाग्य के पास आयी और उसे धकियाते हुये बुरा-भला कहने लगी। क्या तुम्हारे घर में माँ-बहन नहीं है जो मेरे उभारों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हो.....? सौभाग्य के आसपास तुरंत भीड़ इकट्ठी हो गई। फिर शुरू हुआ लात-घूसों का दौड़......। बुरी तरह पीटने के बाद उसे उठाकर बस से नीचे फेंक दिया गया और बस आगे बढ़ती चली गयी......।

युवती खुश थी कि आज उसका भांडा फूटने से बच गया। सभी यात्री खुश थे कि अकेली बेसहारा लड़की को छेड़ने वाले एक मनचले को आज उन्होंने अच्छा सबक सिखाया। किन्तु किसी को इतनी भी फुर्सत नहीं थी कि जाकर सौभाग्य को सहारा दे। सौभाग्य एक अजीब सी पीड़ा से भर उठा। उसने अपनी दोनों बाँह के पास काफी तेज दर्द महसूस किया। वह जिसने एक माह पूर्व एक गंभीर दुर्घटना का शिकार होते हुए अपने दोनों हाथ गंवा दिये - किसी के साथ छेड़खानी कर सकता है क्या.....? परंतु किसे फुर्सत थी कि इन जलते प्रश्नों का उत्तर खोज सके। आपके पास इसका उत्तर है क्या.......

--
जलालपुर, मोहनपुर, समस्तीपुर

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.