रचनाएँ खोजकर पढ़ें

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -


विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) - भाग 3 : यशवंत कोठारी

साझा करें:

भाग 1 /  भाग - 2 / संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) यशवंत कोठारी भाग 3 -   संस्थान का अधूरा राउंड यह संस्थान इस महानगर के अंतिम छोर पर एक...

भाग 1भाग - 2 /

संस्थानोपनिषद

(व्यंग्य –उपन्यास )

यशवंत कोठारी


भाग 3 -  

संस्थान का अधूरा राउंड

यह संस्थान इस महानगर के अंतिम छोर पर एक पुराने किले में बना हुआ है. पुराने कर्मचारी बताते हैं की पहले यहाँ पर राजाओं के घोड़े, हाथी आदि बंधते थे. आज़ादी के बाद जब सरकारों ने ये किले महल ले लिए तो उपयोग करने के नाम पर कोई न कोई संस्थान खोलने का कर्म कांड होने लगा. इसी क्रम में केंद्र ने यह संस्थान खोला था. वैसे बाहरी दुनिया में इस सन्सथा की बड़ी इज्जत थी यहाँ पर प्रवेश नौकरी की गारंटी होता है. इसके अलावा यहाँ पर घुसने के बाद छात्र या छात्रा कुछ बन कर ही निकलता था. प्रवेश में बडी मारामारी थी मगर मेरिट के नाम से सब चलता था.

परिसर राजा के महल की तरह लम्बा चौडा था. एक सिरे पर मंदिर था. दूसरे कोने पर यू. जी. होस्टल, तीसरे कोने पर कन्या छात्रावास जिसमें युवतियां रहती थी. परिसर के एक अँधेरे कोने में लव पॉइंट था, जहाँ लड़के लड़कियां चूमा- चाटी कर मन बहलाते थे, बाद में परिसर के पास में बने एक होटल पर भी यदा कदा कृपा कर दी जाती थी. होस्टल का एक कोना बदनाम भी था इसे सुसाइड पॉइंट कहते थे. परिसर में रात्रि चर्या के माकूल इंतजाम थे. बीच की जगह में प्रशासनिक खंड, बैंक, बड़ा सा आडीटोरियम, लेक्चर थियेटर भी थे, मगर अधिकांश शिक्षक अपने चैम्बर में बैठ कर ही पी.जी. की क्लास लेने का नाटक पूरा कर देते थे. यू. जी. की क्लास में पीजी छात्र को भेज कर खाना पूर्ति कर दी जाती थी. डिप्लोमा आदि की क्लास की नोटंकी भी चलती रहती थी क्योंकि इस क्लास के पैसे वेतन के अलावा मिलते थे. परिसर में लॉन थे, कई पुराने पैड थे. कुछ पुराने क्वार्टर भी थे, मगर एक रात को इन पुराने मकानों का मलबा एक छोटे अफसर के मकान में काम में आ गया, किसी को पता भी नहीं चला. आज तक इस मलबे की खोज जारी है.

परिसर के चारों तरफ रास्ते थे, कोई कभी भी कहीं से भी प्रवेश कर सकता था वापस भी जा सकता था. सरकार की बायोमेट्रिक हाजरी का कोई असर नहीं था. आउट डोर व् इनडोर भी थे. सरकार के कागजों में यहाँ पर पांच सो बेड थे, मगर वास्तव में इनडोर खा ली ही पड़ा रहता था. कभी दिल्ली से या काउन्सिल का शैक्षणिक निरीक्षण होता तो आस पास के मंदिरों से बीमार, बूढ़े, ला चर अपाहिज भिखारी लोगों को लाकर इनडोर का कोटा पूरा किया जाता था. मान्यता के लिए जो निरीक्षण होते थे उन को संभालने- करने के लिए एक पूरी टीम अलग से का म करती थी. संस्थान मे हरियाली थी, स्टाफ था, वेतन भत्ते थे. प्रोजेक्ट थे. बा हरी दुनिया में इज्जत थी, मगर इस छोटे संस्थान में राजनीति बड़ी थी कब निदेशक का तख्ता पलट हो जाये, कब दिल्ली की सरकार किसी अन्य को चार्ज दे दे किसी को कोई पता नहीं रहता था. मगर ऊपरी शांति, ट्रांसफर नहीं हो सकता था इसलिए एक जमीनी भाई चारा था. तू भी खा मुझे भी खाने दे. बा हर दुकानें थी जो स्टाफ के सदस्यों के परिजनों की थी इस कारण सब एक दूसरे के हितों की रक्षा करते थे.

