सोमवार, 7 नवंबर 2011

कैस जौनपुरी का धारावाहिक - आओ कहें... दिल की बात : किश्त 7 - पति-पत्नी का झगड़ा

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आओ कहें...दिल की बात

कैस जौनपुरी

पति-पत्नि का झगड़ा

( पति-पत्नी का आपस में झगड़ा हुआ...)

पति - तुम्हारे पास तो समय ही नहीं है... हमेशा बाहर घूमना है... ये करना है... वो करना है... हमेशा भागती रहती हो और थक जाती हो... और साथ ही साथ तुम्हें ऐशो-आराम की जिन्दगी भी चाहिए...

मुझे तुम्हारे और भूमि के साथ और ज्यादा वक्त बिताना चाहिए मगर मुझे तुमसे अपने बिजनेस में किसी भी तरह की मदद की उम्मीद नहीं करनी चाहिए... तुम्हें मुझे हर काम में सिर्फ सलाह देना आता है कि मुझे ये करना चाहिए... मुझे ये नहीं करना चाहिए...

तुम हमेशा चिन्ता करती रहती हो कि भूमि को ये नहीं खाना चाहिए, भूमि को ये नहीं करना चाहिए और हमेशा माहौल खराब करके रख देती हो... हमेशा हर बात के लिए बहस करती रहती हो... इन सब बातों के बावुजूद तुम चाहती हो कि मैं हमेशा एक अच्छा पति बन के रहूँ...

कान खोल के सुन लो... मैं अब ये सब बर्दाश्त नहीं करूँगा... मैं तुम्हें याद दिलाना चाहता हूँ कि तुम्हारे पास ये आखिरी मौका है... खुद को बदल सकती हो तो बदल लो... इसके बाद तुम्हें सुधारने के लिए मैं कोई कदम नहीं उठाऊंगा...

क्या तुम्हें ये समझ में आता है...? मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि तुम मेरे और मेरे परिवार के लिए कुछ अच्छा नहीं करती हो.... लेकिन ये सारी बातें तुम्हारी सारी अच्छाइयों पे पानी फेर देती हैं....

पत्नी - सबसे पहले मैं ये कहना चाहती हूँ कि मैं आपके साथ कोई बहस नहीं कर रही हूँ... और मैं आपसे नाराज भी नहीं हूँ... आपने जो कुछ भी कहा है वो मेरे बारे में आपकी राय है... मैं वो कह रही हूँ जो मेरे दिमाग में है... मेरी बात सुनने के बाद पता नहीं आप क्या कहोगे...

मैं आपके खिलाफ नहीं हूँ... हम बहुत झगड़ा करते हैं... आपने मुझे थप्पड़ मारा... मैंने कहा... मैं आत्महत्या करने जा रही हूँ... आपने मुझसे तलाक माँगा.... और पता नहीं क्या-क्या...

क्या आपको लगता है ये सब सही हो रहा है...? बहुत सोचने समझने के बाद मैंने खुद को समझाया... मैंने सोचा... आप मेरे लिए अपना प्यार नहीं दिखाते हैं... आप आके मुझे गले नहीं लगाते हैं... आप मुझे दूसरों के सामने डाँट देते हैं...

अगर यही सब मैं भी आपके साथ करने लगी तो क्या फायदा...? हम अपनी ही जिन्दगी बर्बाद करेंगे... और जो लोग हमें लड़ते हुए देखते हैं भला वो क्या सोचते होंगे हमारे बारे में...?

और रही बात भूमि की तो हमेशा मैं उसके साथ रहती हूँ इसलिए मुझे पता है कि अगर उसे कुछ हो गया तो उसे कितनी तकलीफ झेलनी पड़ेगी... इसलिए परेशान रहती हूँ... माँ हूँ ना...

और क्या मैंने कभी कहा कि मुझे ऐशो-आराम की जिन्दगी चाहिए...? नहीं...! कभी नहीं...! आपने कहा कि इनोवा खरीदेंगे... बड़ा सा फ्लैट खरीदेंगे मेरे लिए...

हाँ... मैंने हमेशा कहा कि मेरे लिए एक टू व्हीलर ले लो... वो आपने नहीं लिया... मैंने सोचा, ठीक है... आप नहीं खरीदना चाहते होंगे...

हमेशा बिजी इसलिए रहती हूँ क्यूंकि मुझे समय नहीं मिलता है... घर का और बाहर का सारा काम करने के लिए... और मेरी सेहत भी इतनी अच्छी नहीं है कि सब काम फटाफट करके आराम से बैठूं...

और जब मैंने आपके बिजनेस में मदद करनी चाही और बिजनेस दिया भी... तब अपने मेरी मदद को उतनी अहमियत नहीं दी और आपने चार दिन लगा दिए वो काम करने में...

मैंने आपसे कहा है कि मैं भी आपके बिजनेस में मदद करना चाहती हूँ लेकिन उससे पहले मेरी कुछ जिम्मेदारियाँ हैं... भूमि के लिए... आपके लिए... अपने घर के लिए... और मुझे अपनी सेहत का भी खयाल रखना पड़ता है...

