संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) - 5 : यशवंत कोठारी

SHARE:

भाग 1 /  भाग - 2 / भाग 3 / भाग 4 / संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) यशवंत कोठारी भाग 5 -   अगले दिन निदेशक ने अंतर राष्ट्रीय सेमिनार का...

भाग 1भाग - 2 / भाग 3 / भाग 4 /

संस्थानोपनिषद

(व्यंग्य –उपन्यास )

यशवंत कोठारी


भाग 5 -  

अगले दिन निदेशक ने अंतर राष्ट्रीय सेमिनार का एक विशद प्रोजेक्ट अपने मातहतों को बनाने के निर्देश दिए. विदेशों से आने वाले डेलिगेट्स के लिए दिल्ली में पांच सितारा व्यवस्थाएं जरूरी थी. दिल्ली में विज्ञान भवन की बुकिंग के लिए एक अफसर को दिल्ली भेजा गया. सेमिनार का शानदार प्रोजेक्ट लेकर निदेशक खुद दिल्ली जाना चाहते थे, मगर बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा, सचिव महोदय एक शादी में शरीक होने इस कस्बे में पधार रहे है –इस सूचना मात्र से निदेशक को आनंद आ गया. ऑफिस छोड़ कर वे शादीवाले के यहाँ पर हाजरी बजाने चले गए.

सचिव आये लेकिन दुआ सलाम से आगे कोई बात नहीं हो सकी.

हाँ एक काम हुआ सचिव का एक विस्तार व्याख्यान तय हो गया. सचिव के इस व्याख्यान में संस्थान के बाबु, चपरासी,, प्रोफेसर सबको जमा कर दिया गया. भीड़ देख कर सचिव को अच्छा लगा व्याख्यान के बीच बीच में करतल ध्वनि से भी सचिव का दिल खुश हो गया. मौका मुनासिब देख कर निदेशक ने राग सेमिनार छेड़ा, डीन अकेडमिक ने भी तान छेडी, चमचों ने ठेका लगाया, बात धीरे धीरे बन ने लगी. सचिव बोले

तुम पूरा प्रोजेक्ट तीन करोड़ का करके दिल्ली आ जाओ. मेरी पावर में पांच करोड़ तक के काम है. निकाल दूंगा. हाँ ये पी एम् या प्रेसीडेंट के लिए प्रोटोकोल के अनुसार काम करो. अपनी शासी निकाय के अध्यक्ष के पत्र के साथ जाना, हो सके तो उनको साथ ले जाना. राज्य सरकार से भी लिखवाना.

जी सर.

निदेशक ने हाँ में हाँ मिलायी.

सब लोग सचिव को छोड़ने हवाई अड्डे पर गए. उनको यात्रा का एल्बम भेंट किया एक चमची शोध छात्रा ने सेल्फी खिंची और सेमिनार का पहला पड़ाव पार हुआ.

सेमिनार के विषय जोरदार हो, विशेषज्ञ जोरदार हो विदेशी डेलिगेट्स आ जाये प्रधानमंत्री उदघाटन कर दे बस फिर सब मज़े ही मज़े. निदेशक ने सोच समझ के विषय तय कर दिया -भारतीय विद्याओं की शोध की प्रक्रिया याने रिसर्च मेथोडोलोजी ऑफ़ इंडियन साइंसेज. इसे भाई लोग इंडोलोजी भी कहते हैं.. यह तय करके निदेशक ने शोध पत्र चयन समिति बनाई व स्वयम् इसके अध्यक्ष हो गए. अन्य समितियों में अपने लोग अध्यक्ष व विरोधियों को महत्त्व हीन स्थानों पर फिट कर दिया. स्वीकृति की आशा में बजट जारी कर दिया. विज्ञान भवन बुक हो गया. प्रधान मंत्री से मिलने का टाइम ले ने . स्थानीय सरकार के मंत्री के साथ निदेशक प्रधान मंत्री कार्यालय के लिए उड़ चले.