परिसर काफी बड़ा था, सरकार का लोक निर्माण विभाग इसकी देख रेख करता था. बजट के लिए हर फूल दिल्ली मुखी था. दिल्ली किसी को निराश नहीं करती थी, बस हर का म की कीमत लेती थी.

इसी शानदार संस्थान के राउंड पर डायरेक्टर सर, अपने अमले के साथ निकल पड़े है. अमले में प्रशासनिक अधिकारी, पि ए, संपदा अधिकारी, एक दो विभागाध्यक्ष, एक दो चतुर्थ श्रेणी अधिकारी, यूनियन के नेता शामिल हैं, जहाँ से भी यह लवाजमा गुजरता, तीज की सवारी की छटा देता था. लोगों को गणगौर व् तीज की सवारी की या द् आती थी. आगे आगे निशान के हाथी की तरह पी ए और उसके पीछे सवारी. कुछ के हाथ में नोट बुक भी थी साहब का हुक्म हो तो तुरंत लिख ले. मगर साहब इतने मूर्ख न थे वे अभी अभी दिल्ली से डाट फटकार खा कर आये थे. हिसाब बराबर करना था. संस्थान का राउंड एक आवश्यक कर्म कांड की तरह सम्पन्न होता था.

सबसे पहला शिकार सफाई व्यवस्था का मामला था. कूड़े के ढेर देख कर डायरेक्टर को डायरेक्टरी चढ़ गई, मन में सोचा मैं भी झाड़ू हाथ में लेकर फोटो खिंचवा लूँ, मगर तुरंत समझ में आ गया की लोग बेवकूफ समझेंगे, ये तो मंत्रियों के चोचले हैं, यह समझ में आते ही वो दहाड़े

-सफाई क्यों नहीं हुई?

सर सफाई का काम ठेके पर दिया था.

तो?

ठेकेदार भाग गया

अपना स्टाफ क्या करता है? बड़ी अजीब बात है अपना स्टाफ हजारों रूपये वेतन लेता है और का म नहीं करता, यहीं स्टाफ बाद में ठेकेदार के पास कम पैसे में पूरा काम करता है. क्यों भाई? क्यों

साथ के चमचों ने चुप रहने में ही भलाई समझी.

मुझे कल तक पूरा परिसर साफ सुथरा चाहिए. पि ए सब नोट करो.

जी सर.

और देखो कचरे का निस्तारण भी नियमों के अनुसार ही होना चाहिए, नहीं तो ये पर्यावरण वाले एन जी ओ वाले गर्दन पकड़ते देर नहीं करते.

जी सर.

समवेत स्वर में कोरस गूंजा. सब समझ गए सर का मूड ऑफ़ हो गया है. अब कुछ न कुछ जरूर होगा.

पूरा अमला विभागों की और मुड गया. पहला विभाग विपक्ष के रूप में कुख्यात सक्सेना जी का था. सक्सेना जी नियम से अपना क्लिनिक बंद कर के एक बजे बाद आते थे, यह बात निदेशक को पता थी इसी कारण वे यहाँ इस समय आ गये थे ताकि कोई कुकर भुसायी नहीं हो, वैसे भी विभाग में सब का म काज ठीक था. फिर भी वे पूछ बैठे

-सक्सेना क्लिनिक से नहीं आया उसकी क्लास कब है, हाजरी रजिस्टर लाओ, इतने प्रश्नों के बाद नव नियुक्त बंधुआ अध्यापक का हार्ट फेल होने की पूरी सम्भावना थी सो मोर्चा महिला तकनीशियन पार्वती बाई ने संभाला

-डायरेक्टर सर, हेड सर नियमित समय से आ जाते हैं.