मैं कोई सफाई नहीं देना चाहती हूँ... और मैं आपके साथ कोई बहस भी नहीं करना चाहती... मैं सिर्फ एक जिन्दगी जीना चाहती हूँ... भूमि और आपके साथ...और कुछ नहीं... मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ... शायद आप समझ सको...

पति - तुम्हारा रवैया दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है.. खुद को बदलने की कोशिश में मैं अटक के रह गया हूँ... इतना याद रखो... मुझसे हमेशा ये उम्मीद मत रखो कि तुमसे हर बात कहूँ तभी मुझे कोई हल मिलेगा... अभी भी जिन्दगी के बहुत से हिस्सों में मैं बहुत अच्छा कर रहा हूँ... सिर्फ हमारा रिश्ता ही ठीक नहीं चल रहा है... वो भी तब तक ही जब तक तुम अपनी जिम्मेदारी नहीं समझती...

मैं तुम्हें कुछ बातें बता देना चाहता हूँ और ये भी चाहता हूँ तुम इन बातों पे गौर करो... जैसे...

...तुम ये क्यूँ कहती हो कि मेरे पास वक्त नहीं है... मेरा शेड्यूल बिजी है... मैं थक जाती हूँ... और मैं पतली भी हूँ... क्यूंकि मैं इधर-उधर भागती रहती हूँ... तुम हिन्दुस्तान में अकेली औरत नहीं हो जो घर चला रही हो. इसे समझने की कोशिश करो और इस सोच से बाहर आओ.

...शादी के दिन से ही हमारे बीच कई मसले हैं... और हम उन मसलों को सुलझाना चाहते हैं... वरना मैंने बहुत पहले हमारे रिश्ते के बारे में कुछ फैसला कर लिया होता और वो पता नहीं क्या होता...

...तुम आपने माँ-बाप को कोई अहमियत नहीं देती हो. जैसे...

...उनसे अपनी कमियों के बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहती...

...जब मैं कहता हूँ कि जाओ उनके लिए कोई जगह ढूँढो जहाँ उन्हें मैं कोई बिजनेस करा सकूँ...तब तुम बड़ी आसानी से कह देती हो...मुझे इस बिजनेस के बारे में कुछ पता नहीं है...

...जब मैंने तुम्हारी माँ की राय तुम्हें बताई कि वो चाहती हैं कि हम अपने घर में सोफा रखें...तब तुम बहस करने लगी कि हमें रहना है इस घर में या उन्हें...?

...जब तुम अपने माँ-बाप को अहमियत नहीं दे सकती तो तुम क्या सोचती हो लोग तुम्हें अहमियत देंगे...?

...जब मैं थका हारा घर आता हूँ... मुझसे सवाल पूछना बन्द करो... और सलाह मत दिया करो कि मुझे बदलना चाहिए... समझने की कोशिश करो कि मैं क्यूँ थका हुआ घर लौटता हूँ... जबकि दिन भर तो मैं एक्टिव रहता हूँ... मैं थका हुआ लगता हूँ जब तुम्हें देख लेता हूँ...

...मेरे बिजनेस के बारे में निगेटिव बातें करना बन्द करो... इससे अच्छा है तुम मेरे बिजनेस से दूर रहो... क्या तुम्हें पता है मैंने कितनी बार तुमसे कहा है कि मेरे बिजनेस में मदद करो...? इतना कहने के बाद तुम जरा सा हिली और अपने दोस्त से बात करके मुझे सिर्फ एक ऑर्डर दिलाया...

...तो ये है तुम्हारी मदद मेरे बिजनेस के लिए...? तुम्हें पता है मैं तभी जिन्दा रह पाउँगा जब मेरा बिजनेस जून 2012 तक रॉकेट की तरह ऊपर जाएगा...बस खतम...

तुम्हें मेरी परेशानियों और मेरी माली हालत के बारे में कैसे पता चलेगा...? तुम्हें तो सिर्फ पैसे खर्च करना आता है... और उन पैसों को बचाके रखना जो मेरे पास पहले से ही हैं... तुम्हें सिर्फ मेरी और दूसरों की कमियां बताना आता है... और मेरे ऊपर हँसना आता है... और मेरी गलतियाँ ढूँढती हो और मेरे बिजनेस के बारे में राय देती हो...

अगर मैं इसी तरह बताता रहूँ तो एक लम्बी कहानी हो जायेगी...अब से मैं तुम्हारे साथ सख्ती से पेश आऊँगा...या तो तुम बदल लो खुद को या...

पत्नी - (रोते हुए) क्या आपको पता है आपने क्या-क्या कहा है...? क्या सच में मैं इतनी खराब हूँ...?

पति - सॉरी...! मुझे इतना कुछ नहीं कहना चाहिए था...

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कैस जौनपुरी

qaisjaunpuri@gmail.com

www.qaisjaunpuri.com

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