नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 359 व 360 // नंदा पाण्डेय

प्रविष्टि क्रमांक - 359


नंदा पाण्डेय

तबादला


'सुबह अखबार पढ़ते ही रवि का माथा ठनका अरे, ये क्या मेरा तबादला यहां से इतनी दूर!

घर में बीमार बाबूजी, मां और छोटे-छोटे बच्चे ...कैसे क्या होगा । फिर कुछ सोचकर बिना नाश्ता किये चल दिया बड़े-साहब के घर।


नमस्ते सर, हाँ नमस्ते कहिए!

सर,ऑफिस में भीड़-भाड़ के कारण आपसे बात नहीं हो पाएगी। इसलिए यहां चला आया।

"हाँ-हाँ, बोलिये न! क्या बात है ?

सर वो ऐसा है कि मैं अपने घर में अकेला हूं। घर में बूढ़े पिताजी मां और दो छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। मेरा तबादला दूसरे जिले में कर दिया गया है। मुझे इसी जिले में कहीं एडजस्ट कर दें, तो मेरे लिए ठीक होगा।

"देखिए ये बातें यहां नहीं कीजिये। ऑफिस में मिलिए जो होगा वहीं होगा। कहते हुए बड़े-साहब उठकर जाने लगे।

'अच्छा सर, इस लिफाफे को स्वीकार करें, छोटी सी भेंट है, बच्चों के लिए। मैं आपसे ऑफिस में मिल लूंगा, कहते हुए रवि ने बंद लिफाफे को टेबल पर रख दिया।

अरे! इसकी क्या जरूरत थी।

कहिए किस जगह जाना चाहते हैं? अपनी च्वाइस लिखकर दे दीजिए। कल दूसरी लिस्ट निकलेगी उसे देख लीजिएगा।

"जी सर,।" और झट से एक पर्ची पर अपनी च्वाइस लिखकर बड़े साहब को पकड़ाते हुए वहां से चल दिया।

अगली सुबह अखबार में मन मुताबिक तबादले की खबर थी।

---

प्रविष्टि क्रमांक - 360

नंदा पाण्डेय


ऊपर की कमाई


बहन जी, सुमि को देखने लड़के वाले आये थे, न! क्या हुआ..? सुमि की मम्मी से उनकी पड़ोसन ने पूछा।

हां बहन जी,उन्हें सुमि पसंद आ गई। लेकिन.....।

हमलोगों ने मना कर दिया।

पर क्यों बहन जी? लड़का ठीक नहीं था....या घरवाले...।

अरे नहीं- नहीं सब ठीक था । लड़का तो बहुत ही सुंदर और स्मार्ट था।

फिर.......?

लड़का वकील था और उसकी प्रेक्टिस भी नई- नई थी।

वैसे एक दूसरा लड़का हमलोगों ने पसंद कर लिया है।

अच्छा! वो क्या करता है .....और कैसा है बहन जी।

वो उतना सुंदर तो नहीं है पर ठीक-ठाक है, और कचहरी में क्लर्क है। टेबल के ऊपर की कमाई रोजाना पांच सौ रुपये है और क्या चाहिए?

सुमि की माँ ने बड़ी प्रसन्नता और गर्व से कहा।

---

नंदा पाण्डेय

पता- फ्लैट नंबर 2बी, सूरज अपार्टमेंट हरिहर सिंह रोड मोरहाबादी रांची झारखंड

पिन- 834008

nandapandey002@gmail.com

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.