क्लास भी लेते हैं.

मगर यह सब तुम क्यों बता रही हों उसे बोलना समय पर आये, मुझ से चैम्बर में मिले, वे जानते थे पार्वती बाई के मुंह लगने पर मुंह की खानी पड सकती है, पार्वती बाई का इतिहास व् भूगोल बड़ा ख़राब था. एक पूर्व मंत्री की कृपा द्रष्टि के कारण वे यहाँ जमी हुई थी. कोई माई का लाल पार्वती बाई को कमरा नम्बर तीन से चार में स्थानान्तरित करने की हिम्मत नहीं रखता था. संस्थान इकलौता था, अन्य शहर भेजने का तो सवाल ही नहीं उठता था.

निदेशक ने पी ए से कहा

-नोट करो सक्स्सेना जी नहीं मिले. उनको मेमो दो. बायो मेट्रिक हाजरी शुरू करो.

-मेमो पर कौन साइन करेगा सर?

प्रशासनिक अधिकारी ने पूछा

तुम कर देना.

सर मुझे क्यों मरवाते हो, आप तो दो साल रहेंगे वो तो बाद में दस साल तक छाती पर मूंग  दलेंगे. हो सकता है डायरेक्टर बन जाये.

सर कच्ची नौकरी में पक्की रिस्क नहीं लेनी चाहिए –चमचा उवाच

इस तरह डरने से प्रशासन नहीं चलता शर्माजी. बनाओ मेमो मैं दस्तखत कर दूंगा.

जी सर. अधिकारी ने अपनी बला टलती देख कर राहत की साँस ली.

लवाजमा भाषा विभाग की और बढा, इस विभाग के पास केवल एक काम था राजभाषा दिवस, अधिकारी को फालतू समझ उनसे कोई भी काम लेने कि स्थायी परम्परा थी अनुवाद एक नियमित काम था. कक्ष में निदेशक के घुसते ही राजभाषा विभाग को ओक्सिजन मिल गयी. अधिकारी ने आंकड़ों का ऐसा माया जाल फैलाया की निदेशक एंड कम्पनी चारों खाने चित्त हो गयी. मौका मुनासिब देख कर अधिकारी ने एयर कंडीशनर की मांग रख दी, जिसे लेखा अधिकारी ने ही यह कह कर टर्न डाउन कर दिया की आपकी वेतन श्रंखला में ए सी नहीं मिल सकता है. राजभाषा अधिकारी ने प्रति प्रश्न दाग दिया

-आपके कैसे लगा? आपकी वेतन श्रंखला तो मेरे से भी कम है, निदेशक समझ गए मामला पटरी से उतरने वाला है सो तुरंत पुस्तकालय की और बढ़ गए. पुस्तकालय पुराना था, ढेरों किताबें थी, जर्नल्स थे, पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियाँ थी, मगर पाठक नहीं थे, खा ली पड़ा वाचनालय पूरी व्यवस्था का मुंह चिढ़ा रहा था. निदेशक अंदर बने बाथरूम को देखने घुस गए, अंदर से पारदर्शी प्रशासन स्पष्ट दिख रहा था. झाले लगे हुए थे, पॉट गंदे पड़े थे, पानी नहीं आ रहा था. नैपकिन इधर उधर बिखरे पड़े थे.

निदेशक चिल्ला ये-ये सब क्या है?

सफाई वाले नहीं आते सर क्या करे.

आप लिख कर दीजिये.

उससे क्या हो जायगा –एक मुंहफट बोल पड़ा. यहाँ ही नहीं पूरे संस्थान के टॉयलेट्स का यहीं हाल है.

