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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 367 // बंद // शिल्पी कुमारी

प्रविष्टि क्रमांक - 367


बंद

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शिल्पी कुमारी

फूलपुर गांव का नारायण अपने खेत की सब्जियों को शहर ला कर बेचता और बूढ़े माता पिता तथा घरवाली का भरणपोषण करता। आज वह लौकी और तरोई लेकर रोजाना की तरह घर से निकला। अभी इन सब्जियों के दाम भी अच्छे मिल रहे थे।

नारायण ने चौराहे पर आकर टोकरे रखे और बोहनी की बाट जोहने लगा। एक जुलूस चौराहे से गुजर रहा था। चार पांच लट्ठधारी आये और वहां बैठे लोगों की सब्जियां आदि तोड़ गये।

घबराया हुआ नारायण लट्ठ से आई चोट को अपने हाथ से दबोच कर क्षत विक्षत टोकरे को देखने लगा। बंद की वजह से आज कमाई की जगह हुई बरबादी उसकी आंखों में रुलाई ले आई। आज उसे मां के लिये दवाइयां भी ले जानी थी। वह मंद गति से बंद के खौफ से घबराया अपने गांव की तरफ बढ़ने लगा।

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शिल्पी कुमारी

जी-53, हाऊसिंग बोर्ड कोलोनी,

हिरण मगरी,सेक्टर-14,

उदयपुर (राज.) 313001

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