००००००००००

प्रधान मंत्री कार्यालय की दिव्य व भव्य छटा देख कर स्थानीय मंत्री व निदेशक चकित रह गए. अफसर ही अफसर. हर काम के लिए अलग अफसर. प्रधान मंत्री जो स्वयम को जनता का प्रधान सेवक कहते थे, पूरे सामंतवादी रस्मों रिवाज के साथ रहते थे. मिलने से पहले इतनी ज्यादा सेकुरिटी जाँच की आदमी बिदक जाय . सुना था वे अठारह घंटे काम करते हैं, एक समय भोजन बस, नवरात्रि में केवल निम्बू पानी. एक मेडिकल टीम दफ्तर में, एक घर पर, व एक हर समय साथ, लेकिन क्या कोई यमराज से बच सका है आज तक. निदेशक निमन्त्रण पत्र के साथ प्रतीक्षा कक्ष में बैठ गये. मंत्री जी के कारण जल्दी ही बुलावा आ गया.

पी एम सर ने उद घाटन का न्योता स्वीकार कर लिया क्योंकि विज्ञान भवन में आयोजन था. वे बोले -

मेरा विषय से सम्बन्धित एक भाषण लिख कर भेज देना, मेरे सलाहकार देख लेंगे. यह कह कर प्रधान सेवक संसद के किये प्रस्थान कर गए. एक सहायक ने उनको स्वीकृति पत्र दे दिया. परम प्रसन्न मन निदेशक उड़ते हुए वापस अपने संस्थान को आ गये. वे समझ गए अब अच्छे दिन आये ही समझो.

ज्योहीं यह खबर फैली की संस्थान एक अंतर राष्ट्रीय सेमिनार देश की राजधानी में करने जा रहा है, पत्रकारों के पंख लग गए. ख़बरों का भयंकर अकाल था. समाचारों के दानव का रोज पेट भरने के लिए चौबीस घंटे की बाईट चाहिए थी. ऐसा सुनहरा अवसर कौन हाथ से जाने देता. प्रिंट मीडिया, ऑडियो विजुअल मीडिया लाव लश्कर के साथ संस्थान की सेवा में बिना बुलाये मेहमान की तरह आने लगे. एक जाता दूसरा आता दूसरा जाता तीसरा आता.

पत्रकारों में दो समूह बन गया एक संस्थान के क्रिया कलापों की तारीफ करता दूसरा आलोचना, जो आलोचना करता उसे मैनेज करने के लिए मास्टरों को लगाया गया, अफसरों की सेवाएँ ली गयी मगर बात बनी नहीं, धूर्त मीडिया के केप्सूल सुबह से शाम तक चलने लगे. बातें मंत्रालय से पी एम ओ तक जाने लगी, एक स्वतंत्र पत्रकार ने एक लम्बा आलेख एक विदेशी अख़बार में छपा मारा, प्रशासन कुछ न कर सका. स्थिति विस्फोटक थी. निदेशक को रोज़ सचिव की डाट पड रही थी, लेकिन संस्थान का एक तबका खुश था क्योंकि वह अपने आपको उपेक्षित मान रहा था...

एक स्थानीय पत्रकार जिसकी बीबी के नाम से चल रही फर्म से सामान नहीं ख़रीदा गया था, बड़ी दूर की कौडी लाया, उसने अपने पेम्फलेट रुपी पत्र में यह रहस्योद्घाटन किया की संस्थान के छात्रा होस्टल के पीछे कुछ दिनों पहले एक लाश मिली थी. इस की जाँच का क्या हुआ. परिसर में ही एक सुसाइड पॉइंट के भी समाचार पत्रकार जी ने बॉक्स बना कर छाप दिया.

इस मामले को साबित करने के बजाय दृश्य –श्रव्य माध्यम ने किस्से को इतना उछाला की उनकी टी आर पी बढ़ गयी मामला पिपली लाइव फिल्म जैसा हो गया. सेमिनार कही बहुत पीछे छूट गयी.

निदेशक इस बवाल से पिंड छुड़ाने के लिए छुट्टी जाने की सोचने लगे. लेकिन फिर एक घटना से सब ठीक होगया. हुआ यों की प्रदेश में निकाय चुनाव आ गये. पत्रकार व्यस्त हो गए उनको नए ग्राहक मिल गये, पीने खाने का जुगाड़ हो गया . उन लोगों ने संस्थान को बख्श दिया.

