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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 271 // खाप पंचायत और उर्वि // बबिता अग्रवाल कँवल

प्रविष्टि क्रमांक - 271

बबिता अग्रवाल कँवल

खाप पंचायत और उर्वि

उर्वि!उर्वि ! कहां मर गई ये मरजानी.. कुछ होश भी ना हैं ... ससुराल वाले तो पीछे पड़ रखें है, आज खाप पंचायत में भी जाना है और या सुबह से ही ना दिख रहीं....।

       ओ जी सुनो, "जरा उर्वि को देख आओ" कहीं कुछ नहीं कर दिया हो, उसके ससुराल वालों ने, जीना हराम कर रखा है .... जब से छोरी ने बाल विवाह मानने से मना कर दिया....!"

आज गाँव में काफी हलचल थी, उर्वि ने बाल विवाह मानने से मना कर दिया था ,खाप पंचायत की बैठक में सभी को बुलाया गया था और उर्वि का कहीं पता नहीं था।

              पंचायत बैठी, उर्वि के परिवार वाले के खिलाफ हुक्का-पानी बंद कराने का फैसला लिया ही जा रहा था कि उर्वि हाजिर हो गई, कानूनी कागजात के साथ अपनी जीत दर्ज करा लाई थी।

       जब वो आठ माह की थी, उसका बाल-विवाह करा दिया गया था, बालिग होने पर उसने अपनी बचपन की शादी को अस्वीकार कर दिया और हर मुश्किल का सामना करते हुए आज उसने कानूनन अपनी लड़ाई जीत ली और खाप पंचायत समिति अपनी हार पर तिलमिला कर रह गई।

बबिता अग्रवाल कँवल

सिल्लीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

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