निदेशक उवाच -

पी ए नोट करो मेमो बनाओ. नहीं माने तो ससपेंड कर दो

सर सस्पेंड करने की पॉवर आपको नहीं है,

पॉवर क्या होती है? तुम कागज लाओ मंन्त्रालय को मैं जवाब दे दूंगा.

कोई कुछ नहीं बोला. बारात आगे खिसकी, भवानी की कृपा हुई, तभी एक बाबु दौड़ता हुआ आया और प्रशासनिक अधिकारी से कुछ कहा, अधिकारी ने निदेशक को बताया

सर मंत्रालय से फेक्स आया है –संसदीय लोक लेखा समिति की विजिट फिक्स हो गयी है. जानकारी मिलते ही पूरी टीम कक्ष नंबर एक में आ गई. निदेशक ने फेक्स को दो तीन बार पढ़ा. पानी पिया, अपना रक्तचाप ठीक किया और बोल पड़े.

वहां दिल्ली में क्या समस्या है जो समिति यहाँ आ रही है?

कोई कुछ नहीं बोला.

पिछले बरस भी तो कमेटी आई थी.

सर वो राज भाषा कमेटी थी. इस बार वाली कमेटी ज्यादा पावरफुल है, बजट, ग्रांट व् अनियमितताओं की जाँच यहीं कमेटी करती है.

ठीक है ठीक है, यहाँ कोई घपला नहीं है, यह तो पीड़ित मानवता की सेवा शिक्षा व् प्रबंधन का मंदिर है, यहाँ काहे की अनियमितता?

ठीक है विभागाध्यक्षों का उपवेशन आहूत करो, सभी अधिकारियों को भी मीटिंग में बुला लेना. कल ग्यारह बजे.

यह कह कर निदेशक ने सामान्य कामकाज शुरू किया. तभी डीन अकेडमिक ने प्रवेश किया व्, बोला

सर सुना है कमेटी आ रही है.

हाँ आ रही है, तुम अपने कागज –पत्र ठीक कर लो नहीं तो हो सकता है बलि का बकरा तुम को ही बना दिया जाये, वैसे भी पिछली प्रवेश परीक्षा में तुम सब मॉल अकेले ही डकार गए थे.

नहीं सर, सब को बाँटने के बाद बचा खुचा मेरे हिस्से में आया था.

मुझे सब पता है, ऑडिट वाले मेमो बना कर ले गए थे.

डीन का सर नीचे हो गया, वो चुपचाप चलते बने. निदेशक के चेहरे पर कुटिल मुस्कान तैर गई. मन में बोले -

साले, सबके सब चोर, बेईमान उठाई गिरे. दिखायेंगे ऐसे  जैसे सत्यवादी हरीश चन्द्र की औलाद हो.

लेकिन मेरा का म सबको बचाना है, इसीलिए बैठा हूँ यहाँ पर. बेटी की डिग्री हो जाये, बहु की डाक्टरेट बस फिर सब छोड़ छाड़ कर गंगा जी चला जाऊंगा, लेकिन तब तक?

उन्होंने शीतल जल का सेवन किया, और अपना माथा फाइलों के महा समुद्र में डुबो दिया.

मीटिंग का आयोजन -

जैसा की सरकार में नियम है किसी भी महत्वपूर्ण काम के लिए मीटिंग बुला ली जाती है. अब तक यह अफवाह या समाचार जो भी आप कहना चाहे संस्थान के पेड़ों पर बैठी चिड़ियाओं को भी मालूम हो गया था की संस्थान में संसदीय लोकलेखा समिति आ रही हैं. इस के अध्यक्ष भू त पूर्व वित्त मंत्री है तथा कई अन्य संसद सदस्य भी आ रहे हैं. सब से बड़ी समस्या आने वाली कमेटी के आवास, भोजन, यातायात व् प्रोटोकोल की थी. महिला सांसदों की भी व्यवस्था की जानी थी. समिति के अध्यक्ष याने पूर्व वित्त मंत्री को ज्यादा तव्वजो दी जानी थी, उनके नाराज़ हो जाने पर किसी के भी उपर गाज गिर सकती थी. माहौल तनाव पूर्ण मगर निदेशक के कंट्रोल में था. सभी विभाग के अध्यक्ष तथा अधिकारी पहली रो में विराजमान थे. साइड में निदेशक के पी ऐ, बाबू थे. चपरासी मुस्तैद खड़े थे.