. सेमिनार दिल्ली में थी सो सब ने राहत की साँस ली.

सेमिनार के लिए दिल्ली में एक केम्प ऑफिस बनाया गया. इसे सेमिनार सचिवालय का बड़ा सा नाम दे दिया गया. दिल्ली के मीडिया को सँभालने के लिए एक बड़ी पी आर एजेंसी को संविदा पर लिया गया, यह तो बहुत बाद में पता चला की यह एजेंसी शासी निकाय के अध्यक्ष की पुत्र वधु चलाती है. एक इवेंट मैनेजमेंट कमेटी को भी उपकृत किया गया, जो एक उपसचिव की बेटी चलाती थी.

निश्चित दिन विज्ञान भवन को दुल्हन की तरह सजाया गया. संस्थान के निदेशक की हैसियत दुल्हन के बाप की तरह हो रही थी. सम्बन्धित मंत्री व सचिव खुद सब इंतजाम देख रहे थे. हाल की शुरू की सीटों पर मंत्रालय के अधिकारियों व् उनके परिवार के लोगों का कब्ज़ा था. विशेषज्ञों को पीछे बैठाया गया था. संस्थान के अधिकारी कर्मचारी अध्यापकों को इधर उधर खड़ा रहना पड़ा. बीच की जगह पर मीडिया वाले काबिज थे. सरकारी जनसंपर्क वाले व् पी आर एजेंसी वाले भी काम में लगे थे.

पी एम आये जल्दी से दीपक जलाया, चित्र पर माल्यार्पण किया. और सीधे भाषण देने के लिए डायस पर चले गए. पी एम् बोले और खूब बोले. सेमिनार का उदघाटन किया वर्तमान राजनीति पर चालू हो गये. विपक्ष मुझे व् मेरी सरकार को का म नहीं करने देता है, इस देश को विपक्ष मुक्त किया जाना चाहिए. वे सेमिनार के लिए लिखे भाषण को भूल कर अपने सरकार के गुणगान में व्यस्त रहे.

वे बोले –

भाइयों और बहनों,

आज पूरी दुनिया हमारी और देख रहीं है. हमें विश्व को नेतृत्व देना है. हर क्षेत्र में दुनिया को दिखा देना है की हम किसी से कम नहीं है. वी आर प्राउड टू बी इंडियन्स लेट अस बी वर्दी ऑफ़ इंडिया हम एक विशाल और महान देश में हैं, बस ये विपक्ष राष्ट्र द्रोह से बाज़ नहीं आता.

मीडिया ने भी उनको पूरा कवरेज दिया. एक दो छोटे चैनलों ने सीधा प्रसारण भी दिखा दिया. पी आर एजेंसी ने सब ठीक कर दिया. पूरा मामला आर्थिक है श्रीमान.

पी एम के जाने के बाद अलग अलग सेशन शुरू होने से पहले औपचारिक पंजीकरण हुए, किट, कूपनों व् गिफ्ट को लेकर कुछ झिक-झिक हुई जिसे सेमिनार के आयोजन सचिव ने संभाला, तकनीकी सत्र शुरू हुए मगर अब भीड़ नदारद थी. विशेषज्ञों के पर्चे पढ़े हुए माने जाने लगे. कई विदेशी मेहमान दिल्ली आगरा, जयपुर के गोल्डन ट्राईएंगल की और निकल गए. कुछ लोग अपनी महिला मित्रों के साथ सेमिनार करने चले गए, ये लोग दूसरे दिन ही आये. सेमिनार के दूसरे दिन फिर तकनीकी सेशन हुए. कुछ प्रतापी विशेषज्ञों ने मौखिक लम्बे चौडे व्याख्यान दिए, क्योंकि लिख कर बोलने में बड़े खतरे थे. मौखिक बोल कर बाद में यह कहा जा सकता था की मेरे कहने के गलत मतलब निकले गए. मगर श्रोताओं की कमी ही रही. सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए जिसमें लोक कलाकारों, छात्रोंने भाग लिया. कुछ अध्यापकों ने भी प्रतिभा दिखाई. डिनर से पहले आचमन की व्यवस्था थी कुछ सदाचारी अपने होटल कक्ष में ही गम गलत करते रहे. हर बार सेमिनारों में यहीं सब होता रहा है. हुआ और आगे भी होता रहेगा. स्वादिष्ट व् सफल सेमिनार ही ज्ञान विज्ञान को आगे बढाती है. छोटा कार्यक्रम करो तो मज़ा नहीं आता. नंगा क्या नहाये और क्या निचोड़े.

