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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 366 // परिवर्तन // सीमा निगम

प्रविष्टि क्रमांक - 366

सीमा निगम

परिवर्तन

सुबह होने को आयी पर रमादेवी को रात भर नींद नहीं आई जब से घर में बहू आई है धीरे-धीरे परिस्थितियों में अंतर आ गया जिस घर में बरसों राज किया वही अब परायेपन का एहसास होने लगा। कल सुबह ही जब बहू को बिना स्नान किये किचन में खाना पकाते देखी तो मुझसे रहा नहीं गया उसे जोर से चिल्ला पड़ी - ‘‘बहू तुमसे कितनी बार कहा है बिना नहाए खाना मत बनाया करो पर तुम मानती नहीं हो , उसी समय कमरे से निकलते बेटे ने जब यह सुना तो बोल पडा -‘मम्मी आप हमेशा रुचि के काम में मीन मेख निकालती रहती हो अब आप धर - गृहस्थी के झमेले से दूर रहा कीजिए ।”

उस वक्त तो रमादेवी ने बेटे से कुछ नहीं कहा बाहर लान में आकर बैठ गई अैर सोचने लगी -” वक्त के साथ सबकुछ बदल जाता है कितनी मेहनत से उसने गृहस्थी बनाई है लेकिन अब उस पर ही उसका अधिकार नहीं है , रमादेवी को इस तरह देख कर उनके पतिदेव समझ गए कि माजरा क्या है ,पास आकर उसे समझाने लगे -‘‘तुमसे पहले भी कई बार कह चुका हुँ बहू को ज्यादा रोकना टोकना ठीक नहीं है आज जमाना बदल चुका है बहुँए स्वतंत्र रहना चाहती है जैसा सहूलियत उसे काम करने दिया करो ,जो कमाता है उसी का घर में राज चलता है ,यही दुनियादारी है मैं भी रिटायर्ड होने के बाद आराम से हूँ, बेटे - बहू को रोका टोकी करेंगें तो उन्हे अच्छा नहीं लगेगा, घर का माहौल खराब होगा सो अलग । पहली बार रमादेवी अपने पतिदेव की बात ध्यान से सुन रही थी । उनकी बातों में उसे सार दिखाई दे रहा था, दिनभर सोचती रही इसी उधेड़बुन रात भर उसे नींद नहीं आई । अब उसे समय के अनुरूप ढलना होगा । घर गृहस्थी से निश्चिंत होकर पूजा .पाठ में मन लगाना होगा, बहू को रोक टोक नहीं करूँगी, न ही किसी से शिकवा शिकायत करूँगी अपनी जिंदगी अब उनके हिसाब से जियूंगी शाम को कई दिनों के बाद रामायण मंडली में गई, जब घर लौटी तो सूर्यास्त हो चुका था उसके घर के आँगन में तुलसी का पौधा था जिसमें रोज शाम को वह दिया जलाया करती थी । जब वह गेट खोलकर अंदर दाखिल हुई तो बहू दिया जलाने की कोशिश कर रही थी, पर दिया में तेल अधिक था और बत्ती उसमें डूब गई थी इसलिए जल नहीं पा रहा था, जब रमादेवी ने देखा कि बहू इतनी मामूली काम को नहीं कर पा रहे पर उसपर झुंझलाने के बजाय धीरे से बोली...“बहु पहले दिया का तेल कम करो फिर बत्ती जलाओ ” और झट से अंदर चली गई हाथ मुँह धोने। बहू रमादेवी के स्वभाव में अचानक परिवर्तन देखकर आश्चर्यचकित रह गई ।

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सीमा निगम

डाल्फिन प्रिमियम प्लाजा

फ्लैट नंबर 302 ब्लाक -बी

दलदल सिवनी गुरूद्वारा के सामने

मोवा रायपुर छ0ग0

email-seemanigam.25972@gmail.com

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