सोमवार, 5 दिसंबर 2011

कैस जौनपुरी का धारावाहिक - 11 वीं कड़ी - आओ कहें... दिल की बात : सोलह साल की सलमा

 

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आओ कहें...दिल की बात
कैस जौनपुरी

सोलह साल की सलमा

ग्राहक – नाम क्या है तुम्हारा...?

सलमा – सलमा

ग्राहक – कब से कर रही हो ये सब...?

सलमा – चार साल से.

ग्राहक – और शुरू कब से किया था...?

सलमा – बारह साल की उम्र से.

ग्राहक – क्यूँ...?

सलमा – क्या करती...? मामा ने बेच दिया था किसी के हाथ.

ग्राहक – तब से यही चल रहा है...?

सलमा – क्या करूँ साहब...? सब इस धन्धे में सभी मन से नहीं आते हैं. कोई न कोई मज़बूरी होती है.

 

ग्राहक – तो छोड़ क्यूँ नहीं देती ये सब...?

सलमा – अरे साहब...! फिर खाऊँगी क्या...?

ग्राहक – नहीं... मतलब...वापस चली जाओ अपने घर.

सलमा – मर गई मैं सबके लिए...

ग्राहक – कोई तो होगा...?

सलमा – एक ब्वायफ्रेंड है.

ग्राहक – अच्छा...! वो क्या करता है...?

सलमा – हज्जाम है.

ग्राहक – तुम्हें चाहता है...?

सलमा – हूँहह...!

ग्राहक – वो जानता है तुम ये काम करती हो...?

सलमा – क्या साब...! तुम कहाँ मेरी कहानी में घुस गए...? जिस काम के लिए बुलाया है वो करो ना. क्यूँ फ़ोकट में अपना टाइम खराब करते हो...? मेरा तो जो होना है वो हो चुका.

 

ग्राहक – रुको, अभी जल्दी क्या है...?

सलमा – जल्दी है ना...! मुझे मिलने जाना है.

ग्राहक – किससे..?

सलमा – सलमान से.

ग्राहक – ये कौन है..?

सलमा – मेरा ब्वायफ्रेंड.

ग्राहक – उसे पता है कि तुम यहाँ हो...?

सलमा – नहीं, वो होटल के बाहर मिलेगा.

ग्राहक – अच्छा...! तुम घबराओ मत. कोई जोर जबर्दस्ती नहीं. तुम मुझे अपना दोस्त समझो.

सलमा – अच्छा...! दोस्त समझूँ तो एक बात कहूँ...?

ग्राहक – कहो...!

सलमा – मैं पीरियड में हूँ.

ग्राहक – तो फिर आई क्यूँ...?

सलमा – मैं तो मना कर रही थी लेकिन सब लड़कियाँ जा चुकी थीं. मैं ही बची थी तो मुझे ही भेज दिया..

 

ग्राहक – अच्छा...! कोई बात नहीं.

सलमा – तुमने पी भी रखी है ना...?

ग्राहक – नहीं तो.

सलमा – फिर ये बोतल...?

ग्राहक – ये तो बियर की बोतल है.

सलमा – नहीं. किस्स मत करो साब.

ग्राहक – क्यूँ...?

सलमा – नहीं. बाकी जो करना है करो. किस्स मत करो.

ग्राहक – अरे अजीब बात है...! एक तो पीरियड में हो. और छू भी नहीं सकता. ये तो गलत बात है ना...? मैं जरा बाथरूम से आया..

 

(तभी सलमा दरवाजा खोल के भाग जाती है. ग्राहक फोन पे एजेंट से बात करता है.)

ग्राहक – अरे यार तुमने क्या लड़की भेजी है...? बिल्कुल भी ढंग नहीं जानती. बात भी ढंग से नहीं करती. और तो और मैं जरा सा बाथरूम में गया तो भाग गई. और कह रही थी पीरियड में है....?

एजेंट – ठीक है साब. अभी देखता हूँ. वो नहीं तो किसी और को भेज दूँगा. आप टेन्शन मत लो.

ग्राहक – क्या यार...! तुमलोग इस तरह धन्धा करोगे तो कैसे चलेगा...?

एजेंट – भेजता हूँ साब. भेजता हूँ.

(थोड़ी देर में सलमा वापस आती है.)

सलमा – तुमने उसको फोन क्यूँ किया...?

ग्राहक – तुम बिना बताये चली गई तो मुझे लगा तुम चली गई.

सलमा – मैं नीचे पहले माले पे अपनी दोस्त से मिलने गई थी. वो भी इसी होटल में आई है. उसका फोन आया तो मैं मिलने चली गई.

ग्राहक – तो बता के जाती...?

सलमा – अरे मेरी तबियत ठीक नहीं है.

ग्राहक – चलो ठीक है. अब बैठ जाओ. पानी पीओगी...?

सलमा – नहीं.

 

ग्राहक – थोड़ा सा पी लो. गुस्सा ठण्डा हो जाएगा.

सलमा – बस पी लिया.

ग्राहक – आओ. अब इधर आ जाओ.

सलमा – अब मुझसे लेटा नहीं जा रहा. मुझे दर्द हो रहा है. मैं जा रही हूँ.

ग्राहक – ऐसे कैसे..? मैंने तीन हजार रुपये दिए हैं उनका क्या..?

सलमा – अरे तो पूरी रात बिताओगे क्या...?

ग्राहक – कमाल है...? अभी कुछ करने भी नहीं दिया ऊपर से चिल्ला रही हो.

सलमा – हाथ छोड़ो मेरा. मैं जा रही हूँ.

ग्राहक – रुको, मुझे तुम्हारे एजेंट से बात करने दो.

सलमा – छोड़ो मुझे.

(सलमा फिर चली जाती है. ग्राहक फिर एजेंट को फोन मिलाता है.)

 

एजेंट – क्या हुआ साब. पहुंची नहीं क्या...?

ग्राहक – क्या यार, वो तो फिर से चली गई. उसे तो बात करने की भी तमीज नहीं है. पहले तो आराम से बात कर रही थी. जब मैं उससे दोस्त बनके बात करने लगा तो वो तो उल्टा चिल्लाने लगी.

एजेंट – अच्छा साब रुको मैं देखता हूँ कोई और लड़की भेजता हूँ.

ग्राहक – देखो जरा ढंग की भेजना. ऐसी मत भेज देना.

एजेंट – ठीक साब.

(उसके बाद एजेंट का फोन नहीं मिला. रात बीत गई. सुबह हो गई. उस रात मैं सलमा (परिवर्तित नाम) का ग्राहक था. ये बात अभी तक मेरे दिल में थी. आज दिल की बात कह पाया हूँ. सलमा पढ़ेगी तो खुद को और मुझे पहचान जायेगी. मेरा नाम गुप्त रखने के लिए धन्यवाद. )

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कैस जौनपुरी

qaisjaunpuri@gmail.com

www.qaisjaunpuri.com

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