तीसरे दिन भी यहीं नाटक. यहीं नौटंकी.

समापन समारोह में विशेष अतिथि विभाग के काबिना मंत्री को बनाया गया. ताकि बजट की समस्या न रहे. मंत्रीजी ने सेमिनार को सफल घोषित कर दिया. खूब करतल ध्वनि हुई. इस सेमिनार की एक उपलब्धि हुई एक सामान्य अध्यापक को पद्मश्री मिली. एक अन्य चाटुकार को एक विश्वविद्यालय का कुलपति बना दिया गया. निदेशक मंत्रालय में फिट होने के सपने देखने लगे. लेकिन ये छिपे हुए फायदे है जो काफी दिनों के बाद में नज़र आते हैं.

तीन दिवसीय सेमिनार में पढ़े गए शोध पत्रों की पुस्तक प्रधानमंत्री के चित्र के साथ छाप दी गयी.

इसे पी एम ओ आफिस में स्वयं विभाग के मंत्री ले गए ताकि उनके नम्बर बढ़ सके.

कुछ दिनों के बाद मंत्री जी एक राज्य के राज्यपाल बना दिये गए. उनके मंत्री पद के समय के सब पाप धुल गए. वे राष्ट्र पति बनने के सपने देखने लगे. जैसे उनके दिन फिरे सबके फिरे, प्रभु.

००००००००००००

सेमिनार की अपार सफलता व् प्रधान मंत्री के साथ फोटो खिचवा के निदेशक व पूरी पार्टी गदगद भाव से अपने परिसर में लौटी. दो दिनों का अघोषित अवकाश रहा.

आज संस्थान फिर खुला है. पुस्तकालय के बाहर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी धूप सेंकते बतिया रहे हैं.

सुना है दिल्ली में भारी सेमिनार हुयी. प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया ‘

प्रधानमंत्री के पास और काम ही क्या है, उद्घाटन, शिलान्यास और मीटिंग.

सुना तो हमने भी है, मगर इससे विज्ञान का क्या भला हुआ?

विज्ञान का न सही अफसरों, अधिकारियों का तो फायदा हुआ. तीसरा बोल पड़ा.

दो –तीन करोड़ फूंक दिए हैं,

बीस प्रतिशत तो ईमानदारी का ही बनता है. यहीं देवता का भाग कहलाता है.

हाँ ये तो है, कमाई में ही समाई है.

प्रशासन की तो पांचों उंगली घी में और सर कडाही में.

लेखा शाखा की भी बल्ले बल्ले. एक बोला -

संस्थान में कुल बीस पद है जिनपर ऊपर की कमाई होती है. सब मिल बाँट कर खाते हैं.

अपन ग़रीबों को कौन पूछता है. चलो भाई काम करो साहब लोगों के आने का समय हो रहा है.

सेमिनार के विडीओ बनाये गए थे. सब वीडियो देख-देख कर खुश होते रहे. जो लोग दिल्ली न जा पाए थे उन्हें परिसर में ही फिल्म दिखाई गयी. उत्सव का यह वातावरण ज्यादा दिन नहीं चला. स्थानीय ऑडिट पार्टी ने आकर डेरा जमाया.

---

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) - 5 : यशवंत कोठारी
संस्थानोपनिषद (व्यंग्य –उपन्यास ) - 5 : यशवंत कोठारी
https://lh3.googleusercontent.com/-3lmKcMVBR1Q/WL6TGVzUZXI/AAAAAAAA3O0/SmiW4Qh-xyY/image_thumb%25255B4%25255D.png?imgmax=200
https://lh3.googleusercontent.com/-3lmKcMVBR1Q/WL6TGVzUZXI/AAAAAAAA3O0/SmiW4Qh-xyY/s72-c/image_thumb%25255B4%25255D.png?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2020/02/5.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2020/02/5.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content