निदेशक उवाच-संसद की लोक लेखा समिति दौरे पर आ रही हैं, अपने अपने विभागों को सुसज्जित करे. डिप्टी साहब आप नयी वार्षिक रिपोर्ट छपवाले, उसी में ऑडिट रिपोर्ट भी हो.

-लेकिन सर डिप्टी बीच में बोल पड़े –पिछला भुगतान नहीं होने से प्रेस वाले ने कुछ भी छापने से मना कर दिया है.

पिछला भुगतान क्यों नहीं हुआ? निदेशक के इस प्रश्न का जवाब लेखाधिकारी ने दिया –सर, फ़ाइल् पर ऑडिट ने पेरा बना दिया था सो भुगतान रोकना पड़ा.

लेकिन यह का म तो अर्जेंट है, होना ही हैं.

सर आप चिंता न करे, हम को ई रास्ता निकाल लेंगे. -एक अन्य अधिकारी बोल पड़े.

क्या रास्ता होगा? निदेशक ने पूछा.

सर एकल टेंडर ले लेंगे, थोडा खर्च ज्यादा होगा, सब हो जायगा सर. -लेखाधिकारी बोल पड़े.

शर्माजी आप वार्षिक रिपोर्ट व् ऑडिट रिपोर्ट को तैयार कर छपवाने की व्यवस्था देखो, कागज़ बढ़िया लो, कवर शानदार हो. समिति देख कर ही खुश हो जा ये. -निदेशक ने निर्णय दिया.

प्रोटोकोल के लिए श्री मति राघवन समिति के अध्यक्ष के लिए प्रोटोकोल अफसर रहेंगी.

सर ! मुझे किसी महिला सांसद के साथ रख दे.

नहीं यह संभव नहीं है.

सर पिछली बार भी मुझे बड़ी परेशानी आई थी.

-ये वैसे नहीं हैं

-आप को क्या पता?

बाकी के सदस्यों के लिए कनिष्ठ अध्यापक लगाये जायंगे, जिसकी सूची आपको यथा समय मिल जायगी. आवास व भोजन तथा भ्रमण आदि की व्यवस्था प्रशासन से जुड़े लोग करेंगे.

इस काम के लिए जिन्हें अग्रिम राशि की आवश्यकता हो वे नोट प्रस्तुत करे. हर का म शालीनता के साथ हो, संस्थान की प्रतिष्ठा का प्रश्न है, किसी भी प्रकार की कोताही का परिणाम निलम्बन या बर्खास्तगी हो सकता है.

-चलिए साहब चाय मंगवाइये.

माहौल को कुछ हल्का फुल्का करते हुए निदेशक बोले.

चाय के बाद निदेशक अपनी स्टाफ कार में सायंकालीन आचमन के लिए चले गए.

अध्यापक अपने अपने विभाग में जाकर गपशप करने लगे.

०००००००००

-----****-----

|दिलचस्प रचनाएँ:_$type=blogging$count=5$src=random$page=1$va=0$au=0$meta=0

|समग्र रचनाओं की सूची:_$type=list$count=8$page=1$va=1$au=0$meta=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) - भाग 3 : यशवंत कोठारी
संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) - भाग 3 : यशवंत कोठारी
https://lh3.googleusercontent.com/-3lmKcMVBR1Q/WL6TGVzUZXI/AAAAAAAA3O0/SmiW4Qh-xyY/image_thumb%25255B4%25255D.png?imgmax=200
https://lh3.googleusercontent.com/-3lmKcMVBR1Q/WL6TGVzUZXI/AAAAAAAA3O0/SmiW4Qh-xyY/s72-c/image_thumb%25255B4%25255D.png?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2020/02/3.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2020/02/3.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